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'सरकार रोज बदलती रही गोल, फिर भी नोटबंदी हुई फेल'

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 August 2018, 10:25 IST
(File Photo)

8 नवबंर 2016 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में नोटबंदी लागू की. इस दौरान 500 और 1000 के नोट चलन से बाहर हो गए. इस दौरान बताया गया कि नोटबंदी से देश को तमाम फायदे होंगे. नोटबंदी से कालाधन सामने आएगा. जाली करेंसी और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर लगाम लगेगी.

लेकिन इस बीच आरबीआई ने जो रिपोर्ट जारी की है. उसके मुताबिक 1000 और 500 के पुराने नोट करीब 99 फीसदी वापस बैंकों मे जमा हो गए हैं. ऐसे में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने एक बार फिर दोहराया है कि पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा की गई नोटबंदी पूरी तरह से फेल साबित हुई है.

आजतक से की गई बातचीत में पी चिदंबरम ने एनडीए सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि नोटबंदी के मामले में केंद्र सरकार अपना लक्ष्य हर दिन बदलती रही है. पी चिदंबरम ने कहा, "एक नीतिगत साधन के रूप में नोटबंदी विफल रही है." इस दौरान 100 से ज्यादा लोगों की मौत भी हो गई है.

बता दें कि पीएम मोदी ने कहा था कि नोटबंदी से डिजिटाइजेशन को बढ़ावा मिलेगा. इस सवाल के जवाब में पी चिदंबरम ने कहा, "क्या ऐसी नीति को लागू करना नैतिक कहा जाएगा जिसमें 100 से ज्यादा लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी." हालांकि, चिदंबरम ने यह भी स्वीकार किया कि नोटबंदी के बाद के डिजिटल लेनदेन में काफी बढ़त हुई थी.

पूर्व वित्तमंत्री चिदंबरम ने आगे कहा, "नोटबंदी की वजह से हजारों लघु उद्योग ईकाइयां बंद हो गईं, लाखों नौकरियां खत्म हो गईं, सिर्फ तमिलनाडु में पांच लाख लोग बेरोजगार हो गए. लाखों लोगों को इतना ज्यादा दर्द देकर क्या डिजिटाइजेशन को बढ़ावा देना उचित है?"

क्या नोटबंदी से कालेधन पर अंकुश और आतंकियों को वित्तपोषण, नकली नोटों पर अंकुश लगाने में मदद मिली? इस सवाल का जवाब भी चिंदबरम ने दिया और कहा, "क्या नोटबंदी के बाद पैसे नहीं पकड़े गए. सच तो यह है कि नोटबंदी के सात महीने के बाद ही गुजरात के कांडला पोर्ट में घूसखोरी का पहला मामला सामने आया जिसमें बड़े पैमाने पर 2000 रुपये के नोट जब्त किए गए."

First published: 30 August 2018, 10:25 IST
 
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