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सम-विषम के शोर में राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक का एक साल

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 April 2016, 22:55 IST

यह अजीब संयोग है कि आगामी 15 अप्रैल से राजधानी दिल्ली में दोबारा से सम-विषम योजना लागू होने जा रही है. इसके लगभग एक हफ्ते पहले यानी छह अप्रैल को राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक (एनएक्यूआई) का एक साल पूरा हुआ है. 

साल भर पहले 2015 में केंद्र सरकार ने देश के कुछ प्रमुख शहरों में वायु गुणवत्ता की निगरानी करने के लिये एनएक्यूआई की शुरुआत की थी. एक साल पहले जब प्रधानमंत्री ने इस सूचकांक को शुरू किया था तब पर्यावरण के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ग्रीनपीस ने इससे जुड़े कुछ और महत्वपूर्ण बिंदुओं को रेखांकित किया था.

प्रधानमंत्री द्वारा शुरू की गई योजना में वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों को सीमित क्षेत्र में लगाने, इसमें पारदर्शिता की कमी और शहरवासियों तक वायु गुणवत्ता के आकड़े को पहुंचाने की व्यवस्था का अभाव शामिल था.

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साल भर पूरा होने पर इस मूल्यांकन में जो तथ्य सामने आए हैं उसके मुताबिक अभी भी वायु प्रदूषण के आंकड़े आम लोगों को आसानी से उपलब्ध नहीं हो रहे. एक साल पहले सूचकांक को 10 शहरों में शुरू किया गया था और साल भर बाद, दो अप्रैल 2016 तक सूचकांक 23 शहरों में वायु गुणवत्ता की निगरानी कर रहा है. हालांकि इसे 46 शहरों और 20 राज्यों की राजधानियों में लगू करने की योजना थी.

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फिलहाल जिन 23 शहरों में वायु गुणवत्ता निगरानी केंद्र चल रहे हैं उनमें सिर्फ 39 निगरानी स्टेशन हैं. देश के शहरों के मौजूदा वायु प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए यह संख्या बहुत कम है.

ग्रीनपीस इंडिया के कैंपेनर सुनील दहिया कहते हैं, “हम लोग पिछले एक साल से राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक की निगरानी कर रहे थे. वास्तिवक समय में विश्वसनीय आंकड़ों को उपलब्ध करवाना सूचकांक का सबसे महत्वपूर्ण काम है. हालांकि इसके लिये जरुरी बुनियादी ढांचे में बहुत सी विसंगतियां हैं. 

Delhi Pollution.

वर्तमान सिस्टम में इन आंकड़ों को प्रसारित करने के लिए न तो कोई विश्वसनीय व्यवस्था है और न ही इन आंकड़ों को लोगों के लिये उपयोगी बनाने की कोई पहल ही की जा रही है. देश में प्रदुषित शहरों की संख्या को देखते हुए 39 निगरानी स्टेशन तुलनात्मक रूप से बहुत कम हैं.”

पड़ोसी देश चीन में वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए 1500 निगरानी स्टेशन बनाये गए हैं. इसके मद्देनजर भारत में भी एक व्यापक असर वाला राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक लागू करने की सख्त जरूरत है. एक ऐसा तंत्र जिसके पास अच्छी बुनियादी सुविधाएं हों और एक स्पष्ट कार्ययोजना हो.

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अगर इस व्यवस्था को ठीक से लागू किया जाये तो वायु गुणवत्ता सूचकांक वायु प्रदूषण के बारे में लोगों को जागरुक करने का बेहतर जरिया बन सकता है. वास्तविक समय के आंकड़ों को स्वास्थ्य संबंधी सलाह के साथ लोगों तक पहुंचाया जाना चाहिए और खराब वायु गुणवत्ता वाले दिनों में लोगों को एहतियाती कदम उठाने की सलाह जारी होनी चाहिए. इससे संबंधित अधिकारियों और संस्थानों की भी जिम्मेवारी तय करने का काफी फायदा होगा.

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दहिया कहते हैं, “यह सही है कि भारत ने वायु प्रदूषण की समस्या को गंभीरता से लिया है और इससे निपटने के लिये सरकार कार-फ्री डे से लेकर और भी कई योजनाओं को शुरू कर रही है. लेकिन अब जरुरी यह है कि सरकार लोगों को वायु प्रदूषण के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध करवाए. इससे लोगों में जानकारी भी बढ़ेगी और लोग बढ़ते वायु प्रदूषण से खुद को बचाने के लिये उन्हें एहतियाती कदम भी उठा सकेंगे.”

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देश में मौजूदा वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए एक व्यवस्थित स्वच्छ वायु एक्शन प्लान की सख्त जरूरत है. जरूरत इस योजना को निश्चित समय-सीमा के भीतर लागू करने की है. 

साथ ही आम लोगों को भी इसके आंकड़े उपलब्ध करवाने होंगे ताकि वे अपने आस-पास की हवा के बारे में खुद जान सकें और जरूरी एहतियाती उपाय अपना सकें.

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वायु गुणवत्ता सूचकांक को प्रभावी बनाने के लिए पूरे देश में बड़ी संख्या में निगरानी स्टेशन का नेटवर्क जल्द से जल्द तैयार करना होगा.

First published: 9 April 2016, 22:55 IST
 
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