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कल तक था भिखारी और आज कैंब्रिज यूनिवर्सिटी का छात्र

कैच ब्यूरो | Updated on: 16 September 2016, 13:09 IST
(सुयम चैरिटेबल ट्रस्ट)

इसे लगन कहें या किस्मत कि सड़कों पर भीख मांगने वाला एक लड़का आज कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षा पास करके वहां का छात्र बन गया है. यह कहानी है चेन्नई निवासी 22 वर्षीय जयावेल की जिसे अब प्रतिष्ठित कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में एडवांस्ड ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग पढ़ने का मौका मिल गया है.

जयावेल की असल जिंदगी की कहानी कुछ फिल्मी सी नजर आती है. आनंद विकटन पत्रिका में छपी रिपोर्ट की मानें तो 1980 के दशक में फसल बर्बाद होने के चलते जयावेल का परिवार नेल्लोर से चेन्नई पहुंचा और पेट पालने के लिए भीख मांगने लगा. चूंकि परिवार के भरण-पोषण का इकलौता जरिया भीख मांगना ही था, इसलिए जयावेल भी बचपन से ही अपने माता-पिता के साथ भिखारी बन गया.

जयावेल जब काफी छोटा था उसके पिता का देहांत हो गया और उसकी मां को शराब की लत लग गई. रोज भीख मांगने से जो भी पैसा आता उसकी मां उसे शराब पर उड़ा देती. निराशाजनक वर्तमान और बेकार भविष्य को अपनी आंखों के सामने देखने के बावजूद कोई विकल्प न होने के चलते जयावेल भीख मांगता रहा.

इस बीच जब जयावेल की मुलाकात उमा मुथुरमन से हुई तब जाकर एक उम्मीद की किरण नजर आई. मुथुरमन और उनके पति चेन्नई की सड़कों पर भीख मांगने वाले बच्चों पर जानकारी जुटा रहे थे. 

जयावेल को देखकर उन्होंने मदद के हाथ बढ़ाए. उन्होंने 1999 में जयावेल को अपने संरक्षण में ले लिया. उनकी एनजीओ सुयम चैरिटेबल ट्रस्ट ने जयावेल को ऊचित शिक्षा दिलानी शुरू की. 

12वीं कक्षा में अच्छे अंक लाने पर कई दानदाताओं ने जयावेल को उच्च शिक्षा के लिए ऋण देने की पेशकश की. इसके बाद उसने कैंब्रिज यूनिवर्सिटी का एंट्रेंस एग्जाम पास किया और ब्रिटेन के वेल्स में स्थित ग्लिंदूर यूनिवर्सिटी में 'पर्फारमेंस कार इनहैंसमेंट टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग' कोर्स में सीट पाई. इस कोर्स में रेसिंग कारों की क्षमता बढ़ाने के संबंध में पढ़ाई होती है. अब जयावेल आगे की पढ़ाई के लिए इटली जा रहा है.

इसके साथ ही उस एनजीओ के अन्य बच्चों के लिए जयावेल एक मिसाल बन गया है. सुयम ट्रस्ट ने लंदन में जयावेल की पढ़ाई के लिए 17 लाख रुपये का लोन लिया. इटली जाकर जयावेल को पढ़ाई के दौरान कोई दिक्कत न आए इसके लिए मुथुरमन को 8 लाख रुपये का अलग से इंतजाम करना पड़ा.

जयावेल कभी-कभार अपनी मां से मिलता है और उसे उनकी शराब की आदत पसंद नहीं है. अपनी पढ़ाई के पूरी करने के बाद जयावेल की ख्वाहिश है कि वो एनजीओ चलाने में मुथुरमन की मदद करे.

First published: 16 September 2016, 13:09 IST
 
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