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अब होगी हिंदुस्तान में रहने वाले पाकिस्तानी हिंदुओं की जिंदगी आसान

सादिक़ नक़वी | Updated on: 20 April 2016, 16:26 IST
QUICK PILL
  • भारत सरकार ने देश में रहने वाले पाकिस्तानी हिंदुओं को आधार कार्ड, पैन कार्ड और डीएल बनवाने का अधिकार देने का फैसला किया है. हालांकि इसकी अधिसूचना जारी नहीं हुई है.
  • पाकिस्तानी हिंदुओं को सरकार की घोषणा से मिली है बड़ी राहत. समुदाय का मानना है कि इससे हो जाएगी उनकी जिंदगी आसान.

लंबी अनिश्चितता के बाद भारत में रहने वाले पाकिस्तानी शरणार्थियों को पहचान पत्र मिल सकेगा. इन शरणार्थियों में बहुत बड़ी संख्या पाकिस्तानी हिंदुओं की है. इतना ही नहीं अब वो भारत में संपत्ति भी खरीद सकेंगे. ये लोग पाकिस्तान में उनके साथ होने वाली हिंसा और उत्पीड़न की वजह से भारत आने को मजबूर हुए थे.

खबरों के अनुसार भारत सरकार इस बाबत जल्द ही अधिसूचना जारी कर सकती है.

इस मसले पर सरकार के साथ वार्ता में शामिल हिंदू सिंह सोढ़ा कहते हैं, "हम इसके लिए लंबे समय से संघर्ष कर रहे थे. लेकिन असली तस्वीर अधिसूचना जारी होने के बाद ही साफ होगी."

सोढ़ा कहते हैं कि उनके समुदाय की मांगें भारतीय संविधान और कानून के तहत वाजिब हैं.

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सरकार द्वारा दी जाने वाली इस छूट का लाभ वही शरणार्थी ले सकेंगे जिनके पास दीर्घकालीन वीज़ा है. ये लोग अपने वीज़ा की मदद से आधार कार्ड या पैन कार्ड बनवा सकेंगे. फिर ये लोग दूूसरी नागरिक सुविधाएं भी पा सकेंगे.

भारत में रहने वाले पाकिस्तानी शरणार्थी हिंदू बनवा सकेंगे आधार कार्ड, पैन कार्ड और डीएल

सरकार पाकिस्तानी शरणार्थियों को बैंक अकाउंट खोलने और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से पूर्व-अनुमति लिए बगैर कारोबार करने की भी इजाजत दे सकती है. ये शरणार्थी ड्राइविंग लाइसेंस भी बनवा सकेंगे.

सोढ़ा कहते हैं, "ये तो बुनियादी चीजें हैं जिन्हें बहुत पहले हो जाना चाहिए था. इससे हमें शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी बुनियादी सुविधाएं मिल सकेंगी."

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सोढ़ा बताते हैं कि कई बार ट्रैफिक पुलिस वाले उनकी गाड़ियां लाइसेंस न होने के कारण उनकी गाड़ियां उठा लेते हैं.

सोढा कहते हैं कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं है इसलिए योजना शुरू होते समय ही हमें इसका अधिकार दे दिया जाना चाहिए था. सोढ़ा कहते हैं कि पाकिस्तानी होने के कारण उन लोगों के साथ नाइंसाफी होती रही.

सोढ़ा के अनुसार भारत सरकार ने पाकिस्तानी शरणार्थियों की मांग पर विचार के लिए संयुक्त सचिव की नेतृत्व में टास्क फोर्स बनायी थी.

सोढ़ा बताते हैं, "इसमें कुल 15 महीने लगे. टास्क फोर्स ने 18 अप्रैल को अपने सुझाव सरकार को सौंपा."

भारत सरकार पाकिस्तानी शरणार्थियों को नागरिकता देने की प्रक्रिया में भी ढील देने पर विचार कर रही है. संभव है कि सरकार छत्तीसगढ़, दिल्ली-एनसीआर, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के 18 जिलों के डीएम (जिलाधिकारियों) या उनके अधीनस्थ अधिकारियों को अगले दो सालों तक पाकिस्तानी शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता देने का अधिकार दे सकती है.

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हालांकि जम्मू-कश्मीर में रहने वाले शरणार्थियों का इन प्रस्तावों में कोई जिक्र नहीं है. जम्मू-कश्मीर में भारत-पाकिस्तान युद्धों के बाद आकर बसने वाले शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता तो मिल गयी लेकिन उन्हें राज्य में जमीन खरीदने या वोट देने का अधिकार अब तक नहीं मिला है.

भारत में रहने वाले पाकिस्तानी शरणार्थियों की दीर्घकालीन वीज़ा फ़ीस 15 हजार से घटाकर 100 रुपये की जा सकती है

भारत विभाजन या 1971 के युद्ध के बाद भारत आने वाले शरणार्थियों को नागिरकता मिल गयी. लेकिन जो लोग अपनी सुरक्षा से जुड़ी आशंकाओं के चलते बाद में आए उनकी स्थिति आज भी अस्पष्ट है. ऐसे कुछ लोगों को नागरिकात मिल गई लेकिन कइयों को नहीं मिली है. 

भारत सरकार पाकिस्तानी शरणार्थियों के लिए नागरिकता लेने का शुल्क भी घटाकर 100 रुपये करने पर विचार कर रही है. फिलहाल ये शुल्क 15 हजार रुपये है.

सोढ़ा कहते हैं, "ज्यादातर शरणार्थी बहुत गरीब है इसलिए ये राशि बहुत ज्यादा है. राशि कम होने से हमें बहुत आसानी होगी."

अभी पाकिस्तानी शरणार्थियों को विदेशी पंजीकरण कार्यालय में अपनी निवास और आवागमन के बारे में पूर्व-सूचना देनी होती है. सरकार इस नियम में भी छूट दे सकती है. संभव है कि सरकार एक राज्य से दूसरे राज्य में दीर्घकालीन वीज़ा के हस्तांतरण की प्रक्रिया भी आसान कर दे.

सोढ़ा कहते हैं, "ये बहुत अच्छा फैसला है. सरकार दो साल के दीर्घकालीन वीज़ा को पांच साल का कर दिया हैै लेकिन मुझे नहीं लगता कि किसी को अभी तक पांच साल का वीज़ा मिला है."

First published: 20 April 2016, 16:26 IST
 
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