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महाराष्ट्र में सभी अवैध मंदिरों को गिराने का ऐतिहासिक फैसला

अश्विन अघोर | Updated on: 3 October 2016, 5:12 IST
QUICK PILL
  • बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि 2009 के बाद सार्वजनिक स्थानों पर खड़े किए गए मंदिरों को ध्वस्त किया जाएगा.
  • हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि अवैध मंदिरों को गिराते समय किसी राजनीतिक नेता का दबाव नहीं होना चाहिए.
  • ढहाने की जिम्मेदारी राज्य के नगर निगम के इलाकों में नगर आयुक्तों और ग्रामीण इलाकों में जिला कलेक्टरों पर डाली गई है.

हाल में बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए महाराष्ट्र सरकार को आदेश दिए हैं कि राज्य में जितने भी अवैध मंदिर हैं, उन्हें वह इस साल के अंत तक गिरा दे. यह आदेश न्यायाधीश अभय ओका और न्यायाधीश अहमद सईद की खंडपीठ ने जारी किए हैं.

सरकार को इस साल 31 दिसंबर तक सभी अवैध धार्मिक निर्माणों की पहचान कर उन्हें ध्वस्त करने हैं. हाईकोर्ट ने कहा कि कोई भी धर्म सार्वजनिक संपत्ति पर पूजा के लिए अवैध निर्माण करने को प्रोत्साहित नहीं करता. हाईकोर्ट के आदेशानुसार सितंबर 2009 के बाद के सभी अवैध निर्माणों को गिराया जाएगा.

गौरतलब है कि मुंबई का एक गैरसरकारी संगठन सोसाइटी (तुरंत न्याय के लिए) ने राज्य के अवैध मंदिरों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए 2010 में बॉम्बे हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका पेश की थी. इनमें से अधिकांश मंदिर या तो सड़कों के किनारे या फुटपाथ पर बने हुए हैं.

इससे सड़क पर सुविधा से चलने के नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन होता है. बृहन्मुंबई महानगरपालिका के सूत्रों के मुताबिक मुंबई में 482 अवैध धार्मिक निर्माण हैं. उनमें से अधिकतर बायकुला, दादर, और अंधेरी (पश्चिम) में हैं.

दिलचस्प तथ्य यह है कि 2010 से लंबित इस जनहित याचिका के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने एक सरकारी रेजलूशन (जीआर) भी जारी किया था. इसमें सरकार ने कहा था कि सड़क के किनारे और फुटपाथों पर बने सभी अनधिकृत मंदिर, जो चलने में बाधक बन रहे हैं, को ढहा दिया जाएगा. जीआर में इसका भी खासतौर से उल्लेख था कि 2010 के बाद बने अनधिकृत मंदिरों का नियमन नहीं किया जाएगा.

आदेश और समय सीमा

सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार अपनी तय समय सीमा का पालन करने में विफल रही है. कोर्ट ने सरकारी मशीनरी को आदेश दिया कि अवैध मंदिरों को गिराते समय किसी राजनीतिक नेता का दबाव नहीं होना चाहिए.

ढहाने की जिम्मेदारी राज्य के नगर निगम के इलाकों में नगर आयुक्तों और ग्रामीण इलाकों में जिला कलेक्टरों पर डाली गई है. हाईकोर्ट ने पुलिस आयुक्तों और पुलिस अधीक्षकों को यह भी कहा कि वे विध्वंस करने वाले दस्ते का ध्यान रखें ताकि कानून और व्यवस्था बनी रहे और अप्रिय घटना नहीं हो.

निर्देश जारी करते समय बॉम्बे हाईकोर्ट ने सरकार को छूट नहीं दी है. आदेश ने कहा कि फैसला देने मात्र से कोर्ट की भूमिका खत्म नहीं हो गई. कोर्ट इस संबंध में प्रगति और असैन्य अधिकारियों के कामों को बराबर मॉनिटर करेगा.

हाईकोर्ट ने असैन्य अधिकारियों को 30 नवंबर तक अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए.

कोर्ट ने राज्य सरकार को औरंगाबाद जिले में एक तहसीलदार की मारपीट के मामले में 'की गई कार्रवाई पर एक रिपोर्ट' भी देने को कहा. यह मारपीट शिव सेना के एक नेता ने की थी.

सख्ती

बॉम्बे हाईकोर्ट में अनुपालन रिपोर्ट हर महीने प्रस्तुत की जाएगी. खंडपीठ ने इस संबंध में असंतोष प्रकट किया कि राज्य सरकार अवैध मंदिरों को गिराने के अपने जीआर को लागू करने में विफल रही है. हाईकोर्ट ने कहा, 'इस दिशा में महज कागजी कार्रवाई थी, एक्शन नहीं लिया गया. सरकार ने अपने खुद के जीआर को लागू करने को पक्का करने के लिए कुछ नहीं किया.'

नवंबर 2015 में जारी जीआर के अनुसार, महाराष्ट्र के सभी अवैध मंदिरों को 6 महीने के भीतर गिराया जाना था. सर्वोच्च न्यायालय की अंतरिम रिपोर्ट के बाद 5 मई 2011 और 2015 के एक जीआर के बाद राज्य सरकार ने अवैध धार्मिक निर्माण के खिलाफ नियमन, स्थान परिवर्तन और हटाने जैसी कार्रवाई करने के लिए एक विस्तृत स्कीम तय की थी. जीआर में मुंबई, थाणे और पुणे में जिला और नगर निगम स्तर पर खास समितियां बनाए जाने का प्रस्ताव भी था.

बॉम्बे हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने जो जानकारी दी, उसके मुताबिक सितंबर 2009 के बाद 871 अवैध धार्मिक निर्माण नगर निगम सीमा में हैं. इनमें से केवल 225 गिराए गए हैं. जबकि राज्य के दूसरे हिस्सों में 874 अवैध निर्माण हैं, और अब तक 159 ढहाए गए हैं.

First published: 3 October 2016, 5:12 IST
 
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