Home » इंडिया » Operation Blue Star 33rd anniversary KS Brar the real hero of operation bluuestar in 1984 in Golden Temple
 

Operation Blue Star का 'सिख हीरो'

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 June 2017, 15:22 IST
ऑपरेशन ब्लू स्टार के नायक रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल कुलदीप सिंह बरार (बीच में)

सिख धर्म के सबसे पवित्र स्थल स्वर्ण मंदिर परिसर में 6 जून 1984 को भारतीय सेना की कार्रवाई को ऑपरेशन ब्लूस्टार नाम दिया गया था. ऑपरेशन ब्लूस्टार को आज से ठीक 33 साल पहले रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल कुलदीप सिंह बरार के नेतृत्व में अंजाम दिया गया था. ऑपरेशन के वक्त बरार सेना में मेजर जनरल थे.

दरअसल स्वर्ण मंदिर के अंदर छिपे खालिस्तान समर्थक आतंकियों को बाहर निकालने के लिए भारतीय सेना अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में दाखिल हुई थी. इस ऑपरेशन में मरने वालों में जरनैल सिंह भिंडरावाले भी शामिल था, जिसकी अगुवाई में सिखों के लिए एक अलग राज्य खालिस्तान की मांग हो रही थी. ऑपरेशन ब्लू स्टार की सबसे खास बात ये थी कि एक सिख मेजर जनरल के नेतृत्व में यह मुकम्मल हुआ था.

केएस बरार ने अपनी आत्मकथा 'ऑपरेशन ब्लू स्टार द ट्रू स्टोरी' में सैन्य कार्रवाई और पंजाब के उस वक्त के हालात का ब्योरा दिया है.

'पंजाब हाथ से निकल जाएगा'

केएस बरार ने अपनी आत्मकथा 'ऑपरेशन ब्लू स्टार द ट्रू स्टोरी' में सैन्य कार्रवाई और पंजाब के उस वक्त के हालात का ब्योरा दिया है. बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में बरार ने बताया था कि उन्हें इस ऑपरेशन की जानकारी तक नहीं थी.

बरार के मुताबिक, "शाम को मेरे पास फ़ोन आया कि अगले दिन यानी एक जून की सुबह मुझे एक मीटिंग के लिए चंडी मंदिर पहुंचना है. उसी दिन शाम को हमें मनीला निकलना था. हमारी टिकटें बुक हो चुकी थीं. हम जहाज पकड़ने के लिए दिल्ली जा रहे थे. मैं मेरठ से दिल्ली बाई रोड गया. वहां से जहाज़ पकड़ कर चंडीगढ़ और सीधे पश्चिम कमान के मुख्यालय पहुंचा."

उस वक्त तक प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ऑपरेशन ब्लू स्टार के बारे में अंतिम फैसला ले लिया था. बरार के मुताबिक, "वहां मुझे ख़बर मिली कि मुझे ऑपरेशन ब्लू स्टार को कमांड करना है और जल्द से जल्द अमृतसर पहुंचना है क्योंकि हालात बहुत ख़राब हो गए हैं."

बरार ने इंटरव्यू के दौरान बीबीसी को बताया, "मुझे बताया गया कि स्वर्ण मंदिर पर भिंडरावाले ने कब्ज़ा कर लिया है और पंजाब में कानून-व्यवस्था नाम की चीज नहीं बची है. मुझसे कहा गया कि इसे जल्द से जल्द ठीक करना है, वरना पंजाब हमारे हाथ से निकल जाएगा. मेरी छुट्टी रद्द हो गई और मैं तुरंत हवाई जहाज़ पर बैठ कर अमृतसर पहुंच गया."

जरनैल सिंह भिंडरावाले अपने समर्थकों के साथ/ सिख आर्काइव्स

चौथी बटालियन के सिख अफ़सर का जज्बा

जनरल बरार के मुताबिक पांच जून की सुबह साढ़े चार बजे वे हर बटालियन के पास गए और उनके जवानों से तकरीबन आधे घंटे तक बात की. बरार ने इस दौरान उनसे कहा कि स्वर्ण मंदिर के अंदर जाते हुए हमें ये नहीं सोचना है कि हम किसी पवित्र जगह पर जा कर उसे बर्बाद करने जा रहे हैं, बल्कि हमें ये सोचना चाहिए कि हम उसकी सफ़ाई करने जा रहे हैं. जितनी कम जान जाए, उतना अच्छा है."

बरार ने इंटरव्यू में कहा, "मैंने उनसे ये भी कहा कि अगर आप में से कोई अंदर नहीं जाना चाहता तो कोई बात नहीं. मैं आपके कमाडिंग अफसर से कहूंगा कि आपको अंदर जाने की ज़रूरत नहीं है और आपके ख़िलाफ़ कोई एक्शन नहीं लिया जाएगा. मैं तीन बटालियंस में गया. कोई नहीं खड़ा हुआ. चौथी बटालियन में एक सिख अफसर खड़ा हो गया."

घटना के बारे में बरार ने इंटरव्यू में बताया, "मैंने कहा कि कोई बात नहीं, अगर आपकी फ़ीलिंग्स इतनी मजबूत है, तो आपको अंदर जाने की ज़रूरत नहीं." इस पर उस अफसर ने कहा, "आप मुझे ग़लत समझ रहे हैं. मैं हूं सेकेंड लेफ़्टिनेंट रैना. मैं अंदर जाना चाहता हूं और सबसे आगे जाना चाहता हूं, जिससे मैं अकाल तख़्त तक सबसे पहले पहुंचकर जरनैल सिंह भिंडरावाले को पकड़ सकूं."

अमृतसर स्थित सिखों का सबसे पवित्र स्थल स्वर्ण मंदिर.

श्वेतपत्र के मुताबिक 576 मौतें

भारत सरकार के श्वेतपत्र के मुताबिक ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान 83 जवान शहीद हुए थे, जबकि 249 घायल हुए. श्वेतपत्र के मुताबिक 493 आतंकवादी या आम नागरिक कार्रवाई में मारे गए, जबकि 86 घायल हुए और 1592 को गिरफ़्तार किया गया. इस तरह सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान कुल 576 मौतें हुईं.

हालांकि इन आंकड़ों को लेकर एक राय नहीं है. सिख संगठनों के साथ ही मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि उस वक्त हज़ारों श्रद्धालु स्वर्ण मंदिर परिसर में मौजूद थे, लिहाजा मरने वाले बेगुनाहों की तादाद इससे कहीं ज्यादा थी.

इंदिरा गांधी के पार्थिव शरीर के पास खड़े राजीव गांधी.

इंदिरा गांधी की हत्या 

ऑपरेशन ब्लू स्टार 6 जून 1984 को पूरा हुआ. इसके तकरीबन पांच महीने बाद 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उन्हीं के सिख अंगरक्षकों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी.

इंदिरा की हत्या के बाद देश भर में सिख विरोधी दंगे भड़क गए थे. सांप्रदायिक हिंसा की आग में बुरी तरह झुलसी देश की राजधानी दिल्ली में कम से कम तीन हज़ार लोग मारे गए थे. नरसंहार में मारे गए लोगों में ज्यादातर सिख थे.

इंदिरा के बाद उनके पुत्र राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री की शपथ ली. ऑपरेशन ब्लू स्टार एक ऐसा नासूर है, जिसके ज़ख़्म अक्सर नज़र आ जाते हैं. 33वीं बरसी पर अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में खालिस्तान के समर्थन में लगे नारे इसी की एक नज़ीर है.

First published: 6 June 2017, 15:08 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी