Home » इंडिया » once again questing dhananjoy chatterjee hanging
 

हेतल पारेख रेप और हत्या मामले में धनंजय चटर्जी की फांसी पर फिर उठे सवाल

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 August 2016, 17:01 IST

पश्चिम बंगाल के भवानीपुर में 5 मार्च 1990 को हेतल पारेख नाम की किशोरी से रेप और हत्या के मामले में 12 साल पहले 14 अगस्त 2004 को अलीपुर सेंट्रल जेल में फांसी के तख्ते पर लटकाये गए धनंजय चटर्जी के बेगुनाह होने की आवाज अब फिर से उठने लगी है.  

इस मामले में भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) के दो प्रोफेसर और एक रिटायर्ड इंजीनियर ने अपने अध्ययन और शोध के आधार पर एक किताब लिखी है.

खबरों के मुताबिक संयुक्त तौर पर लिखी इस किताब में दावा किया गया है कि धनंजय चटर्जी को हेतल पारेख मामले में गलत तरीके से फंसाया गया.

इस किताब में अनुमान लागाया गया है कि यह मामला ऑनर किलिंग का हो सकता है, इसलिए मामले की फिर से जांच कराई जाए. लेखकों का दावा है कि इस मामले में निर्दोष धनंजय की बलि ली ली गई.

आईएसआई के प्रोफेसर प्रबल चौधरी और प्रोफेसर देवाशीष सेनगुप्ता ने धनंजय मामले में अपने अध्ययन, शोध और निष्कर्षों पर आधारित एक रिपोर्ट पिछले साल प्रकाशित की थी. इसमें उनकी मदद रिटायर्ड इंजीनियर परमेश गोस्वामी ने भी की थी. 

किताब में फांसी पर उठाए सवाल

अब तीनों ने मिल कर पूरी घटना के निष्कर्ष को एक किताब की शक्ल दी है. यह किताब आगामी सप्ताह में ‘अदालत, मीडिया, समाज एवं धनंजय की फांसी’ नाम से प्रकाशित होगी.

लेखकों ने बताया कि इस किताब का विचोमन 11 अगस्त को बांकुरा जिले के छातना स्थित भारत सभा हॉल में धनंजय के परिजनों की मौजूदगी में होगा.

मालूम हो कि धनंजय चटर्जी को कोलकाता के अलीपुर सेंट्रल जेल में 14 अगस्त, 2004 को फांसी दी गई थी. उस समय केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की एनडीए सरकार और पश्चिम बंगाल में लेफ्ट की ज्योति बसु की सरकार थी.

10 साल में तीन अदालतों से दोषी

लेखकों का मानना है कि मामले में दोषी साबित होने के बावजूद धनंजय की फांसी हमेशा विवादों का विषय बनी रही, क्योंकि निचली से उच्चतम न्यायालय ने उसे परिस्थितिजन्य सुबूतों के आधार पर दोषी माना था.

किताब में लेखकों ने आशंका जताई है कि यह कथित रेप का नहीं, बल्कि आम सहमति से यौन संबंध का मामला था.

इस किताब के मुताबिक कैसे एक व्यवस्था इतनी दोषपूर्ण हो सकती है कि पूरी तरह से निर्दोष व्यक्ति को तीन-तीन अदालतों ने 10 वर्ष के भीतर दोषी करार दे दिया.

धनंजय की कई समीक्षा याचिकाओं और दया याचिकाओं को कोर्ट के द्वारा खारिज कर दिया गया था. उन्होंने आशंका जताई कि यह कथित दुष्कर्म नहीं बल्कि आम सहमति से यौन संबंध का मामला था.

किताब में लिखा है कि धनंजय को सिर्फ तीन लोगों की गवाही और हेतल के घर से गायब कुछ सामान के उसके पास से मिलने के आधार पर रेप और हत्या का दोषी सिद्ध कर दिया गया.

गौरतलब है कि 1990 में मध्य कोलकाता के एक अपार्टमेंट में हेतल के साथ दुष्कर्म व हत्या के मामले में निचली अदालत से लेकर हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट तक ने धनंजय को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी.

'धनी व्यक्ति बनकर जन्म लेना चाहूंगा'

तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने भी दया याचिका को खारिज कर दिया था. जिसके बाद अलीपुर सेंट्रल जेल में जल्लाद नाटा मलिक ने धनंजय चटर्जी को फांसी के फंदे पर लटका दिया था.

धनंजय के परिजनों ने उसे बेगुनाह बताते हुए फांसी का विरोध किया था और विरोध की वजह से उन्होंने राष्ट्रपति की ओर से भेजी गई उस चिट्ठी को भी लेने से इनकार कर दिया, जिसमें चटर्जी की दया याचिका ख़ारिज करने की बात कही गई थी. 

तब वो सूचना उसके घर पर चिपका दी गई थी. इसके अलावा परिजनों ने धनंजय का शव भी नहीं लिया था. उस मामले में मानवाधिकार संगठन ने चटर्जी के परिजनों का साथ दिया था.

संगठन की ओर से इस मामले में जनहित याचिका भी दायर की गई थी. इनमें प्रमुख फ़िल्मकार अपर्णा सेन, बंगाली लेखक सुनील गांगुली और लेखिका महाश्वेता देवी भी शामिल थीं.

फंसी से पहले धनंजय चटर्जी के अंतिम शब्द थे "अगले जन्म में मैं धनी व्यक्ति बनकर जन्म लेना चाहूंगा, क्योंकि गरीब की सुनने वाला कोई भी नहीं."

First published: 11 August 2016, 17:01 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी