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कर्नाटक: मंदिर में मुस्लिम अधिकारी का प्रवेश बना घमासान का कारण

रामकृष्ण उपध्या | Updated on: 21 March 2016, 22:23 IST
QUICK PILL
  • कर्नाटक के पुत्तुर जिले में श्री महालिंगेश्वर मंदिर के आमंत्रण पर डिप्टी कमिश्नर एबी इब्राहिम का नाम छपने के बाद विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता इसका विरोध कर रहे हैं.
  • हालांकि पूर्व अधिकारियों और कई नौकरशाहों ने इब्राहिम का बचाव करते हुए कहा कि डिप्टी कमिश्नर होने के नाते मंदिर के आमंत्रण कार्ड पर डिप्टी कमिश्नर का नाम छापे जाने में कोई आपत्ति नहीं है.

कर्नाटक  के दक्षिणी कन्नड़ जिले का पुत्तुर नगर इन दिनों विवादों के केंद्र में है. इसकी वजह एक मंदिर में होने वाले त्योहार को लेकर छपा आमंत्रण पत्र है और इस पर मुस्लिम अधिकारी का नाम छपा हुआ है.

स्थानीय विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने इस पर गहरी आपत्ति जताई है जबकि श्री महालिंगेश्वर मंदिर की रथ यात्रा के निमंत्रण पर जिले के डिप्टी कमिश्नर एबी इब्राहिम का नाम छपा हुआ हैं. 

रथ यात्रा का आयोजन अगले महीने होना है. विरोध करने वालों का कहना है कि यह कर्नाटक हिंदू रिलिजियस इंस्टीट्यूशंस एंड चैरिटेबल एनडाउमेंट एक्ट 1997 के खिलाफ है.

विहिप और बजरंग दल को इस पर गहरी आपत्ति है कि श्री महालिंगेश्वर मंदिर की रथ यात्रा के निमंत्रण पर मुस्लिम अधिकारी का नाम छपा हुआ हैं

हालांकि सरकार और कई पूर्व नौकरशाहों ने इब्राहिम का यह कहते हुए समर्थन किया है कि आमंत्रण पत्र को हमेशा की तरह डिप्टी कमिश्नर के नाम से छापा गया क्योंकि इब्राहिम मुजराई विभाग समेत 28 सरकारी विभागों के प्रमुख है जो राज्य प्रशासित मंदिरों का नियंत्रण रखती है.

उन्होंने कहा कि इससे पहले किसी अधिकारी के धर्म को मामला नहीं बनाया गया और इब्राहिम पिछले दो सालों से डिप्टी कमिश्नर है.

राजनीतिक चुप्पी

मंदिर के एक श्रद्धालु ने इस मामले को लेकर कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस एएस बोपन्ना ने राज्य सरकार से नियमों और अधिसूचना की जानकारी देने को कहा है. 

सबसे दिलचस्प बात यह है कि बीजेपी समेत किसी भी बड़ी पार्टी ने इस मामले में कुछ नहीं बोला है. वहीं इब्राहिम की स्थानीय लोगों में बेहद इज्जत है.

कांग्रेस की पुत्तुर से विधायक शकुंतला शेट्टी ने पहले तो फिर से आमंत्रण पत्र छापे जाने की मांग की थी लेकिन पार्टी की तरफ आलोचना होने के बाद उन्होंने इस बारे में बोलना बंद कर दिया. शेट्टी इससे पहले बीजेपी में रही हैं और उन्होंने 2013 के विधानसभा चुनाव के पहले कांग्रेस ज्वाइन किया था.

वहीं इब्राहिम इससे पहले मेंगलुरू शहरी निगम के कमिश्नर रह चुके हैं. उन्होंने कहा, 'मेरा नाम इसी क्षेत्र के कई अन्य मंदिरों के आमंत्रण पत्र पर छपता है लेकिन कोई समस्या नहीं हुई. बतौर डिप्टी कमिश्नर रहते हुए मैंने पिछले दो सालों में मंदिर के अधिकारियों के साथ 25 से अधिक बैठकें की है.'

क्या है इतिहास

पुत्तुर भी तटीय कर्नाटक के उन इलाकों में आता है जहां समृद्धि बसती है और यहां हिंदू, मुसिलम और ईसाई सभी भाईचारे के साथ रहते हैं. सभी महजब के लोग एक दूसरे के मजहब का आदर करते हैं और उसमें दखल नहीं देते हैं.

एक इतिहासकार बताते हैं, 'कन्नड़ क्षेत्र खौलता हुआ इलाका है. यहां कई नस्ल के  लोग बतौर आक्रमणकारी, हत्यारे, व्यापारी और मिशनरी के तौर पर आए. बाद में वह तुलुवा, कोंकण और ब्राह्मणों के साथ घुल मिल गए और फिर उन्होंने बहुसांस्कृतिक समाज का निर्माण किया. इनकी समृद्धि और वर्चस्व का का यहां के स्थानीय लोग विरोध कर रहे हैं.'

राजनीतिक तौर पर यह कांग्रेस का गढ़ रहा है और कांग्रेसी नेता ऑस्कर फर्नांडीज उडुपी से पार्टी के पांच बार सांसद भी रहे. वहीं जनार्दन पुजारी मेंगलुरू से चार बार सांसद चुने गए. हालांकि 1990 के बाद से बीजेपी की इस इलाके में दखल बढ़ी है.

आरएसएस का यहां मजबूत गढ़ है और जनसंघ का उडुपी नगर निगम पर 1967 से कब्जा है. यह इलाका बेहद समृद्धि  के लिए जाना जाता है और यह समृद्धि सभी समुदाय के लोगों के हिस्से में आई है.

ईसाईयों ने अपने को बनाए रखने के लिए इस इलाके में हिंदुओं के साथ मेल-जोल बढ़ाया लेकिन शिक्षा और खाड़ी में नौकरी की वजह से मुस्लिमों की मजबूत होती स्थिति को ईसाईयों और हिंदुओं ने सही तरीके से नहीं लिया है.

आक्रामक हिंदुत्व समर्थक लव जिहाद को लेकर लोगों की भावनाएं भड़का रहे हैं. फेसबुक पर एक मुस्लिम लड़के का पांच हिंदू लड़कियों के साथ की तस्वीरें सामने आने के बाद लड़कियों को कॉलेज से निलंबित कर दिया गया.

पड़ोस पर असर

पूरे घटनाक्रम को समाज को धुव्रीकरण की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है जिसका असर पड़ोसी राज्य केरल में दिखेगा जहां अगले महीने विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं. पुत्तुर केरल के सीमा से सटा है और मांजेश्वर और कसारागोडा में कनाडिगा आबादी की संख्या बहुत ज्यादा है. 

बीजेपी अभी तक केरल में एक भी सीट जीतने में सफल नहीं रही है. ऐसे में बीजेपी की कोशिश किसी भी तरह वहां सीट निकालने पर होगी.

First published: 21 March 2016, 22:23 IST
 
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