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देश में एक दशक में घटी तंबाकू-मदिरा सेवन करने वालों की संख्या

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 March 2016, 19:10 IST
QUICK PILL
  • भारत में प्रतिवर्ष धूम्रपान से 10 लाख लोगों की मौत हो जाती है. इसके अलावा देश में होने वाली कुल मौतों के 53 फीसदी की वजह यानी कैंसर और हार्ट अटैक जैसी गैर संक्रामक बीमारियों के लिए भी यह चौथा प्रमुख कारण है.
  • सर्वे-4 की रिपोर्ट न केवल तंबाकू बल्कि मदिरा सेवन के बारे में भी अच्छी सूचना देते हुए बताती है कि इसमें भी बीते 10 वर्षों में 38 से 34 फीसदी की गिरावट आई है.

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 के अंतर्गत सर्वेक्षण में शामिल 13 राज्यों के आंकड़े बताते हैं कि पुरुषों में तंबाकू इस्तेमाल कम हुआ है. 2005-06 में 50 फीसदी की तुलना में यह आंकड़े 2015 में 47 फीसदी तक पहुंच गए हैं.

हीलिस-सेखसरिया इंस्टीट्यूट फॉर पब्लिक हेल्थ के निदेशक डॉ. प्रकाश सी गुप्ता कहते हैं, "देखते हैं कि इस साल जारी ग्लोबल अडल्ट टोबैको सर्वे (गैट्स) इंडिया की रिपोर्ट क्या कहती है." वास्तव में यह परिणाम स्वागतयोग्य हैं क्योंकि यह तंबाकू इस्तेमाल में कमी दिखाते हैं. साथ ही यह परिणाम बीते कुछ वर्षों में लागू किए गए तंबाकू नियंत्रण नियमों के प्रभावों को भी प्रदर्शित करता है

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हालांकि डॉ. गुप्ता चेतावनी देते हैं कि कुल संख्या अभी भी बढ़ रही हैं और तंबाकू नियंत्रण नियमों को और बेहतर बनाते हुए लागू करने की आवश्यकता है.

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भारत में प्रतिवर्ष धूम्रपान से 10 लाख लोगों की मौत हो जाती है. इसके अलावा देश में होने वाली कुल मौतों के 53 फीसदी की वजह यानी कैंसर और हार्ट अटैक जैसी गैर संक्रामक बीमारियों के लिए भी यह चौथा प्रमुख कारण है.

मदिरा सेवन भी हुआ कम

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-4 की रिपोर्ट न केवल तंबाकू बल्कि मदिरा सेवन के बारे में भी अच्छी सूचना देते हुए बताती है कि इसमें भी बीते 10 वर्षों में 38 से 34 फीसदी की गिरावट आई है. बीते एक दशक में मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, हरियाणा, पश्चिम बंगाल और मेघालय जैसे राज्यों के पुरुषों में मदिरा सेवन में कमी आई है.

2005 में हुई थी संधि

गौरतलब है कि 27 फरवरी 2005 को डब्लूएचओ फ्रेमवर्क कंवेशन ऑन टोबैको कंट्रोल (एफसीटीसी) में भारत भी एक पार्टी बना था. उसके बाद से भारत ने तमाम नियमों को लागू किया और मौजूदा स्तर तक ले आया. डब्लूएचओ एफसीटीसी पर हस्ताक्षर करने के बाद देश के तमाम सार्वजनिक स्थानों और कार्यस्थलों पर धूम्रपान को पूर्णतया प्रतिबंधित कर दिया गया. 

इसके साथ ही रेस्त्रां, हवाई अड्डों, 30 कमरों से ज्यादा वाले होटलों समेत तमाम संस्थानों को स्मोकिंग जोन बनाने के निर्देश दिए गए थे. भारत सरकार ने तंबाकू सेवन के प्रचार-प्रसार पर भी पूर्णतया प्रतिबंध लगा दिया था.

इस संधि के बाद ही देश में तंबाकू उत्पादों पर सचित्र चेतावनी दी जाने लगी. आज देश के तंबाकू उत्पादों में एक ओर 40 फीसदी सचित्र चेतावनी दी गई होती है. हालांकि संधि के मुताबिक सचित्र चेतावनी तंबाकू उत्पादों के दोनों ओर 30 फीसदी होनी चाहिए.

First published: 9 March 2016, 19:10 IST
 
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