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टेरर फंडिंग के लिए नई चाल चल रहा पाकिस्तान, राजनयिकों के जरिए भेज रहा नकली नोट- रिपोर्ट

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 October 2019, 14:33 IST

पाकिस्तान भारत में अपने आतंकी मंसूबों को पूरा करने के लिए अब नया तरीका अपना रहा है. जिसके लिए वह नकली भारतीय नोट छाप रहा है. जिससे भारत में टेरर फंडिंग की जा सके. न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, पाकिस्तान में भारत के नकली नोटों की छपाई हो रही है. इन नोटों को पाकिस्तान लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे खतरनाक आतंकी संगठनों को मुहैया करा रहा है.

बता दें कि तीन साल पहले ही पीएम मोदी ने नकली नोटों और आतंकवाद पर लगाम लगाने के लिए पांच सौ और एक हजार रुपये के नोटों को बंद करने का एलान किया था. जिसके बाद से आतंकी संगठनों की आर्थिक रूप से कमर टूट गई थी. लेकिन पाकिस्तान ने इसे एक बार फिर से शुरु कर दिया है. एएनआई को खुफिया सूत्रों से पता चला है कि पाकिस्तान में तेजी से भारत के नकली नोट छापने का काम चल रहा है.

इन नकली नोट को अलग-अलग आतंकी संगठनों को उपलब्ध कराने और भारत में भेजने की हर मुमिकन कोशिश की जा रही है. अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान अपने राजनयिकों के जरिये भारत के नकली नोट नेपाल, बांग्लादेश और भारत के सीमा से लगे देशों के रास्ते भेजने का काम कर रहा है.

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से मिली जानकारी के मुताबिक इन नोट को पाकिस्तान इतनी बेहतर तकनीक से छापा जा रहा है कि इसे नकली साबित करना नामुमकिन है. बता दें कि भारतीय खुफिया एजेंसियों के इनपुट पर नेपाल पुलिस ने दाऊद इब्राहिम के एक गुर्गे को इसी साल मई में गिरफ्तार किया था. जिसका नाम युनूस अंसारी था, पुलिस ने उसके पास से साढ़े सात करोड़ के नकली भारतीय नोट बरामद किए थे. युनूस के साथ पुलिस ने 3 पाकिस्तानी मूल के लोगों को भी गिफ्तार किया था.

एक जांच में पता चला है कि कराची के 'मलीर-हाल्ट' इलाके में स्थित 'पाकिस्तानी सिक्योरिटी प्रेस' में छापे जा रहे, इस जाली नोट में भी पहली बार 'ऑप्टिकल वेरियबल इंक' का इस्तेमाल किया गया है. यह विशेष किस्म की स्याही 2000 के नोट के धागे पर इस्तेमाल किया जाता है. इस स्याही की खासियत है कि ये हरे रंग की दिखाई देती है.

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और भारतीय खुफिया एजेंसियों की संयुक्त जांच में खुलासा हुआ है कि 2000 और 500 के नए नोट एक और प्रमुख सिक्योरिटी फीचर की भी पहली बार ISI के गुर्गों ने हूबहू नकल कर ली है. 2000 के नए भारतीय नोट के एकदम बाईं और दाईं ओर के किनारे में 'ब्लीड-लाइनें' खींची गई हैं.

ये सात लाइनें असल में विशेष रूप से नेत्रहीनों को नोट की पहचान आसानी से कराने में सहायक होती हैं. यह भी उच्च भारतीय तकनीक का ही कमाल है कि, नोट को गोल आकार में मोड़ने पर इन लाइनों के आपस में सधे हुए तरीके से मिल पाना अब तक लगभग नामुमकिन समझा जाता था.

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First published: 9 October 2019, 14:11 IST
 
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