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मोदी लहर को एक और धक्का

निखिल कुमार वर्मा | Updated on: 24 November 2015, 22:04 IST
QUICK PILL
  • दिल्ली और बिहार के विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद अब भाजपा को उसके गढ़ रहे मध्य प्रदेश में लोकसभा के उप चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा है. रतलाम लोकसभा सीट पर उसे लगभग 90 हजार मतोंं से हार का सामना करना पड़ा है.
  • हालांकि भाजपा के पास इस हार के बीच भी सांत्वना के कुछ सूत्र छिपे हैं. पांच विधानसभाओं के लिए हुए उपचुनाव में तीन भाजपा को मिली हैं.

बिहार से शुरू हुई भाजपा की हार का सिलसिला मध्य प्रदेश तक पहुंच गया है. रतलाम लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा की करारी हार हुई है. केंद्र में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद पहली बार ऐसा हुआ जब भाजपा को लोकसभा में अपने कब्जे वाली सीट गंवानी पड़ी है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के जबर्दस्त चुनाव प्रचार के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी कांति लाल भूरिया ने भाजपा प्रत्याशी निर्मला भूरिया को 88,877 मतों के भारी अंतर से हराया.

आम चुनाव 2014 में बीजेपी के दिलीप सिंह भूरिया ने करीब एक लाख मतों से यूपीए सरकार में मंत्री रहे कांतिलाल भूरिया को हराया था. उनके निधन के बाद यह सीट खाली हुई थी. भाजपा ने यहां उनकी बेटी और पेटलावद से विधायक निर्मला भूरिया को अपना प्रत्याशी बनाया था. सीएम शिवराज और उनकी पूरी कैबिनेट ने निर्मला को जिताने के लिए पूरा जोर लगाया, लेकिन उन्हें असफलता हाथ लगी.

राजनीतिक जानकार कांग्रेस की इस जीत को मध्य प्रदेश में शिवराज की घटती लोकप्रियता और देश में खत्म हो रही मोदी लहर से जोड़ कर देख रहे हैं


राजनीतिक जानकार कांग्रेस की इस जीत को मध्य प्रदेश में शिवराज की घटती लोकप्रियता और देश में खत्म हो रही मोदी लहर से जोड़ कर देख रहे हैं. वहीं बिहार के बाद मध्य प्रदेश में चुनावी सफलता कांग्रेस के लिए संजीवनी की तरह है. व्यापम घोटाले में बीजेपी पर आरोप लगने के बाद यह चुनाव शिवराज के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ था. शिवराज ने इस सीट पर जीत दर्ज करने के लिए दर्जनों रैलियां की और कई दिनों तक रतलाम में कैंप भी किया लेकिन जनता ने इस बार उनकी बातों पर भरोसा नहीं जताया.

2014 के आम चुनाव में बीजेपी ने मध्य प्रदेश के 29 संसदीयों सीटों में से 27 पर जीत दर्ज की थी. कांग्रेस से सिर्फ ज्योतिरादित्य सिधिंया और कमलनाथ ही अपनी सीट बचा सके थे. अक्सर कहा जाता है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस कई खेमों में बंटी हुई है लेकिन रतलाम में इस बार गुटबाजी को छोड़कर दिग्विजय सिंह, कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांतिलाल भूरिया के लिए रैलियां की. अब लोकसभा में कांग्रेस के 45 सांसद हो गए हैं.

दूसरी ओर तेलंगाना के वारंगल (सुरक्षित) सीट पर हुए उप चुनाव में भी बीजेपी को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा है. यह सीट तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के खाते में गई है. टीआरएस उम्मीदवार पसनूरी दयाकर ने कांग्रेस प्रत्याशी एस सत्यनारायण को करीब 4.6 लाख मतों के विशाल अंतर से पराजित किया. कांग्रेस उम्मीदवार को 1,56,311 वोट मिले जबकि भाजपा-तेदेपा गठबंधन की ओर से चुनाव लड़ रहे भाजपा के पी देवैया को महज 1,30,178 वोट मिले.

First published: 24 November 2015, 22:04 IST
 
निखिल कुमार वर्मा @nikhilbhusan

निखिल बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं. राजनीति और खेल पत्रकारिता की गहरी समझ रखते हैं. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी में ग्रेजुएट और आईआईएमसी दिल्ली से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा हैं. हिंदी पट्टी के जनआंदोलनों से भी जुड़े रहे हैं. मनमौजी और घुमक्कड़ स्वभाव के निखिल बेहतरीन खाना बनाने के भी शौकीन हैं.

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