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पीके सिन्हा : PM मोदी ने सौंपी गिरती अर्थव्यवस्था को संभालने की जिम्मेदारी

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 August 2019, 13:02 IST

ताजा जीडीपी के आंकड़ों में आयी गिरावट के बाद मोदी सरकार को कुछ कड़े कदम उठाने की जरूरत है. ऐसे में PMO में किये कुछ बदलाव अहम रोल अदा कर सकते हैं. पीएमओ से नृपेंद्र मिश्रा के प्रधान सचिव पद से हटने के बाद प्रदीप कुमार सिन्हा को उनकी जगह नियुक्त किया गया है. सिन्हा की नियुक्ति ऐसे समय में की जा रही है, जब अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है. पीके सिन्हा को एक मृदुभाषी व्यक्ति के रूप में जाना जाता है.

बिज़नेस स्टैंडर्ड के अनुसार पूर्व कैबिनेट सचिव अनिल राजदान का कहना है कि यह एक उचित निर्णय है, क्योंकि वह (सिन्हा) निरंतरता ला सकते हैं." भारतीय प्रशासनिक सेवा में अपने 42 वर्षों में से सिन्हा ने लगभग 20 साल ऊर्जा और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में बिताया है. वह पेट्रोलियम मंत्रालय से शिपिंग मंत्रालय और बाद में बिजली मंत्रालय का प्रमुख बने. 2015 में उन्होंने अजीत सेठ से कैबिनेट सचिव का पदभार संभाला.

 

1977 बैच के एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी सिन्हा ने 22 साल की उम्र में सिविल सेवा परीक्षा पास की. दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफन कॉलेज से अर्थशास्त्र स्नातक और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से स्नातकोत्तर करने वाले सिन्हा पर अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की अहम जिम्मेदारी है. अगले पांच वर्षों में बुनियादी ढांचा क्षेत्र में 100 ट्रिलियन रुपये के निवेश की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना की वह देखरेख कर सकते हैं. 

 यह बदलाव ऐसे समय में आया है, जब भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने घाटी में तनाव फैलाने के साथ जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म कर दिया है. इससे पहले राजीव गौबा, 1982 के झारखंड बैच के एक भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी को भारत के कैबिनेट सचिव के रूप में पदभार दिया गया हूं.

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First published: 31 August 2019, 12:38 IST
 
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