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ओडिशा: 'आईसीयू' में एंबुलेंस सेवा, कंधे पर शव उठाने के लिए कूल्हा तोड़ा

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 August 2016, 17:04 IST
(एजेंसी)
QUICK PILL
  • ओडिशा के बालासोर में एक महिला के शव को लटकाकर ले जाने के लिए कूल्हे की हड्डी तोड़ दी गई.
  • इससे पहले कालाहांडी जिले में एक शख्स को अपनी पत्नी का शव कंधे पर ढोना पड़ा था.
  • मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने शवों को ले जाने के लिए महाप्रयाण नाम से फ्री एंबुलेंस सेवा शुरू की है.
  • महाप्रयाण योजना के दायरे में राज्य के 30 जिला अस्पताल और तीन मेडिकल कॉलेज आ रहे हैं.

ओडिशा में लगातार दूसरे दिन शर्मसार कर देने वाली तस्वीर सामने आई है. कालाहांडी के दाना मांझी के मामले के बाद एक बार फिर राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं का स्याह सच सामने आया है. दाना मांझी को अस्पताल में एंबुलेंस नहीं होने की वजह से 10 किलोमीटर तक पत्नी का शव कंधे पर ढोना पड़ा था.

यह तस्वीर अभी धुंधलाई भी नहीं है कि राज्य के बालासोर से एक और दर्दनाक घटना पता चली है. बालासोर के सोरो इलाके के एक स्वास्थ्य केंद्र में स्वीपर ने शव के ऊपर खड़े होकर अपने पैरों से कूल्हे की हड्डियां तोड़ीं.

पढ़ें: वीडियो: ओडिशा के कालाहांडी में अंधेरगर्दी, 10 किलोमीटर तक पत्नी का शव कंधे पर ढोया

इस भयावह घटना के दौरान इस प्रक्रिया के जरिए शव को छोटा करके उसकी गठरी बनाई गई. इसके बाद दो कर्मचारी इस सिमटी लाश को कपड़े और प्लास्टिक से लपेटकर बांस की लकड़ी पर लटकाते हैं और अपने कंधे पर उठाकर चल देते हैं.

बालासोर के सोरो का मामला

जिस महिला के शव के साथ यह खौफनाक हरकत की गई वह 76 साल की विधवा सालामनी बारिक है. बुधवार को बालासोर से 30 किमो दूर सोरो में ट्रेन की चपेट में आकर सालामनी की मौत हो गई थी.

बारिक के शव को बालासोर तक लाने के लिए कोई एंबुलेंस उपलब्ध नहीं थी. दरअसल सोरो में कोई अस्पताल है ही नहीं, सिर्फ एक सामाजिक स्वास्थ्य केंद्र है और शव को पोस्टमार्टम के लिए ट्रेन से बालासोर तक लाना था.

पढ़ें: ओडिशा सरकार ने मृत पत्नी के शव को कंधे पर ढोने वाली घटना की जांच के दिए आदेश

शव को स्टेशन तक ले जाने के लिए एक ऑटो करने के बारे में सोचा गया, लेकिन वह बहुत महंगा साबित हो रहा था. ऐसे में कर्मचारियों से कहा गया कि वह पैदल ही शव को स्टेशन तक लेकर जाएं.

'मां को बुरे हाल में लेकर गए'

इससे पहले शव को पुलिस द्वारा स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था, जहां वह घंटों स्ट्रेचर पर पड़ी रहने के कारण बेहद सख्त हो गई थी.

ऐसे में शव को आसानी से बांधा जा सके, इसके लिए एक कर्मचारी ने अपने पैर से शव के कूल्हे की हड्डी को तोड़ा और फिर गठरी बनाकर उसे 2 किलोमीटर दूर रेलवे स्टेशन तक ले जाया गया.

मृतक के बेटे रवींद्र बारिक ने बताया, "वह मेरी मां को बुरे हाल में लेकर गए. मैं मजबूर था. कुछ नहीं कर सका. मैं न्याय की गुहार लगाता हूं." 

मानवाधिकार आयोग ने मांगा जवाब

इस बीच मामला सामने आने के बाद ओडिशा मानवाधिकार आयोग ने पुलिस और बालासोर जिला प्राधिकरण से जवाब मांगा है. एक दिन पहले कालाहांडी में दाना मांझी का मामला सामने आया था, जो लगातार छह घंटे तक अपनी पत्नी का शव कंधे पर लादे 10 किलोमीटर तक पैदल चलने के लिए मजबूर हुए.

यह मामले तब सामने आए हैं, जब राज्य की नवीन पटनायक सरकार ने ऐसी दो योजनाएं लागू की हैं, जिसके तहत शव को ले जाने में मदद मुहैया करवाई जाती है.

37 अस्पताल, 40 शव वाहन

अभी तक यह साफ नहीं है कि मांझी जिस सरकारी अस्पताल से निकले थे, वह उस योजना के तहत आता है कि नहीं जिसमें गरीबों को शव वाहन मुहैया करवाया जाता है.

बताया जा रहा है कि ओडिशा के 37 सरकारी अस्पतालों में 40 शव वाहन मौजूद हैं. कालाहांडी जिले में 25 लाख की आबादी पर एक ही शव वाहन आवंटित है.

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने शवों को ले जाने के लिए महाप्रयाण नाम से एक फ्री एंबुलेंस सेवा की शुरुआत की है. इसके दायरे में 30 जिला अस्पताल और तीन मेडिकल कॉलेज आ रहे हैं.

First published: 26 August 2016, 17:04 IST
 
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