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पंपोर आतंकी हमला: यह साल सुरक्षा बलों के लिए बेहद नुकसानदेह सिद्ध हो रहा है

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 June 2016, 7:50 IST

वर्ष 2016 कश्मीर घाटी में तैनात सुरक्षा बलों के लिए बहुत नुकसानदेह और दुखद साल साबित हो रहा है. केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के एक अधिकारी के मुताबिक बीते साल कश्मीर में पैरा-मिलिट्री फोर्स के ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं बनिस्बत उसके पूर्व के दो सालों के.

इस अधिकारी के अनुसार शनिवार को सीआरपीएफ पर जो हमला हुआ, वह 2000 के शुरुआती दशक के बाद सबसे बड़ा और नुकसानदेह रहा. 

आतंकियों को स्थानीय लोगों के समर्थन के चलते सुरक्षा बलों के लिए स्थिति और बदतर हो गई थी. इस अधिकारी के अनुसार हमले के वक्त सीआरपीएफ को सहयोग करने एक दल जब अवन्तीपुरा से पंपोर जा रहा था, तो स्थानीय लोगों ने उस पर पत्थर फेंके जिसके चलते वे घटनास्थल तक नहीं पहुंच सके.

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इस अधिकारी ने दुखी मन से बताया कि 90 के दशक में जब आतंकवाद चरम पर था, हमने कई जांबाज साथियों को खोया था. लेकिन 2000 के बाद हमने अपने एक दिन में उतने साथी नहीं खोए जितने शनिवार के हमले में खोए हैं. हमारे सैनिकों के लिए यह जगह बहुत ही कठिन हालात वाली और जानलेवा बन गई थी.

इस अधिकारी ने शहीद सिपाहियों और आतंकवादियों को ढेर किए जाने के आंकड़े देते हुए बताया कि ये मुठभेड़ें कितनी भयावह बन गईं हैं. अधिकारी के अनुसार मई 2015 से पैरा-मिलिट्री फोर्स पर सात हमले हो चुके हैं. 

इनमें से दो बीएसएफ रक्षक दल और बाकी सीआरपीएफ के सिपाहियों पर घात लगाकर किए गए. पैरा मिलिट्री फोर्स के 12 लोगों को जान गंवानी पड़ी जबकि उन्होंने 5 आतंककारियों को ढेर किया.

हमले का ब्यौरा

फिदायीन हमले के बारे में और कई जानकारियां मिली हैं. गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक यह माना रहा है कि हमलावर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से आए थे. जांच से हमले की सुनियोजित साजिश के बारे में पता चला.

सीआरपीएफ के महानिदेशक के दुर्गाप्रसाद कहते हैं कि पंपोर में हाईवे 44 पर एक मोड़ है. यह व्यस्त बाजार है. आतंकवादियों को किसी भी तरह से यह पता चल गया कि साल में एकबार होने वाले अभ्यास के लिए सीआरपीएफ के जवान कब अपना कैम्प छोड़ेंगे और जब वे इस मोड़ पर पहुंचेंगे तब उनकी चाल धीमी पड़ जाएगी. 

सवाल यह है कि उन्हें यह सब कैसे पता चल गया? प्रसाद यह भी कहते हैं कि इसमें आत्मसमर्पण किए कुछ आतंकवादियों की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता.

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खुफिया सूचनाओं के अनुसार सीआरपीएफ को जानकारी मिली है कि दो लोग एक आल्टो कार से हमले वाली जगह पर आए और दो आतंकवादियों को उतार कर चले गए. बताते हैं कि बाद में यह कार श्रीनगर की तरफ चली गई. हालांकि हमले के दो दिन बाद भी कई सवालों के जवाब अभी नहीं मिल सके हैं.

मुठभेड़ में जो दो आतंकवादी मारे गए हैं, जिनके बारे में लश्करे-तैयबा ने दावा किया है कि वे उनके सदस्य थे, संभवत: उन्होंने हाल में ही नियंत्रण रेखा पार की होगी. मुठभेड़ जहां हुई है, वह जगह नियंत्रण रेखा से केवल 60 किमी दूर है.

पिछले पांच माह में कम से कम 50 आतंकियों के सीमा पार कर भारत आने की खबर है

सवाल यह उठता है कि सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए जब नियमित रूप से एलओसी, कई चौकियां आदि की निगरानी व्यवस्था है तो उन्होंने कैसे इतनी चौकस व्यवस्था को धता बता दिया. गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने आंकड़े देते हुए बताया कि पिछले पांच माह में कम से कम 50 आतंकियों के सीमा पार कर भारत आने की खबर है.

इसका अर्थ यह निकलता है कि हर तीन दिन में एक आतंकी घुसपैठ करने में सफल हो रहा है. एक अन्य सवाल जिसका उत्तर अभी नहीं मिला है, क्या सीआरपीएफ स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर का पालन कर रही थी. रक्षामंत्री मनोहर पार्रिकर का मानना है कि बल ने एसओपी का पालन नहीं किया. जबकि डीजी का कहना है कि हमने सब कायदों का पालन किया था.

पैरा-मिलिट्री फोर्स के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार 44 जवानों को ले जा रही बस पर जैसे ही हमला हुआ, तुरन्त ही सीआरपीएफ के दस्ते में शामिल एक बुलेट प्रूफ मोबाइल बंकर पीछे से आई और उसने 2 आतंकियों को मार गिराने में मदद की. पूरी घटना का दो मिनट का एक वीडियो भी जारी हुआ है.

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वीडियो के जारी होने से भी कई सवाल उठ खड़े हुए हैं, मसलन आतंकियों को लेकर एक कार कैसे कश्मीर में घूमती रही और उसे किसी भी चेक प्वाइंट पर चेक नहीं किया गया? मारे गए आतंकियों के पास से दो एक47, 13 मैग्जीन, सात जिंदा हैंड ग्रेनेड आदि बरामद हुए है.

एक कार भारी मात्रा में गोला-बारूद लेकर सड़क पर घूमती रही और किसी को पता भी नहीं चला. शनिवार की घटना से सबक लेते हुए सीआरपीएफ पहली बार अब ऐसी बस लेने जा रही है जिसमें बुलेट प्रूफ प्लेट लगी होगी.

ऐसी ही बुलेट प्रूफ प्लेट सेना ने अपनी बसों में लगाई हुई हैं. डीजी ने बताया कि हम अपने दस्ते की सुरक्षा मुद्दों पर नए सिरे से विचार कर रेहे हैं. देखिए, कितना सफल हो पाते हैं.

First published: 30 June 2016, 7:50 IST
 
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