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असफल हुई नोटबंदी? अब तक 164 करोड़ से ज्यादा नए नोटो में काला धन जब्त

साहिल भल्ला | Updated on: 14 December 2016, 7:59 IST
QUICK PILL
  • ज़ब्त की गई करेंसी अगर नियमानुसार निकाली जाती तो 68,571 लोग चेक से इस रकम को निकाल सकते थे. 
  • यह रकम इतनी थी कि 1,371 एटीएम दोबारा भरे जा सकते थे.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विमुद्रीकरण योजना को एक माह से ज्यादा का समय हो गया है. कालेधन पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लागू की गई इस योजना की घोषणा के बाद से अब तक 164.57 करोड़ रुपए के नए नोट जब्त किए गए हैं. ऐसे समय जब आदमी बैंकों और एटीएम से अपना ही धन निकालने पर लगी रोक से त्राहि-त्राहि कर रहा है तो यह जानना दिलचस्प हो सकता है कि इतने बड़े आंकड़े का मतलब क्या है?

आंकड़े

1- वर्तमान में लगे प्रतिबंध के चलते चेक से यह राशि निकालने के लिए 68,571 लोगों की जरूरत पड़ेगी.

2- 1,371 एटीएम अपनी पूरी क्षमता से भरने होंगे.

3- एटीएम के जरिए इस राशि को निकालने के लिए 6,52, 282 लोगों की जरूरत पड़ेगी.

4- मान लीजिए, एक एटीएम से लेनदेन में एक मिनट लगता है और रकम निकालने के लिए एटीएम 24 घंटे और लगातार सात दिनों तक काम करते हैं तो 2,000 के नोटों की संख्या में यह राशि निकालने में 443 दिन लग जाएंगे.

5- अगर आप केवल 2,000 रुपए के नोटों की लाइन लगाते हैं तो इसके लिए 136 किमी की जगह चाहिए यानी दिल्ली से आगरा तक की दूरा से भी ज्यादा.

लाइव अपडेटिंग डाटा

टिप्पणीकार और बीजू जनता दल के सांसद तथागत सत्पथी के कार्यालय के प्रमुख मेघनाद एस ने ऐसे लोगों की सूची तैयार करना शुरू कर दिया है जो कालेधन को नई करेंसी के रूप में बचाकर रख रहे हैं.

मेघनाद का यह विचार 'लाइव-अपडेटिंग डाटा' है जिसमें लोगों के नाम (केवल मीडिया में छपे नाम), नई करेंसी और उसके ठौर-ठिकाने की जानकारी है. नोटबंदी के एक महीने से ज्यादा समय के बाद, 12 दिसम्बर 2016 तक 66 जगहों पर मारे गए छापों में 1,64,57,04,000 रुपए की नई करेंसी बरामद हुई है.

ये छापे कहां मारे गए

लगभग आधे छापे  (66 में से 32) दक्षिण भारत में मारे गए. 15 कर्नाटक में, सात-सात तमिलनाडु और तेलांगना में, दो आंध्र प्रदेश में और एक केरल में.

भारत की सर्वाधिक जनसंख्या वाले राज्य उप्र में एक भी छापा नहीं पड़ा. अपवाद समाजवादी पार्टी के नेता संतोष यादव हैं जिनके कार्यालय पर छापा पड़ा. अभी तक यह खुलासा नहीं हुआ है कि संतोष के कार्यालय से कितनी राशि बरामद हुई, कितनी जब्त हुई. बिहार में भी किसी छापे की ख़बर नहीं है.

सिर्फ दो दिन पहले ही, कर्नाटक के चित्रदुर्गा और हुब्बाली (हुबली) जिलों में मार गए छापों में 28 किलो सोने की ईंट, लगभग चार किलो सोना और सोने के आभूषण, 5.7 करोड़ रुपए के 2,000 रुपए के नोट और 90 लाख रुपए (100 रुपए और 20 रुपए के नोट में) जब्त किए गए.

चेन्नई में शुक्रवार को विभिन्न स्थलों पर मारे गए छापों में 142 करोड़ से ज्यादा की बिना लेखे-जोखे वाली सम्पत्ति बरामद की गई. इनमें 70 करोड़ रुपए के नए नोट थे. नए करेंसी नोटों की यह अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी है. राज्य सरकार के एक इंजीनियर और एक ठेकेदार के पास से 4.7 करोड़ की नई करेंसी बरामद हुई.

इसके अलावा भी, मोदी की पार्टी भाजपा से जुड़े कर्नाटक के एक पूर्व मंत्री जर्नादन रेड्डी के बेल्लारी स्थित माइनिंग कम्पनी पर आयकर विभाग ने छापा मारा था. इनकम टैक्सा का यह छापा जर्नादन रेड्डी की बेटी की शादी के बाद पड़ा था. यह शादी इतनी महंगी हुई थी कि संसद में भी इसकी गूंज थी.

कौन डाल रहा ये छापे?

असामान्य रूप से, 45 छापे राज्य पुलिस ने मारे और बमुश्किल 10 छापे आयकर विभाग ने. अगर आप यह मानकर चल रहे हैं कि राज्य पुलिस को छापा मारने का कोई अधिकार नहीं है तो आप गलत होंगे. उन्हें पूरे भारत में छापा मारने और जब्त करने का अधिकार है.

अपने मोर्चे पर तो आयकर विभाग स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है. 27 नवम्बर की एक खबर के मुताबिक आयकर विभाग में 21,000 अधिकारियों के पद खाली हैं. इनकम टैक्स इम्पलाइज फेडरेशन के अध्यक्ष अशोक कनौजिया कहते हैं कि कुल स्वीकृत पद 76,000 हैं. इसमें से केवल 55,000 अधिकारी ही पदस्थ हैं.

इसका मतलब यही निकल रहा है कि आयकर विभाग पहले से ही अपने लम्बित काम के बोझ तले दबा हुआ है. स्टाफ की कमी को देखते हुए आयकर विभाग नोटबंदी के बाद से अतिरिक्त स्टाफ की मांग कर रहा है.

एक खबर के मुताबिक आयकर विभाग नोटबंदी के बाद जमा की गई राशि के कथित कालाधन होने मामले में 01 जनवरी 2017 से प्रवर्तन विभाग के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर 'आकलन अभियान' की शुरुआत करने जा रहा है. भारत में 40 करोड़ बैंक खाते हैं. यह भारी-भरकम काम है. इन 40 करोड़ में से आधे तो जन-धन खाते हैं.

आंखें खोलने वाला आंकड़ा

मेघनाद ने यह जो डाटा जुटाए हैं. वह पूरी तरह से मीडिया की रिपोर्ट्स पर आधारित हैं. इन आंकड़ों में थोड़ा-बहुत ही अंतर या गलती हो सकती है. पर किसको मालुम है कि यह राशि कितनी है और कितने जीरो तक पहुंचती है? ये आंकड़े वाकई में आंखे खोल देने वाले हैं कि नोटबंदी के बाद कालेधन के लिए क्या किया जा रहा है? इससे यही लगता है कि सरकार कालेधन के खिलाफ अपनी लड़ाई को अंजाम तक नहीं पहुंचा पा रही है.

First published: 14 December 2016, 7:59 IST
 
साहिल भल्ला @IMSahilBhalla

Sahil is a correspondent at Catch. A gadget freak, he loves offering free tech support to family and friends. He studied at Sarah Lawrence College, New York and worked previously for Scroll. He selectively boycotts fast food chains, worries about Arsenal, and travels whenever and wherever he can. Sahil is an unapologetic foodie and a film aficionado.

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