Home » इंडिया » Pakistan make bhagat singh case all files public after 87 years of case
 

87 साल बाद पाकिस्तान ने सार्वजनिक किए भगत सिंह के दस्तावेज, सामने आईं अनोखी बातें

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 March 2018, 14:27 IST

पाकिस्तान की सरकार ने 87 साल बाद भगत सिंह के केस से जुडी सभी फाइलों को सार्वजनिक कर दिया है. इस केस से जुड़ी कुछ फाइलें हफ्ते की शुरआत में ही सार्वजनिक कर दी गई थीं. पंजाब सरकार ने भगत सिंह की फांसी के 87 साल गुजर जाने के बाद यह फैसला लिया था.

भगत सिंह और उनके साथी सुखदेव व राजगुरु को ब्रिटिश पुलिस अधिकारी सांडर्स की हत्या में 23, मार्च, 1931 को लाहौर में फांसी दी गई थी. सार्वजनिक किए गए नए रिकार्ड में केस से जुड़ी खबरों की क्लिपिंग, सांडर्स की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सुखदेव व राजगुरु को फांसी देने का वारंट समेत ब्रिटिश पुलिस द्वारा सिंह और उनके साथियों के अड्डे पर छाप मारने में बरामद हुए पिस्टल व बुलेट की तस्वीरें समेत कई अन्य दस्तावेज शामिल हैं.

भगत सिंह द्वारा 27 अगस्त, 1930 को कोर्ट के फैसले की कॉपी मांगने के साथ सिंह की सजा के खिलाफ उनके पिता सरदार किशन सिंह की कोर्ट में दाखिल की गई याचिका को पहले ही सार्वजनिक कर दिया गया था.

मृत्यु प्रमाण पात्र को भी किया गया सार्वजनिक

23 मार्च, 1931 को जेल निरीक्षक द्वारा बनाए गए मुत्यु प्रमाण पत्र को भी सार्वजनिक किया गया है. साथ ही जेल में किताबों और अखबार मुहैया कराने की मांग के लिए भगत सिंह के पत्र को भी आम नागरिकों के सामने प्रत्यक्ष किया गया है. कई दस्तावेज भगत सिंह के साथियों के ठिकानों पर ब्रिटिश पुलिस की छापेमारी से भी संबंधित हैं.

पत्रों में अपना नाम की जगह 'आदि आदि..' लिखते थे भगत सिंह

भगत सिंह के सार्वजनिक किये गए खतों के बारे में एक अनोखी बात है कि भगत सिंह अपने किसी भी पत्र में आपका आभारी लिखने की जगह आपका आदि, आदि लिखा करते थे. पंजाब के अभिलेख विभाग का कहना है कि अभी भगत सिंह के केस से जुड़ी कुछ फाइलों को ही सार्वजनिक किया जा रहा है.

ये भी पढ़ें- शहीद दिवस 2018: जब भगत सिंह की निशानियों के लिए निकालना पड़ा ड्रॉ

पंजाब अभिलेखागार विभाग के निदेशक अब्बास चौधरी ने बताया कि हमने भगत सिंह और उनके सहयोगियों के केस से जुड़े सभी रिकार्ड प्रदर्शनी में प्रदर्शित कर दिए हैं. उन्होंने कहा कि लोगों की शानदार प्रतिक्रिया को देखते हुए हमने प्रदर्शन की तारीख को आगामी रविवार तक बढ़ाने का फैसला किया है. इससे पहले, हमने इसे एक दिन के लिए खोलने का फैसला किया था.

भगत सिंह को 23 मार्च, 1931 को फांसी दी गई थी. अभिलेखागार विभाग ने भगत सिंह के उस आग्रह का भी प्रदर्शन किया जो इस महान क्रांतिकारी ने 27 अगस्त, 1930 के आदेश की प्रति मांगी थी. ‘ हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी’ के पोस्टर, भगत सिंह को समर्पित किताबें और कविताओं, लाहौर में उस वक्त बम फैक्टरी के मिलने, रिवाल्वर बरामदगी से जुड़ी रिपोर्ट की प्रतियां तथा दूसरे दस्तावेजों को प्रदर्शित किया गया.

 

 

 

First published: 30 March 2018, 14:27 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी