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'यह देश सुलग रहा है, बह जाएगा तुम्हारा मोम का अस्तित्व'

पाणिनि आनंद | Updated on: 10 February 2017, 1:50 IST
QUICK PILL
मोम के पुतलों के लिए प्रसिद्ध मैडम तुसाद संग्रहालय में भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी की प्रतिमा लगेगी. इससे पहले भी कई प्रसिद्ध भारतीयों के मोम के पुतले मैडम तुसाद में लग चुके हैं. नरेंद्र मोदी की प्रतिमा लंदन स्थित संग्रहालय में 28 अप्रैल को सार्वजनिक होगी.

एक दिल है जो पिघलता ही नहीं. न दलितों की हत्याओं से. न दंगाई भीड़ के हाथों मारकर टांग दिए गए किशोर की लाश से. बच्ची का बलात्कार, सीमा पार से गोलीबारी में सहारा खोती मां, गौमांस के नाम पर चौराहों पर मारा जाता कोई मुसलमान, जंगलों में खदेड़-खदेड़कर मारा जा रहा आदिवासी, शोषण झेलता और आत्महत्या करता छात्र, युवा.. ऐसा कोई भी हश्र कुछ भी नहीं पिघला पा रहा है.

किसानों और भूमिहीनों की मौत पर तो पिघलना कब का बंद हो चुका है. सब नियति के मारे हैं. आपने चाय बेची है. लेकिन इनका सबकुछ बिक गया है. ज़िंदगी भी, ज़मीन भी, जो कारोबार इनकी रोटी था, वो भी. ये कितना कुछ बेचकर भी कहीं नहीं जी पा रहे हैं. आप जीते थे, तो आस लगाई थी कि जिनका सब बिक गया है, उनके लिए आप पिघल जाएंगे. लेकिन यहां कुछ नहीं पिघल रहा.

वीडियो देखेंः मोम के नरेंद्र मोदी से मिले पीएम मोदी

अल्पसंख्यक खौफ़ में रहें, कलाकर्मी मौन रहें, रंगकर्मी पर्दों के पीछे छिप जाएं. दलित नतमस्तक हो जाएं अगड़ों के वर्चस्व वाली व्यवस्था के आगे. प्रगतिशीलों को चौराहों पर मारे जाएं कोड़े, उन्हें देशद्रोही कहा जाए. भूख से तड़पकर रोटी मांगते मुंह में ठूंस दिए जाएं भारत माता की जय के नारे. लेकिन ऐसी किसी भी घटना से आपका दिल नहीं पसीजता. निःशब्द सबकुछ देखते रहें आप और अनदेखा करते रहें. संवेदना के सूख चुके स्रोतों पर जैसे जम चुकी है निष्ठुरता की बर्फ़. और वो इतने ताप में भी पिघल ही नहीं रही.

मोदी जी, मोम का पुतला भी आपकी तरह मौन है. वाकई यह आपका ही प्रतिरूप है?

उधर लुटियंस की अट्टालिकाओं में आप महान बनने की तैयारी करते रहें. आपके जबड़े नापे गए, सीना मापा गया. फीते ने आपकी आंखों और उनके बीच की दूरियों तक को दर्ज किया. आपके कपड़े से लेकर बाल तक और पेट से लेकर नाखून तक, सबकुछ मापा गया. आप चुनाव जीत चुके हैं. अब आप अशोक हैं. आप देवता बनना चाहते हैं, इतिहास में सदैव जीवित रहना चाहते हैं. आप अशोक जैसे ही महान हो जाना चाहते हैं.

महानता का धागा आपके कोट पर नाम रट रहा है. उसने आपके लिए दुनिया के सबसे महंगे कपड़े बिने हैं, सबसे आरामदायक चमड़े का जूता बनाया है. सबसे महीन ऊन से काते गए दुशाले और सबसे महंगे फूलों के गुलदस्ते आपको राज प्रासाद में महान राजा जैसा अहसास करा रहे हैं.

यह मोम का पुतला भी आपकी तरह मौन है. वाकई यह आपका ही प्रतिरूप है. यह निरपेक्ष है, किसी भी दर्द और वेदना के प्रति. यह निःशब्द है किसी भी कराह या सवाल के प्रति, यह निरलिप्त है सेवा के किसी भी वचन के प्रति. यह सजा धजा है. प्रासादों में है. सुंदर है. दर्शनीय है. लोगों को लुभाता है, बहलाता है, आकर्षित करता है. लेकिन यह मोम का पुतला है. महज मोम का ही पुतला.

मोदी जी, मोम सदा नहीं रहता. न ही राजा रहता है. सत्ता किसी की चिरसंगिनी नहीं होती

लेकिन मोम सदा नहीं रहता. न ही राजा रहता है. मोम पिछल जाता है. राजा भूत हो जाता है. सत्ता किसी की चिरसंगिनी नहीं होती. ऐसे समय में जब वेदनाओं, संकटों, संघर्षों, अन्याय और शोषण लोगों को चैन से सांस नहीं लेने दे रहे. और प्रकृति खुद अपना कोप दिखाकर तिल-तिल तपा रही हो, सूखा विकास भी हो और खेत भी. सूखी आंखें भी हों और जलराशियां भी. तो मोम कबतक खुद को साध सकता है.

हम जिस समय के साक्षी हैं, उसमें लोहा भाप हुआ जाता है. आप मोम के पुतले के कानों में रंग भर रहे हो. कबतक रहेगा मोम का अस्तित्व, कबतक रुकेगा लोहे से ढलता विद्रोह.

(ये लेखक के निजी विचार हैं. संस्थान की इनसे सहमति आवश्यक नहीं.)

First published: 2 May 2016, 4:39 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बीबीसी हिन्दी, आउटलुक, राज्य सभा टीवी, सहारा समय इत्यादि संस्थानों में एक दशक से अधिक समय तक काम कर चुके हैं.

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