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दिल्ली सरकार ने कसी प्राइवेट स्कूलों की नकेल

आशीष पाण्डेय | Updated on: 10 February 2017, 1:48 IST
QUICK PILL
  • दिल्ली सरकार की कैबिनेट ने ऐसे प्रवधानों को हटाने का लिए अपनी सहमती प्रदान की है जिनका छोटे बच्चों के नर्सरी एडमिशन से सीधा ताल्लुक न हो.
  • केजरीवाल ने कहा कि सरकार स्कूलों की स्वायत्तता का अतिक्रमण नहीं कर रही है. स्कूल अपनी एडमिशन प्रक्रिया स्वयं तय करें, लेकिन एडमिशन के मानदंड सबके लिए समान,निष्पक्ष, पारदर्शी और तर्कसंगत होने चाहिए.

दिल्ली सरकार ने प्राइवेट स्कूलों में नर्सरी एडमिशन के पुराने दिशानिर्देशों में से 62 प्रावधानों को हटाने का फैसला किया है. दिल्ली सरकार इन बदलाओं के जरिए प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन की मनमानी प्रक्रिया पर रोक लगाना चाहती है.

सरकार के इस फैसले से प्राइवेट स्कूलों ने अपनी असहमति जताई है. स्कूलों का आरोप है कि दिल्ली सरकार सम-विषम फार्मूले के लिए बस नहीं देने का बदला दूसरी तरह से निकाल रही है.

दिल्ली सरकार की कैबिनेट ने ऐसे प्रावधानों को हटाने का लिए अपनी सहमति प्रदान की है. जिनका छोटे बच्चों के नर्सरी एडमिशन से सीधा ताल्लुक न हो. मसलन माता-पिता या अभिवावक की आर्थिक स्थिति, माता-पिता के प्रोफेशन या उनकी कार्यकुशलता, स्कूलों की फीस अदायगी, माता-पिता की जीवन शैली, पसंद-नापसंद, धुम्रपान और मांसाहार जैसे विषयों को एडमिशन की प्रक्रिया से बाहर कर दिया है.

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सरकार के इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नर्सरी एडमिशन के मानदंड विचित्र और आश्चर्यजनक थे.

केजरीवाल ने कहा कि सरकार का फैसला कहीं से भी हाईकोर्ट के दिशानिर्देशों का उल्लंघन नहीं है. सरकार के ये फैसले स्कूलों की स्वायत्तता का अतिक्रमण नहीं कर रहे हैं. स्कूल अपनी एडमिशन प्रक्रिया स्वयं तय करें, लेकिन एडमिशन के मानदंड सबके लिए समान, निष्पक्ष, पारदर्शी और तर्कसंगत होने चाहिए.

सरकार ने प्राइवेट स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षित करने और इसके अलावा अन्य सारे रिजर्वेशन्स को रद्द करने का फैसला लिया हैं.

पहले दिल्ली के प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन के लिए मुख्यमंत्री, बड़े अधिकारियों और नेताओं की सिफारिश की जरूरत होती थी. इसे भी सरकार ने खत्म करने का निर्णय लिया है.

दिल्ली सरकार ने जिन 62 मानदंडों को हटाने का निर्णय कैबिनेट की बैठक में लिया है उनके कुछ मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं

1. पहले: म्यूजिक और खेल में महारथ रखने वाले माता-पिता के बच्चों को एडमिशन में वरीयता.

अब: बच्चों के एडमिशन के लिए ऐसे नियम भेदभाव को बढ़ावा देने वाले हैं, लिहाजा इस नियम के हटाया जा रहा है.

2. पहले: बच्चों के एडमिशन में माता-पिता की शिक्षा के अनुसार प्वॉइंट दिये जाते थे.

अब: बच्चों के एडमिशन में इस तरह के नियम नहीं होंगे, अगर किसी के माता-पिता शिक्षित नहीं है तो इस आधार पर उसके बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए. भारत 100 फीसदी साक्षर नहीं है, न ही हो सकता है.

3. पहले: एडमिशन में बच्चों की स्थिति देखी जाती थी.

अब: नर्सरी एडमिशन में बच्चों की स्थिति को देखा जाना पूरी तरह से अतार्किक है, लिहाजा इस नियम को भी हटाया जाता है.

4. पहले: नर्सरी एडमिशन में बच्चे के मां की शिक्षा को देखा जाता था.

अब: बच्चों के नर्सरी एडमिशन में ऐसा नहीं होगा, इससे भेदभाव हो सकता है, हो सकता है कि बच्चे की मां अशिक्षित हो. पर इससे उसके बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता.

5. पहले: नर्सरी एडमिशन में मेधावी बच्चों को लिया जाता है. एडमिशन के लिए बच्चों का टेस्ट लिया जाता है.

अब: नर्सरी एडमिशन में ऐसा नहीं होगा क्योंकि ऐसा कोई मापदंड नहीं है जो इतने छोटे बच्चों को परख सकें.

6. पहले: नर्सरी में एडमिशन के लिए आवश्यक था कि माता-पिता दिल्ली के निवासी हो और बच्चे का जन्म दिल्ली में हुआ हो.

अब: नर्सरी एडमिशन में यह नियम नहीं होगा क्योंकि यह किसी भी नागरिक के मौलिक अधिकारों का उलंघन है.

7. पहले: नर्सरी एडमिशन में बच्चों की भाषा दक्षता को वरीयता दी जाती थी.

अब: नर्सरी एडमिशन में यह नियम नहीं होगा क्योंकि नर्सरी के बच्चों की भाषा दक्षता का मापन नहीं हो सकता.

8. पहले: नर्सरी एडमिशन में बच्चों की खेल और संगीत में अभिरुचि पर प्वॉइंट मिलते थे.

अब: नर्सरी एडमिशन में यह नियम नहीं होगा क्योंकि संगीत और खेल में छोटे बच्चों की अभिरुचि को परखा नहीं जा सकता.

9. पहले: नर्सरी एडमिशन में बच्चों के माता-पिता के व्यवहार और मान्यताओं को भी परखा जाता था.

अब: नर्सरी एडमिशन में यह नियम नहीं होगा क्योंकि इसकी पहचान नहीं की जा सकती और बच्चों के एडमिशन की प्रक्रिया में इसका दुरुपयोग हो सकता है.

10. पहले: नर्सरी एडमिशन में बच्चों को विशेष गुणों के आधार पर प्वॉइंट दिये जाते थे.

अब: नर्सरी एडमिशन में यह नियम नहीं होगा क्योंकि बच्चों में इन गुणों की पहचान मुश्किल है और एडमिशन में इसका दुरुपयोग किया जा सकता है.

First published: 8 January 2016, 12:33 IST
 
आशीष पाण्डेय @catchhindi

संवाददाता, कैच हिंदी. बीएचयू से पॉलिटिकल साइंस(आनर्स). जामिया मिल्लिया इस्लामिया एमसीआरसी से मॉस कॉम. मल्टी-मीडिया जर्नलिस्ट के तौर पर डिजिटल, टेलीविज़न, डॉक्यूमेंट्री, रेडियो, सोशल मीडिया कैंपेनिंग, इलेक्शन कैंपेनिंग के लिए काम कर चुके हैं.

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