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ईशनिंदा कानून की समीक्षा को तैयार पाकिस्तान

अभिषेक पराशर | Updated on: 29 January 2016, 8:50 IST
QUICK PILL
  • काउंसिल ऑफ इस्लामिक आइडियोलॉजी (सीआईआई) के प्रमुख मुहम्मद खान शेरानी ने कहा कि वह ईशनिंदा कानून की समीक्षा करने को तैयार है. उन्होंने कहा कि वह इस बात पर विचार करने को तैयार है कि ईशनिंदा इस्लाम के मुताबिक है या नहीं. 
  • ईशनिंदा के एक मामले के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से सलमान तासीर की उनके बॉडीगार्ड ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. तासीर को 2011 में उनके बॉडीगार्ड ने मार डाला था. वह ईशनिंदा कानून के तहत एक ईसाई महिला की सजा के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे थे.

पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून की लंबे समय से आलोचना होती रही है. आलोचकों का कहना है कि इस कानून के दुरुपयोग की वजह से हजारों लोगों की जान जा चुकी है. धर्म और राजनीति के जानकार ईशनिंदा कानून पर बात किए जाने को लेकर बेहद सतर्क रहते हैं क्योंकि पाकिस्तान में इस्लाम जैसे मुद्दे पर बात करना बेहद संवेदनशील होता है. पाकिस्तान में ईशनिंदा की अफवाह पर भीड़ बेकाबू हो जाती है जिसकी परिणति दंगे के तौर पर होती है.

शेरानी ने कहा कि वह इस मामले में बहस को लेकर तैयार है. पाकिस्तान में ईशनिंदा के खिलाफ मौत की सजा का प्रावधान है. उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान सरकार को आधिकारिक तौर पर ईशनिंदा कानून को सीआईआई को भेजना चाहिए. इस मु्द्दे को लेकर मौलवियों में काफी मतभेद हैं.' 

उन्होंने कहा, 'तब जाकर परिषद इस बात पर गंभीरता से विचार करेगी और फिर अपनी सिफारिशें सरकार को भेजेगी. जिसमें यह तय किया जाएगा कि मौजूदा कानून को और अधिक सख्त बनाए जाने की जरूरत है या फिर उसे नरम बनाए जाने की.' 

अदालत में ईशनिंदा के मामले में सबूत पेश करना भी ईशनिंदा माना जाता है 

शेरानी हाल ही में उस वक्त चर्चा में आए थे जब सीआईआई ने बाल विवाह पर रोक लगाए जाने संबंधी विधेयक को अटका दिया था. शेरानी ने हालांकि इस मामले में अपना निजी मत नहीं रखा.

पाकिस्तानी ईशनिंदा कानून में मौत की सजा का प्रावधान है हालांकि अभी तक ऐसी कोई सजा नहीं दी गई है. आलोचकों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में निजी दुश्मनी साधने के लिए लोग इस कानून का इस्तेमाल करते हैं. 

सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि अदालत में ईशनिंदा के मामले में सबूत पेश करना भी ईशनिंदा माना जाता है और इस वजह से न्यायाधीश इस तरह के मामले को सुनने से परहेज करते हैं. जिन लोगों को ईशनिंदा का दोषी पाया जाता है उन्हें अक्सर भीड़ मार डालती है.

ईशनिंदा के एक मामले के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से सलमान तासीर की उनके बॉडीगार्ड ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. तासीर को 2011 में उनके बॉडीगार्ड ने मार डाला था. वह ईशनिंदा कानून के तहत एक ईसाई महिला की सजा के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे थे.

हाल के वर्षों में काउंसिल ने यह कहा है कि बलात्कार के मामले में डीएनए को बतौर सबूत इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. काउंसिल ने बलात्कार के मामलों में उस कानून का समर्थन किया था जिसमें बलात्कार पीड़ित महिला को अपना आरोप साबित करने के लिए कम से कम से चार पुरुषों को बतौर सबूत पेश करना होता है. 

First published: 29 January 2016, 8:50 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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