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बांग्लादेश बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान भेज रहा है 2,000 रुपये के नकली नोट

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 February 2017, 16:28 IST
(फाइल फोटो)

नोटबंदी के केवल दो महीनों में ही पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में नकली नोट छापकर भारत की अर्थव्यवस्था को चौपट करने की नापाक कोशिश करने वाले लोग सक्रिय हो गए हैं. आलम यह है कि बांग्लादेश बॉर्डर के जरिये पाकिस्तान से भारत में 2,000 रुपये के नकली नोट भेजे जाने लगे हैं.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक आधिकारिक सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की और बताया कि भारत की नेशनल इंवेस्टीगेशन एजेंसी (एनआईए) और बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ) ने हाल ही में काफी नकली नोट बरामद करने के साथ ही इससे जुड़े व्यक्तियों को गिरफ्तार भी किया है.

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इस कड़ी में सबसे ताजा गिरफ्तारी मुर्शिदाबाद में 8 फरवरी को की गई. इसमें पश्चिम बंगाल के मालदा के 26 वर्षीय अजीजुर रहमान को धरा गया. सूत्रों के मुताबिक रहमान को 2,000 रुपये के 40 नकली नोटों के साथ धरा गया. रहमान ने सुरक्षा एजेंसियों को बताया कि यह नोट कथितरूप से आईएसआई की मदद से पाकिस्तान में छापे गए थे और इन्हें बांग्लादेश की सीमा के जरिये भारत में लाया गया.

सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में पता चला कि नोट की छपाई की क्वॉलिटी के हिसाब से एक स्मगलर को हर 2,000 रुपये के नकली नोट के बदले 400-600 रुपये के असली नोट देने पड़ते हैं.

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बताया जा रहा है कि जांचकर्ताओं और विशेषज्ञों द्वारा किए गए अध्ययन में पता चला कि 2,000 रुपये के नोट में मौजूद 17 में 11 सिक्योरिटी फीचर्स को इन नकली नोटों में शामिल किया गया है. इनमें पारदर्शी क्षेत्र, वाटरमार्क, अशोक स्तंभ चिन्ह, नोट के बांयीं ओर लिखे 2,000 रुपये के अक्षर, आरबीआई गवर्नर द्वारा दी जाने वाली शपथ और हस्ताक्षर और देवनागरी लिपि में सामने की ओर अंकों में लिखा टेक्स्ट शामिल है. 

विशेषज्ञों के हवाले से सूत्रों ने बताया कि नोट के पिछले हिस्से में चंद्रयान, स्वच्छ भारत लोगो और प्रिंटिंग का वर्ष भी कॉपी किया गया है. हालांकि जब्त किए गए नकली नोट के कागज और छपाई की गुणवत्ता काफी कम थी, लेकिन वे असली नोट से मिलते-जुलते थे. इतना ही नहीं इन नकली नोटों में असली करेंसी की तरह वाटरमार्क और कड़क आवाज भी आती है.

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इस जांच से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "पिछली बार की तुलना में गुणवत्ता बढ़ी है और अब आंखों से नकली नोट की पहचान करना मुश्किल है. पिछले महीने स्मगलर्स ने 2,000 और 500 के नकली नोटों के कुछ सैंपलों को यह जांचने के लिए भेजा था जिससे पता चले कि उन्हें चलाने में किसी तरह की दिक्कत तो नहीं आती. हमें भय है कि बाजार में यह जल्द आ सकते हैं."

सूत्रों का कहना है कि देश में नकली नोटों की खेप पहुंचाने की पहली कोशिश दिसंबर 2016 के आखिरी सप्ताह में की गई थी. इस दौरान नकली नोटों के सैंपलों को मालदा में स्मगलर्स की स्वीकृति लेने के लिए भेजा गया था.

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जबकि 22 जनवरी और 4 फरवरी को ऐसे नोटों को जब्त किए जाने की पहली कार्रवाई हुई जब पियारुल शेख (16) और दिगंबर मंडल (42) को मालदा के कालीचक में स्थानीय पुलिस और एनआईए द्वारा धरा गया.

सिक्योरिटीज प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एसपीएमसीआईएल) के अधिकारियों की मानें तो नए जारी किए गए नोटों में कोई भी अतिरिक्त सुरक्षा फीचर्स नहीं हैं और यह पुराने 1000 और 500 करेंसी नोट जैसे ही हैं.

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नाम न छापने की शर्त पर इस अधिकारी ने कहा, "नए सिक्योरिटी फीचर्स जोड़ने से पहले कई चरणों की प्रक्रिया और सलाह की जरूरत संबंधी भारी कार्रवाई करनी पड़ती है. नए चलन में लाए गए 2,000 और 500 के नोटों में अतिरिक्त सुरक्षा फीचर्स जोड़ने का वक्त ही नहीं था क्योंकि इसका फैसला केवल पांच माह पहले ही लिया गया था. पिछली और आखिरी बार 2005 में इन सिक्योरिटी फीचर्स को जोड़ा गया था."

गौरतलब है कि 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की दी थी कि भारत की अर्थव्यवस्था को चौपट करने के लिए ज्यादातर पाकिस्तान में ऊंचे मूल्य के नकली नोट छापे जाते हैं और इन्हें बेकार करने के लिए 1,000 और 500 के नोटों का चलन बंद किया जा रहा है. 

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इस साल जनवरी में सरकार ने इंटेलीजेंस रिपोर्ट का हवाला देते हुए  कहा था कि पाकिस्तान में जाली भारतीय करेंसी नोटों को छापने वाली दो प्रिंटिंग प्रेस को बंद करवा दिया गया. 

2016 में कोलकाता स्थित भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) द्वारा किए गए शोध में पता चला था कि 400 करोड़ रुपये मूल्य के नकली करेंसी नोट चलन में थे.

First published: 14 February 2017, 16:53 IST
 
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