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यूपी जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव: सपा ने किया 36 जिलों में जीत का दावा

आशीष कुमार पाण्डेय | Updated on: 5 January 2016, 23:08 IST
QUICK PILL
  • जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए हो रहे चुनावों में 36 जिलों में विभिन्न दलों के प्रत्याशियों ने अपने नाम वापस लेकर सपा \r\nकी एकतरफा जीत की राह सुनिश्चित कर दी है.
  • प्रदेश के 74 जिलों में हो रहे जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में 36 \r\nजिलों में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी निर्विरोध चुन लिए गए हैं. इन जिलों में बाकी सभी दलों के उम्मीदवारों ने नामांकन वापसी के आखिरी दिन अपने नाम वापस ले लिए.

उत्तर प्रदेश में आगामी सात जनवरी को जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव होने हैं लेकिन चुनाव से पहले ही समाजवादी पार्टी ने 36 सीटों पर निर्विरोध जीत दर्ज कर ली है.

74 जिलों में होने वाले पंचाय अध्यक्ष के चुनाव में 36 जिलों में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशियों ने किसी भी तरह की चुनौती का सामना किये बगैर ही जीत दर्ज कर ली है. 

नॉमिनेशन वापसी की अंतिम तारीख के समय में इन 36 जिलों में विभिन्न दलों के प्रत्याशियों ने अपने नाम वापस लेकर सपा की जीत पर मुहर लगा दी.

इस पूरे मामले में सबसे चौकाने वाला मामला अमेठी का रहा. यह कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र है. यहां से कांग्रेस ने श्रीमती कृष्णा चौरसिया को अपना प्रत्याशी बनाया था, लेकिन उन्होंने अंतिम समय में अपना नाम वापस लेकर सपा प्रत्याशी कली मौर्या की जीत पक्की कर दी है.

समाजवादी पार्टी पारिवारिक उठापटक के बावजूद पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में झंडा गाड़ने में कामयाब रही है

अमेठी के जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी प्रत्याशी का नाम वापस लेना उनका व्यक्तिगत फैसला है. इसमें पार्टी क्या कर सकती है? अगर वो चुनाव लड़तीं तो पार्टी उनके लिए पूरा प्रयास करती. इसके अलावा ललितपुर और संत कबीर नगर में भी सपा प्रत्याशियों को किसी चुनौती का सामना नहीं करना पड़ा है. 

उत्तर प्रदेश में अगले साल 2017 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक दलों के पास अपनी ताकत दिखाने और खुद को मजबूत करने का यह आखिरी मौका था. जाहिर है कि सपा ने इसमें खुद को इक्कीस साबित किया है. लेकिन इसी पंचायत अध्यक्ष के चुनाव ने मुलायम सिंह के परिवार की अंतर्कलह को भी सतह पर लाने का काम किया.

बिहार चुनाव में महागठबंधन से अलग होकर अपनी किरकिरी करवाने वाले मुलायम सिंह अभी संभल ही रहे थे कि पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को लेकर सीएम अखिलेश यादव और और शिवपाल आपस में टकरा गए.

पढ़ें: मुलायम परिवार की जंग: अखिलेश-शिवपाल आमने-सामने

दरअसल विवाद का मुद्दा जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनावों में टिकट बंटवारे को लेकर था. जिसमें मुलायम के परिवार के बीच काफी खींचतान मची. टिकट बंटवारे में शिवपाल की भूमिका प्रमुख थी.

शिवपाल ने अखिलेश के तीन साथियों पर जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने का आरोप लगा कर उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया. यह कार्रवाई अखिलेश को बिना भरोसे में लिए ही की गई.

इन नेताओं को 'टीम अखिलेश' का हिस्सा माना जाता है. इनके निष्कासन से अखिलेश काफी नाराज हो गये. रिश्तों में तल्खी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सीएम अखिलेश सैफई महोत्सव में ही नहीं गये.

इसके बाद अखिलेश ने भी बड़ी चतुराई के साथ अपने चाचा शिवपाल को संदेश देने के लिए पंचायत चुनाव में धांधली के आरोप में फंसे सपा नेता तोता राम को शिवपाल के मंच से गिरफ्तार करा दिया.

इसके अलावा अखिलेश ने पार्टी विरोधी गतिविधियों का हवाला देते हुए गोरखपुर के तीन नेताओं राममिलन यादव, कुंअर प्रताप सिंह और मुख्तार अहमद खां को पार्टी से निष्कासित कर दिया.

मुलायम सिंह ने मामले की नजाकत को भांपते हुए आनन-फानन में अखिलेश के करीबी दो नेताओं सुनील यादव 'साजन' और आनंद भदौरिया का निलंबन वापस ले लिया. कह सकते हैं कि देर आयद दुरुस्त आयद. समाजवादी पार्टी इन तमाम उठापटक से गुजर कर पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में झंडा गाड़ने में कामयाब रही है.

First published: 5 January 2016, 23:08 IST
 
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