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पाकिस्तानी कैदी 16 साल से बनारस की जेल में था बंद, छूटा तो साथ में ले गया 'गीता'

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 November 2018, 12:11 IST

हिंदू धर्म में भगवद् गीता को सबसे पवित्र पुस्तक माना जाता है. गीता में बताए गए भगवान कृष्ण के उपदेश आज के समय में भी प्रासंगिक हैं. शायद यही वजह रही कि पाकिस्तान का एक मुस्लिम कैदी जब जेल से रिहा किया गया तो पवित्र भगवद् गीता को अपने साथ घर ले गया.

दरअसल, वाराणसी में बनारस सेंट्रल जेल से रविवार को एक पाकिस्तानी कैदी को रिहा किया गया. ये कैदी 16 साल से बनारस की सेंट्रल जेल में बंद था. जलालुद्दीन नाम के इस कैदी की जिंदगी में भगवद् गीता ने ऐसी छाप छोड़ी कि जब वो जेल से रिहा हुआ तो गीता को अपने साथ ले गया.

बता दें कि जलालुद्दीन को वाराणसी के छावनी क्षेत्र से संदिग्ध दस्तावेजों के साथ गिरफ्तार किया गया था. 16 साल की लंबी कैद के बाद जलालुद्दीन अपने देश पाकिस्तान पहुंचे. वाराणसी की सेंट्रल जेल के अधीक्षक अंबरीश गौड़ ने मीडिया को बताया कि, साल 2001 में जलालुद्दीन को छावनी क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था. वो पाकिस्तान के सिंध प्रांत से था. जलालुद्दीन को संदिग्ध दस्तावेजों के साथ वायु सेना कार्यालय के पास से गिरफ्तार किया गया था.

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जलालुद्दीन के पास से उस वक्त और भी कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ छावनी क्षेत्र का नक्शा भी बरामद हुआ था. जासूसी के आरोप में जलालुद्दीन को 16 साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी. जेल अधीक्षक गौड़ ने बताया कि वह ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट और विदेशी एक्ट के तहत जेल में बंद था. जब उसे रिहा किया गया तो उसके हाथ में भगवद् गीता थी.

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उन्होंने बताया कि जब उसे गिरफ्तार किया गया तब उसने सिर्फ हाईस्कूल तक ही शिक्षा पाई थी, लेकिन जेल में रहकर उसने बारहवीं की परीक्षा पास की. उसके बाद जेल में रहकर ही उसने ग्रेजुएशन की परीक्षा भी पास कर ली. उसके बाद उसने इंदिरा गांधी नेशनल यूनिवर्सिटी से एमए की परीक्षा भी पास की.

यही नहीं वो जेल से इलैक्ट्रिशियन का कोर्स भी कर रहा था. वो तीन साल तक जेल क्रिकेट लीग में अंपायर भी रहा. जेल अधीक्षक ने बताया कि एक विशेष टीम जलालुद्दीन को लेकर अमृतसर पहुंची. जहां उसे वाघा-अटारी बॉर्डर पर संबंधित अधिकारियों को सौंप दिया गया. जहां से उसे पाकिस्तान भेज दिया गया.

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First published: 5 November 2018, 12:11 IST
 
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