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पाकिस्तान के हिंदू शरणार्थियों को आसानी से मिलेगी भारतीय नागरिकता

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 June 2016, 8:26 IST

पाकिस्तान में धार्मिक उत्पीड़न का सामना करने वाले हिंदुओं को जल्द हिंदुस्तान में घर मिल सकेगा. केंद्र सरकार ने अभी तक चले आ रहे कानून में बदलाव का निर्णय लिया है ताकि भारतीय नागरिकता पाने की प्रक्रिया आसान हो सके.

सूत्रों की मानें तो संसद के मानसून सत्र में नागरिकता अधिनियम-1955 में संसोधन का विधेयक लाया जा सकता है.

डेलीमेल की एक रिपोर्ट के मुताबिक गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, "कैबिनेट के इस प्रस्ताव को अंतिम स्वरूप दिया जा रहा है और उम्मीद है कि इस माह के अंत तक इसे स्वीकृति मिल जाएगी."

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गृह मंत्रालय द्वारा इस विधेयक में तमाम संशोधनों को प्रस्तावित किया गया है जिससे पाकिस्तानी हिंदुओं को भारतीय नागरिकता पाने के दौरान सामने आने वाली परेशानियों से छुटकारा दिलाया जा सके.

प्रस्तावित संशोधनों के मुताबिक भारतीय नागरिकता चाहने वाले हिंदुओं को तमाम छूट दी जा सकती हैं

अपने चुनावी घोषणापत्र में भी भाजपा ने कहा था कि भारत हमेशा ही उत्पीड़न का शिकार हिंदुओं का एक घर रहेगा और वे कभी भी यहां शरण ले सकते हैं.

प्रस्तावित संशोधनों के मुताबिक भारतीय नागरिकता चाहने वाले हिंदुओं को तमाम छूट दी जा सकती हैं. नागरिकता के लिए गृह राष्ट्र से जरूरी अस्वीकार प्रमाणपत्र को भी खत्म किया जा सकता है साथ ही पंजीकरण राशि में भी कमी का प्रस्ताव है.

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गृह मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक, "जहां यह राशि परिवार के हरेक सदस्य के लिए 5,000 रुपये है, पाकिस्तानी हिंदुओं के लिए इसे 100 रुपये तक कम किया जा सकता है."

नागरिकता अधिनियम में इस संशोधन के जरिये उन्हें अपने बैंक खाते खुलवाने, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड और आधार कार्ड पाने की भी अनुमति होगी. 

यह संशोधन बांग्लादेश और अफगानिस्तान के हिंदुओं के लिए भी लागू होंगे. 

यूं तो फिलहाल सही आंकड़ों की जानकारी नहीं है लेकिन इन देशों के करीब दो लाख हिंदू और सिख शरणार्थी भारत में रह रहे हैं. जोधपुर, जैसलमेर, जयपुर, रायपुर, अहमदाबाद, राजकोट, कच्छ, भोपाल, इंदौर, मुंबई, नागपुर, पुणे, दिल्ली और लखनऊ में करीब 400 पाकिस्तानी हिंदू शरणार्थी शिविर चल रहे हैं.

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इससे पहले नरेंद्र मोदी सरकार ने दीर्घ कालिक वीजा आवेदनों के लिए ऑनलाइन सिस्टम जारी कर दिया था जिसके जरिये ऐसे लोग पांच सालों तक भारत में रह सकें.

सत्ता में आने के एक साल में ही भाजपा के नेतृत्व वाली राजग सरकार ने पड़ोसी मुल्कों के 4,000 से ज्यादा हिंदुओं को नागरिकता दी है. जबकि यूपीए सरकार ने अपने पांच वर्ष के कार्यकाल के दौरान करीब 1,000 लोगों को ही यह मौका दिया.

इसके अलावा गृह मंत्रालय ने गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली में जिला स्तर पर 26 विशेष शिविर भी आयोजित किए.

First published: 2 June 2016, 8:26 IST
 
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