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मुश्किलों के भंवर में कार्ती चिदंबरम

सादिक़ नक़वी | Updated on: 28 April 2016, 23:41 IST
QUICK PILL
  • पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही संस्था ईडी के अधिकारी 18 अप्रैल को सिकोइया कैपिटल इंडिया एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड के दफ्तर पहुंचे हैं.
  • सिकोइया और वेस्ट ब्रिज ने भारत में करीब 4 अरब डॉलर की राशि लगा रखी है. इसमें गूगल और एप्पल जैसी कंपनी भी शामिल है.
  • ईडी एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग लिमिटेड और वासन हेल्थकेयर के कथित 22 करोड़ रुपये की हेरा फेरी की जांच कर रही है. दोनों कंपनियों के कार्ति के साथ जुड़े होने का शक है.

पी चिदंबरम के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं. चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम के कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही संस्था ईडी के अधिकारी 18 अप्रैल को सिकोइया कैपिटल इंडिया एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड के दफ्तर तक जा पहुंचे हैं. 

अधिकारियों ने कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर वीटी भारद्वाज के घर की भी तलाशी ली है. ईडी के अधिकारियों ने वेस्टब्रिज कैपिटल इंडिया के कार्यालय की भी तलाशी ली है जो एक पीई कंपनी है और इसकी पूंजी 1.5 अरब डॉलर है. 

अधिकारी कंपनी के को-फाउंडर्स और मैनेजिंग डायरेक्टर केपी बलराज और पूर्व वित्त मंत्री के बेटे के बीच के संबंध तलाश रहे हैं. गुरुवार को उनसे दिल्ली में पूछताछ की गई.

ईडी के सूत्रों ने बताया कि बलराज वन स्टेप फाउंडेशन में ट्रस्टी हैं. फाउंडेशन में उनके अलावा कार्ति और सीबीएन रेड्डी भी शामिल हैं. सूत्र ने कहा, वह उनके परिवार के बेहद करीब है. उनकी तरक्की वासन की तरह है.

ईडी केपी बलराज और पूर्व वित्त मंत्री के बेटे के बीच के संबंध तलाश रही है. गुरुवार को बलराज से दिल्ली में पूछताछ की गई

सिकोइया और वेस्ट ब्रिज ने भारत में करीब 4 अरब डॉलर की राशि लगा रखी है. इसमें गूगल और एपल जैसी कंपनी भी शामिल है.

सूत्र ने कहा, बलराज और एसके जैन से फेमा के तहत पूछताछ की जा रही है. जैन वेस्टब्रिज के दूसरे मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. 

ईडी एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग लिमिटेड और वासन हेल्थकेयर के कथित 22 करोड़ रुपये की हेरा फेरी की जांच कर रही है. दोनों कंपनियों के कार्ति के साथ जुड़े होने का शक है. बलराज और भारद्वाज सिकोइया के मैनेजिंग डायरेक्टर थे. इसी दौरान कंपनी ने एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग से अक्टूबर 2010 में वासन हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड के 30,000 शेयर खरीदे थे. 

इसी वक्त वासन हेल्थ के 1,19,333 शेयर खरीदे गए और यह खरीद सिकोइया की सलाह पर सिकोइया मॉरीशस और वेस्ट ब्रिज मॉरीशस ने की. कंपनी ने यह शेयर वासन के प्रोमोटर डॉ. अरुण से बढ़ी हुई कीमत यानी 7,500 रुपये प्रति शेयर की दर पर खरीदारी की.  

अधिकारी ने कहा, 'जांच के दौरान यह पाया गया कि सीए कंपनी सुरेश एंड कंपनी ने वासन हेल्थ के एक शेयर की कीमत महज 110 रुपये लगाई थी.' उन्होंने बताया, '1,64,26,630 रुपये के शेयर बहुत अधिक कीमत यानी 112 करोड़ रुपये के भाव पर खरीदे गए.' लाते इनवेस्टमेंट ने 2012 में वासन इक्विटी के प्रति शेयरों के लिए 710 रुपये का भुगतान किया.

फरवरी 2009 से नवंबर 2010 के बीच सिकोइया और वेस्टब्रिज ने वासन में 212 करोड़ रुपये का निवेश किया

फरवरी 2009 से नवंबर 2010 के बीच सिकोइया और वेस्टब्रिज ने वासन में 212 करोड़ रुपये का निवेश किया. जांच अधिकारियों को यह बात समझ में नहीं आ रही है कि जब कंपनी बेहद कम आय वाली थी तो फिर उसमें इतना भारी निवेश क्यों किया गया. 

अधिकारी ने बताया कि पूछताछ के दौरान भारद्वाज यह बता नहीं पा रहे हैं कि फंड का स्रोत क्या था. उन्होंने कहा, 'निवेश का पूरा मामला बेहद संदिग्ध है.'

वहीं वासन एंड फर्स्टसोर्स सॉल्यूशंस लिमिटेड, कैफे कॉफी डे ग्लोबल समेत करीब 16 कंपनियों में शेयरहोल्डर और डायरेक्टर होने के बावजूद बलराज के पास महज 50 लाख अमेरिकी डॉलर थे, जब उन्होंने 2010 में भारत का रुख किया था.

शुरुआती जांच से जुड़े एक सूत्र ने बताया, 'इसमें सिटी बैंक में खाता, केपीबी कैपिटल में शेयर और गोल्डमैन सैक्स में छोटी हिस्सेदारी शामिल है.'

सूत्रों ने बताया कि बलराज ने 2008 में सायमन आइलैंड के केपीबी कैपिटल को बंद कर दिय था और उसकी पूरी संपत्ति मॉरीशस के केपीबी इनवेस्टमेंट में स्थानांतरित कर दी थी. इस कंपनी में उनकी 86 फीसदी हिस्सेदारी है. बाकी की हिस्सेदारी उनके भाई के पी बालचंद्रन के पास है जो ब्रिटेन के नागरिक है.

अधिकारी ने कहा, 'क्या कोई इमानदार निवेशक सायमन आइलैंड से अपने निवेश की शुरुआत कर सकता है? सायमन आइलैंड घोषित तौर पर कर बचाने का अड्डा है.'

बलराज की कंपनी ने 2000 से 2015 के बीच पांच किस्तों में 1.78 अरब डॉलर की रकम जुटाई

सूत्र बताते हैं, 'बलराज की कंपनी ने 2000 से 2015 के बीच पांच किस्तों में 1.78 अरब डॉलर की रकम जुटाई.' सूत्र का कहना है कि केपीबी कैपिटल और केपीबी इनवेस्टमेंट का गठन ही विदेशी निवेशकों से फंड जुटाने के लिए किया गया था जो बलराज को फंड देते रहे हैं.

सूत्र ने बताया, 'हम वेस्टब्रिज वेंचर्स 1 एलएलसी, मॉरीशस, वेस्टब्रिज वेंचर्स 2 एलएलसी मॉरीशस, वेस्टब्रिज क्रॉसओवर फंड एलएलसी मॉरीशस में आए फंड की जांच कर रहे हैं जो बलराज से जुड़ी कंपनियां हैं.'

तीनों विदेशी कं पनियों की भारत में 9 सहायक कंपनियां हैं. 2005 से 2013 के बीच यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान बलराज को 2005 में 20 करोड़ डॉलर, 2011 में 50 करोड़ डॉलर और 2013 में 32.5 करोड़ डॉलर की रकम मिली. 

एडवांटेज ने जो शेयर सिकोइया को बेचा था उसकी कीमत 7,500 रुपये प्रति शेयर थी

अधिकारी ने बताया, 'इस फंड को लेकर गहरा संदेह है.' वासन के प्रोमोटर डॉ. अरुण के ससुर द्वारकानाथ ने वासन में करीब 3 लाख शेयर खरीदे थे. उन्होंने 2008 में प्रति शेयर 200 रुपये की कीमत पर शेयरों की खरीदारी की थी. अगले दिन द्वारकानाथ ने एडवांटेज को 1.5 लाख शेयर आधी कीमत पर बेच दिए. एडवांटेज ने इसके बदले में मार्च 2010 तक कोई भुगतान  नहीं किया. मार्च 2010 में कंपनी ने महज 50 लाख रुपये का भुगतान किया. बाकी की रकम का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है.

इस बीच एडवांटेज ने जो शेयर सिकोइया को बेचा था उसकी कीमत 7,500 रुपये प्रति शेयर थी. सिकोइया और वेस्ट ब्रिज ने वासन में 212 करोड़ रुपये निवेश किया और यहीं से कार्ति की एंट्री होती है. 

एडवांटेज कंसल्टिंग का दो तिहाई हिस्साएक दूसरी कंपनी ऑसब्रिज ने खरीदी. यह सौदा सिकोइया के साथ हुए सौदे के पांच महीने बाद हुआ. एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग एयरसेल मैक्सिस मामले में जांच के घेरे में है. 

2011 तक ऑसब्रिज में कार्ति के पास 95 फीसद शेयर थे जिसे बाद में उनके कथित सहयोगी मोहनन राजेश को ट्रांसफर कर दिया गया. हालिया रिपोर्ट के मुताबिक एडवांटेज का मालिकाना हक फिलहाल ऑसब्रिज के पास है. ऑसब्रिज के पास कंपनी की 40 फीसदी हिस्सेदारी है. इसके अलावा कंपनी में सीबीएन रेड्डी और दो अन्य लोगों की हिस्सेदारी है. सबन रेड्डी कार्ति के दूसरे सहयोगी हैं. 

हाल के जांच में इस बात का भी खुलासा हुआ कि एडवांटेज के पास 22 देशोें में अकूत संपत्ति है. यह सब कुछ इसकी सिंगापुर की सहायक कंपनी के नाम पर है. जांच अधिकारियों को वसीयत भी मिल चुका है जिसे कार्ति ने अपने पास रखा था.

एस गुरुमूर्ति की रिपोर्ट के मुताबिक कार्ति के सभी सहयोगियों ने अपनी पूरी संपत्ति कार्ति की बेटी की कंपनी में डाल रखा है. अदिति चिदंबरम की कंपनी में कार्ति ही मुख्य कर्ताधर्ता है.

First published: 28 April 2016, 23:41 IST
 
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