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चिदंबरम बोले- कश्मीर में अगर हिंदू होते बहुसंख्यक तो नहीं हटाया जाता आर्टिकल 370

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 August 2019, 13:45 IST

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद विपक्षी पार्टियां केंद्र सरकार पर निशाना साध रही है. इसी बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम ने केंद्र की मोदी सरकार को आड़े हाथों लिया है. चेन्नई में रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान पी चिदंबरम ने कहा कि मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला इसलिए लिया, क्योंकि वहां मुसलमान बहुसंख्यक हैं. उन्होंने कहा कि अगर वहां हिंदू बहुसंख्यक होते तो सरकार ये फैसला नहीं लेती.

पी चिदंबरम ने कहा कि, ‘‘जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा है. बीजेपी को छोड़कर इसमें किसी को कोई शक नहीं है. जो लोग 72 साल का इतिहास नहीं जानते, उन्होंने सिर्फ ताकत दिखाने के लिए अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया. संविधान के अनुच्छेद 371 के कई खंडों के तहत भी कई राज्यों को विशेष दर्जा दिया गया है.’’

उन्होंने कहा कि, "अनुच्छेद 370 का विरोध कर रहे हजारों प्रदर्शनकारियों को दबाया गया. उन पर गोलियां चलाईं गईं, आंसू गैस के गोले छोड़े गए. यह सब सच है. मैं इस बात को लेकर भी दुखी हूं कि देश की 7 पार्टियों ने अनुच्छेद 370 हटाने का समर्थन किया. तृणमूल कांग्रेस ने सदन में इस मुद्दे पर वॉकआउट तो किया लेकिन उन्होंने अंतर नहीं दिखाया.

चिदंबरम ने कहा कि, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद देश को संबोधित किया. उन्होंने चुनकर कुछ ऐसे कानूनों के बारे में बताया जो अब जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होंगे. मैं ऐसे 90 कानूनों को बता सकता हूं जो वहां अब भी लागू हैं.’’

पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम ने कहा कि, ‘‘देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू और पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के बीच कभी किसी तरह के मतभेद नहीं रहे.” उन्होंने कहा कि पटेल का आरएसएस से कोई संबंध नहीं था. चिदंबरम ने कहा कि बीजेपी के पास कोई नेता नहीं है इसलिए वह हमारे नेताओं को चुरा रहे हैं.

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First published: 12 August 2019, 13:11 IST
 
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