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अमीनुल हक़ लश्कर: असम में भाजपा के इकलौते मुस्लिम विधायक

सादिक़ नक़वी | Updated on: 22 May 2016, 7:36 IST
(कैच न्यूज़)
QUICK PILL
बराक घाटी की सोनाई विधानसभा ने बीजेपी के इकलौते मुसलमान विधायक को जिताकर असम विधानसभा में पहुंचाया है.सोनाई एक मुसलमान बहुल क्षेत्र है और स्वदेशी बंगाली मुसलमान उनमें से सबसे बड़े समूह के रूप में फैले हुए हैं.

बराक घाटी की सोनाई विधानसभा ने बीजेपी के इकलौते मुसलमान विधायक को जिताकर असम विधानसभा में पहुंचाया है. अमीनुल हक़ लश्कर राज्य विधानसभा के लिये बीजेपी के चुने गए 60 विधायकों में से एक हैं.

सोनाई एक मुसलमान बहुल क्षेत्र है और स्वदेशी बंगाली मुसलमान उनमें से सबसे बड़े समूह के रूप में फैले हुए हैं.उन्होंने इन चुनावों में कांग्रेस के अनामुल हक को 5549 मतों के अंतर से हराया. लश्कर को 42206 मत मिले जबकि अनामुल 36657 मत पाने में सफल रहे.

स्थानीय लोगों का कहना है कि बीजेपी द्वारा मैदान में उतारे गए मुसलमान उम्मीदवारों में सिर्फ वही जिताऊ थे और यही तथ्य उनके पक्ष में रहा. बीजेपी ने हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों में कुल सात मुसलमान उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था.

एआईयूडीएफ से जुड़े अतीकुर रहमान ने कैच को बताया, ''घाटी में पहले से ही बीजेपी की जीत का माहौल बना हुआ था.'' उनका कहना है कि इसी बात ने लश्कर की मदद की. इसके अलावा स्थानीय लोगों को ऐसा लगा कि उनके कैबिनेट में एक मंत्री के रूप में शामिल होने की पूरी संभावना है और ऐसा करके वे इस क्षेत्र की बेहतरी के लिये अच्छे से काम कर पाएंगे.

रहमान आगे कहते हैं, ''पिछली बार सोनाई की जनता ने उच्च शिक्षित पूर्व नौकरशाह अनामुल को चुना था लेकिन उन्होंने क्षेत्र के लिये कुछ भी नहीं किया.''

बीजेपी की रणनीति

बीजेपी के एक और वरिष्ठ नेता कहते हैं कि यह भी एक सच्चाई है कि बीजेपी के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरने के चलते लश्कर को इस मुसलमान बाहुल्य निर्वाचन क्षेत्र में जीतने में काफी मदद मिली. वे कहते हैं, ''यहां पर ऐसे बांग्लाभाषी प्रवासी हिंदू बहुतायत में हैं जिन्होंने उनका समर्थन सिर्फ इसलिये किया क्योंकि वे बीजेपी के उम्मीदवार थे. इसके अलावा उन्हें एक ही समुदाय का होने के चलते मुसलमानों का भी समर्थन मिला.''

इस बार के चुनाव काफी ध्रुवीकृत थे, बराक घाटी में बीजेपी 15 में में से प्रभावशाली रूप में 8 सीट जीतने में सफल रही जबकि 2011 चुनावों में 11 सीट जीतने वाली कांग्रेस सिमटकर सिर्फ तीन सीटों तक आ गई.

एआईयूडीएफ, जिसे मुख्यतः निचले असम में रहने वाले प्रवासी बांग्लाभाषी मुसलमानों की पार्टी के रूप में जाना जाता है यहां पर सिर्फ 4 सीट जीतने में सफल रही. रहमान का कहना है कि एक ठेकेदार के रूप में काम करने वाले लश्कर को स्थानीय लोगों का भरपूर सहयोग इसलिये मिला क्योंकि वे काफी समय से राजनीति में सक्रिय हैं और सामाजिक और सामुदायिक कार्यो में लगे रहते हैं.

रहमान कहते हैं, ''एक तरफ तो बंगाली बोलने वाले हिंदुओं ने खुलकर उनका समर्थन किया वहीं दूसरी तरफ मुसलमानों ने भी उनके पक्ष में अपना मत दिया.''अपने छात्र जीवन में लश्कर कांग्रेस की छात्र इकाई के साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे. बाद में उन्होंने आॅल असम स्टूडेंट्स यूनियन का हाथ थामा और अंततः बीजेपी में शामिल होने से पहले एजीपी के सदस्य बने. उन्हें प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल का बेहद करीबी माना जाता है.

First published: 22 May 2016, 7:36 IST
 
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