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...तो शायद ओएनजीसी दुनिया का प्रमुख हाइड्रेटेड गैस उत्पादक होगा

नीरज ठाकुर | Updated on: 13 January 2016, 8:16 IST
QUICK PILL
  • ओएनजीसी को केजी बेसिन में हाइड्रेटेड गैस का बड़ा भंडार मिला है. हालांकि तकनीक नहीं होने की वजह से इसका व्यावसायिक तौर पर उत्पादन शुरू नहीं हो पा रहा है.
  • जापान और कनाडा पिछले कई सालों से हाइड्रेटेड गैस को निकालने की तकनीक पर काम करते आ रहे हैं और उनका दावा है कि अगले चार से पांच सालों में इस तकनीक से गैस निकलना शुरू हो जाएगा.

भारत की सबसे बड़ी तेल उत्पादक कंपनी ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) को आंध्र प्रदेश के तटीय इलाके में हाइड्रेट गैस का भंडार मिला है. यह भंडार कृष्णा-गोदावरी बेसिन में स्थित है और इसकी खोज करीब एक दशक पहले हुई थी जब मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज को इस क्षेत्र में प्राकृतिक गैस का भंडार मिला था. 

नए गैस भंडार में करीब 134 ट्रिलियन घन मीटर गैस है जो अमेरिका के गैस भंडार का करीब एक तिहाई है. अमेरिका दुनिया में प्राकृतिक गैस का सबसे बड़ा उत्पादक देश है. ऐसे में इतनी बड़ी मात्रा में गैस का मिलना भारत के भविष्य को बदल सकता है. इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा का समाधान हो सकता है जो फिलहाल अपनी ऊर्जा जरूरतों का करीब 80 फीसदी आयात करता है.

क्या है हाइड्रेटड गैस

आपको यह समझना होगा कि हाइड्रेटेड गैस क्या है? यह ठोस की तरह होता है और इसके मॉल्येकुलर कैविटीज में गैस के मॉलीक्यूल होते हैं. दुनिया में बड़े पैमाने पर गैस हाइड्रेट का भंडार है. हाइड्रोकार्बन के क्षेत्र में काम करने वाले वैज्ञानिक इसे भविष्य का प्राकृतिक गैस का स्रोत बताते हैं. हालांकि सबसे बड़ी समस्या यह है कि इससे गैस निकालने की तकनीक किसी भी मुल्क के पास नहीं है.

जापान और कनाडा पिछले कई सालों से इस तकनीक पर काम करते आ रहे हैं और उनका दावा है कि अगले चार से पांच सालों में इस तकनीक से गैस निकलना शुरू हो जाएगा.

उत्साह की वजह

तो क्या भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा से पांच साल दूर है? क्या भारतीयों को इस खोज से उत्साहित होना चाहिए?

विशेषज्ञों की माने तो इसका जवाब नहीं है. ओएनजीसी के पूर्व चेयरमैन ने कहा, 'दस साल पहले हम कहा करते थे कि हाइड्रेट गैस का जल्द ही व्यावसायिक तौर पर उत्पादन शुरू कर देंगे. हम सब यही कह रहे हैं. लेकिन सच्चाई यह है कि हमें इस बारे में नहीं पता कि यह तकनीक कब अस्तित्व में आएगी.'

पेट्रोलियम एंड नैचुरल गैस रेग्युलेटरी बोर्ड के पूर्व सदस्य बी एस नेगी ने कहा डीजीएच हाइड्रेट रिजर्व के बारे में आधिकारिक तौर पर घोषणा करने की स्थिति में नहीं है. नेगी ने कहा, 'हम एक दशक से अधिक से हाइड्रेटेड गैस के बारे में जान रहे हैं. लेकिन इस बारे में इसलिए कुछ नहीं किया जा सका क्योंकि हमारे पास तकनीक नहीं है. वास्तव में ओएनजीसी को जो भंडार मिला है वह तकनीक नहीं होने की वजह से हमारे किसी काम का नहीं है.'

वहीं दूसरी बड़ी समस्या हाइड्रेटेड गैस की लागत को लेकर है. शर्मा को लगता है कि इस गैस को व्यावसायिक तौर पर निकालने की लागत बहुत ज्यादा होगी.

केजी बेसिन का इतिहास

केजी बेसिन भारत का सबसे बड़ा हाइड्रोकार्बन का भंडार है. 2009 में रिलायंस ने इस गैस ब्लॉक से गैस निकालना शुरू किया और यहां करीब 9-11 ट्रिलियन घन फुट का भंडार होने की उम्मीद थी. लेकिन बाद में कंपनी को इस बात का एहसास हुआ कि यहां गैस उम्मीद से कम है और अब यह महज 2.9 ट्रिलियन घन फुट है जो पूर्व अनुमान के मुकाबले 67 फीसदी कम है.

ओएनजीसी के पास भी इस क्षेत्र में 9 ट्रिलियन घर मीटर गैस का भंडार है. आज की तारीख में इस क्षेत्र से बिलकुल भी गैस का उत्पादन नहीं हो रहा है. कंपनी ने अपने अनुमान को घटाकर 1.7 ट्रिलियन घन फुट कर दिया है.

ओएनजीसी का ट्रैक रिकॉर्ड

व्यावसायिक तौर पर उत्पादन के मामले में ओएनजीसी का ट्रैक रिकॉर्ड बेहद खराब रहा है. वास्तव में चार दशक से कंपनी अपने बॉम्बे हाई के रिजर्व पर टिकी रही है. कंपनी ने हर साल भले ही कई गैस क्षेत्रों की घोषणा की है लेकिन अभी तक कहीं से व्यावसायिक उत्पादन शुरू नहीं हो पाया है.

ओएनजीसी ने केजी बेसिन में 13 गैस क्षेत्रों की खोज की लेकिन अभी तक किसी से उत्पादन शुरू नहीं हो पाया है

1999 में ओएनजीसी को केजी बेसिन में गैस क्षेत्र आवंटित किए गए थे और अभी तक यह 13 गैस क्षेत्रों को खोजने में सफल रही है. हालांकि किसी भी गैस फील्ड से उत्पादन शुरू नहीं हो पाया है. और इसकी वजह टेक्नोलॉजी का अभाव नहीं है क्योंकि इस फील्ड में गैस निकालने के लिए पर्याप्त तकनीक मौजूद है.

वहीं रिलायंस ने तत्काल सभी गैस क्षेत्रों से गैस निकालना शुरू किया. वास्तव में रिलायंस पर यह आरोप लगता रहा है कि वह इस क्षेत्र में ओएनजीसी के गैस क्षेत्र से गैस को चोरी कर रही है. गैस चोरी की वजह से लेकर दोनों कंपनियां कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं.

 

First published: 13 January 2016, 8:16 IST
 
नीरज ठाकुर @neerajthakur2

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बिज़नेसवर्ल्ड, डीएनए और बिज़नेस स्टैंडर्ड में काम कर चुके हैं.

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