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एक साल का हुआ 'स्किल इंडिया', क्या रहा पहले साल का रिजल्ट?

प्रणेता झा | Updated on: 17 July 2016, 7:50 IST

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साल पहले स्किल इंडिया कार्यक्रम का शुभारंभ किया था. इसके तहत साल 2022 तक 40 करोड़ युवाओं को कुशल कामगार बनाने का लक्ष्य है. लेकिन पिछली 15 जुलाई से अब तक इस दिशा में सरकार को कितनी सफलता मिली है? 

आपको बता दें कि पिछली 15 जुलाई को ही संयुक्त राष्ट्र ने पहला 'वर्ल्ड यूथ स्किल्स डे' भी मनाया था.

पिछले एक साल में सरकार ने प्राइवेट सेक्टर के साथ साझेदारी में 1,141 नए इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट (आईटीआई) खोले हैं. इनमें 1.73 लाख लोगों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है. 

इसके अलावा केंद्र सरकार ने विभिन्न कंपनियों को कुशल श्रमिकों को प्रशिक्षु (एप्रेंटिस) रखने के लिए 10 हजार करोड़ रुपये की आर्थिक मदद दी है.

अभी इसी हफ्ते स्किल इंडिया की फ्लैगशिप योजना प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के लिए केंद्र ने 12 हजार करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है. इसके तहत अगले चाल सालों में एक करोड़ लोग लाभान्वित होंगे.

इसके तहत करीब 60 लाख युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा. इनके अलावा 40 लाख दूसरे कामगार जिन्हें औपचारिक प्रशिक्षण नहीं मिला है उन्हें 'रिकग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग' (आरपीएल) का प्रमाणपत्र दिया जाएगा.

लक्ष्य से पीछे

पीएमकेवीवाई पहले साल के अपने लक्ष्य से पीछे रह गई. इसका लक्ष्य 24 लाख लोगों को प्रशिक्षित करना था जिनमें से 14 लाख को पहली बार प्रशिक्षण दिया जाना था. वहीं 10 लाख लोगों को आरपीएल प्रमाणपत्र देने का लक्ष्य था. लेकिन पीएमकेवीवाई में केवल 20 लाख लोगों को प्रशिक्षित किया जा सका. आरपीएल का भी प्रदर्शन काफी कमजोर रहा.

'स्किल इंडिया की सबसे बड़ी उपलब्धि ये है कि इसने लोगों का नजरिया बदला है'

वाधवानी फाउंडेशन केंद्र सरकार के साथ मिलकर कई राज्यों में स्किल इंडिया की परियोजनाओं में काम कर रहा है. संस्था के रिसर्च एंड पॉलिसी एक्जिक्यूटिव वाइस-प्रेसिडेंट राजेश चक्रवर्ती कहते हैं, "स्किल डेवलपमेंट के लिए आधारभूत ढांचा तैयार करने के लिए विभिन्न मंत्रालयों में कई परियोजनाएं चल रही हैं."

चक्रवर्ती कहते हैं, "जरूरत है आईटीआई पर ध्यान देने की. इसका मौजूदा पाठ्यक्रम आज के जमाने के उद्योगों की मांग के अनुरूप नहीं रह गया है. प्रशिक्षण की सुविधा भी काफी सीमित है. अच्छी बात है कि अब नीतिगत ध्यान असल मुद्दों की तरफ है."

चक्रवर्ती मानते हैं कि स्किल इंडिया के तहत 21 सेक्टरों में अपार संभावनाएं हैं. वो कहते हैं, "अभी हमारी अर्थव्यवस्था में सर्विस सेक्टर हावी है, उत्पादन सेक्टर नहीं. मसलन, रिटेल सेक्टर में भारत में सबसे ज्यादा रोजगार तैयार होते है. उसके बाद स्वास्थ्य सेक्टर में. लेकिन उत्पादन बहुत ही महत्वपूर्ण सेक्टर है. ये समय के साथ बड़ा होता जाएगा."

चक्रवर्ती मानते हैं कि स्किल इंडिया की सबसे बड़ी उपलब्धि ये है कि ये लोगों को स्किल डेवलपमेंट के बारे में जागरूक बना रहा है.

रोजगार

चक्रवर्ती कहते हैं, "पहले नौजवानों की स्किल सीखने में दिलचस्पी नहीं थी. वो सालों तक सरकारी नौकरी पाने का इंतजार करते रहते थे या साधारण कॉलेजों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने में लगे रहते थे, जिसका नतीजा बेरोजगारी होता था. लेकिन अब ये सोच बदल रही है."

स्किल इंडिया के आलोचक इस बात के लिए सरकार की आलोचना करते हैं कि सरकार युवाओं को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा दिलाने की व्यवस्था करने की जगह 40 करोड़ नौजवानों को केवल कुशल कामगार बनाना चाहती है. इसका एक दुष्परिणाम ये हो सकता है कि समाज के कमजोर तबके के नौजवान उन सफेदपोश नौकरियों तक पहुंच ही न पाएं जिनके लिए उच्च गुणवत्ता वाली उच्च शिक्षा की जरूरत होती है. लेकिन चक्रवर्ती इस आशंका को बेबुनियाद बताते हैं.

कुछ आलोचक इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि स्किल इंडिया के तहत प्रशिक्षण पाने वाले 40 करोड़ युवाओं को किस तरह की नौकरी मिलेगी?

गार्मेंट एंड एलायड वर्क्स यूनिवयन की अध्यक्ष अनन्या भट्टाचार्य कहती हैं, "स्किल डेवलपमेंट बहुत आवश्यक है. लेकिन हमें प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था के एक मजबूत ढांचे की ज्यादा जरूरत है. युवाओं को अच्छी प्राथमिक शिक्षा दिए बिना ही कुशल कामगार बनाने का मतलब है कि उनका करियर ज्यादा आगे नहीं जाएगा."

भट्टाचार्य मानती हैं कि सर्विस सेक्टर और उत्पादन सेक्टर में इस समय हालात बहुत खराब हैं. श्रम कानूनों को दिन प्रति दिन कमजोर किया जा रहा है. और उनके उल्लंघन होने पर नजर रखने वाली संस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं. ऐसे में स्किल इंडिया के तहत जो कामगार तैयार होंगे वो पूरी तरह बाजार के रहमो-करम पर होंगे.

सवाल

समाजशास्त्री डॉक्टर वर्षा अय्यर भी इसी तरह के सवाल उठाती हैं. अय्यर कहती हैं, "भारत को 'स्किल कैपिटल' बनाने की सनक पालने से पहले हमें कुछ सवाल पूछ लेने चाहिए. किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए स्किल डेवलपमेंट जरूरी है लेकिन फिलहाल हम बिना सोचे-विचारे पूंजीवादी संस्थाओं की सेवा करने में लग गए हैं."

अय्यर पूछती हैं, "इन नौजवानों को किसी तरह की नौकरी मिलेगी? श्रम कानून किस तरह के होंगे? क्या इन कामगारों के लिए कोई सामाजिक सुरक्षा होगी? जब उत्पादन तकनीकें बदल जाएंगी तो इन कामगारों को क्या होगा? जब ऑटोमेशन बढ़ेगा तो उनकी स्किल की ज्यादा जरूरत नहीं रह जाएगी फिर वो क्या करेंगे?"

उनका मानना है कि स्किल डेवलपमेंट से जुड़ा सबसे जरूरी सवाल ये है कि क्या इससे भारत की सामाजिक-आर्थिक विषमता कम होगी?

वो कहती हैं, "भारत जैसे परंपरागत समाज में जहां श्रम और कौशल का जातिगत विभाजन रहा है, हमें ये सवाल पूछना होगा कि क्या हम समाज में पहले से मौजूद असमानता को घटा रहे हैं? या फिर आईटीआई और आईआईटी के बीच की खाई को और चौड़ा कर रहे हैं?"

First published: 17 July 2016, 7:50 IST
 
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