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पंकजा मुंडे की छगन भुजबल से मुलाक़ात, महाराष्ट्र की राजनीति में नई अटकलें

अश्विन अघोर | Updated on: 24 September 2016, 7:24 IST
(कैच)
QUICK PILL
  • बीमार एनसीपी नेता छगन भुजबल से मुलाक़ात के लिए महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे जेजे अस्पताल गईं. 
  • इस मुलाक़ात के पीछे महाराष्ट्र की राजनीति में मराठा समुदाय की तर्ज़ पर ओबीसी आंदोलन खड़ा करने की कोशिश की अटकलें लग रही हैं.
  • शिवसेना ने इस मुलाक़ात पर सामना में संपादकीय लिखकर एनसीपी और बीजेपी पर सवाल खड़ा किया है. 

महाराष्ट्र की महिला एवं बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे और वरिष्ठ एनसीपी नेता छगन भुजबल के बीच हुई मुलाकात से महाराष्ट्र की राजनीति पर नजर रखने वालों की भौंवे तन गईं हैं. भुजबल इन दिनों मनी लॉंड्रिंग मामले में मुम्बई की ऑर्थर रोड जेल में हैं. बीमार होने के चलते उन्हें जेजे अस्पताल में भर्ती किया गया है. मुंडे उनसे मिलने अस्पताल गईं थीं. मराठाओं की रैली से राज्य में राजनीतिक गतिविधियां उग्र हैं. ओबीसी नेता स्थिति से निपटने में खुद को कठिनाई में घिरा महसूस कर रहे हैं कि किस तरह से राज्य सरकार पर मराठा समुदाय को आरक्षण देने के लिए दबाव बनाया जाए. ओबीसी नेताओं के छिट-पुट बयानों को यदि कोई संकेत माना जाए तो मराठा समुदाय भी मराठा क्रांति मोर्चा की तर्ज पर रैली निकालने की योजना बना रहा है. 

मराठा समुदाय की तर्ज़ पर आंदोलन की कोशिश?

अब जबकि गोपीनाथ मुंडे जीवित नहीं हैं और छगन भुजबल जेल में हैं, राज्य में समुदायों के बीच अशांति फैल रही है. ओबीसी समुदाय वर्तमान में नेतृत्वविहीन है और खाली जगह भरने के लिए कई लोगों की निगाहें लगी हुईं हैं. जेजे अस्पताल में पंकजा और भुजबल के बीच मुलाकात से राज्य के राजनीतिक क्षेत्र में अटकलों का बाजार गरम हो गया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों नेताओं की मुलाकात मराठा समुदाय की तरह से एक आंदोलन शुरू करने की प्रयास हो सकता है. छगन भुजबल मनी लॉंड्रिंग के आरोप में जेल में हैं और उनके बाहर आने की सम्भावना बहुत ही कम है, ऐसे में पंकजा मुंडे शीर्ष स्तर पर इस खाली जगह को हथियाने की कोशिश कर सकती हैं. ओबीसी समुदाय की सबसे बड़ी चिन्ता यह है कि यदि सरकार आरक्षण देने का निश्चय करती है तो मराठा आरक्षण उनके हिस्से में सेंध लगा सगा सकता है.

जेल जाएंगे एनसीपी नेता: सामना

जहां तक शिव सेना का सवाल है तो इस मुलाकात के बाद से उसे विपक्ष के साथ भाजपा पर भी निशाना साधने का मौका हाथ लग गया है. पार्टी के मुखपत्र सामना के सम्पादकीय में, शिव सेना ने एनसीपी नेताओं को कड़ी डांट लगाई है कि उन्होंने भुजबल की कोई खोज-खबर नहीं ली है. मुंडे और भुजबल परिवार के बीच पारिवारिक रिश्तों का हवाला देते हुए शिव सेना ने लिखा है कि यह मुलाकात भतीजी और चाचा की मुलाकात थी.

एनसीपी नेताओं की आलोचना करते हुए शिव सेना ने एनसीपी को पंकजा से सीख लेने की सलाह दी है. शिव सेना  ने यह भी कहा है कि उन्हें यह ध्यान में रखना चाहिए कि उनमें (एनसीपी) से कई लोग जल्द ही सम्भवतः भुजबल के साथ आ सकते हैं. सम्पादकीय में कहा गया है कि हालांकि, भुजबल आज जेल में हैं, एनसीपी नेताओं के यह नहीं भूलना चाहिए कि वे भी जल्दी या बाद में जेल में होंगे. एनसीपी का यह बहुत ही अमानवीय काम है कि एक ऐसे वरिष्ठ नेता को उन्होंने भुला दिया जिन्होंने कई बार उन्हें संकट से उबारा है. कम से कम एनसीपी नेताओं को जेल में जाकर भुजबल से मिल लेना चाहिए कि वे उनसे जेल की व्यवस्थाओं के बारे में समझ सकें ताकि जेल में रहने के लिए वे अपने को तैयार कर सकें.

सम्पादकीय में बड़ी चतुराई से एनसीपी को निशाने पर लेते हुए भुजबल के प्रति सहानुभूति दिखाई गई है. सम्पादकीय में कहा गया है, 'हालांकि, भुजबल शिव सेना के राजनीतिक विरोधी हैं. वे जिन हालातों से वर्तमान में गुजर रहे हैं, हमारी सहानुभूति उनके साथ मानवीय आधार पर है. शिव सेना सुप्रीमो बाला साहेब ठाकरे और पार्टी के खिलाफ उनके किए गए घृणित कार्यों को हम सामने नहीं लाना चाहते. उन्होंने अपने कृत्यों का चुकता कर दिया है. दुखद है कि एनसीपी नेताओं ने भी अब उन्हें एकतरफ कर दिया है और अस्वीकार कर दिया है. यही वह कारण है जिसके चलते पंकजा मुंडे उनसे मिलने अस्पताल गईं. हम उनके साहस की तारीफ करते हैं कि वह उनसे मिलीं.

बीजेपी भी शिवसेना के निशाने पर

सम्पादकीय में जहां एनसीपी को कड़ी डांट लगाई गई है, वहीं भारतीय जनता पार्टी को भी निशाने पर रखा गया है. सम्पादकीय में कहा गया है कि छगन भुजबल और आसाराम बापू दोनों लम्बे समय से जेल में हैं. हालांकि, दोनों के जेल में रहने की वजह पूरी तरह से अलग-अलग है लेकिन तथ्य यही है कि आसाराम बापू को जमानत नहीं मिल सकी है. इससे यह संदेह खड़ा होता है कि न्यायपालिका कानून के अनुसार चलती है या किसी व्यक्ति विशेष के कहने से चलती है. गोवा के एक विधायक को,  एक लड़की के साथ दुष्कर्म करने और यौन हिंसा के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, उसे एक सप्ताह में ही जमानत मिल गई जबकि उनके खिलाफ पीड़िता के बयान और ठोस सबूत थे. विधायक का दावा था कि उनका राजनीतिक करियर कत्म करने के लिए एक साजिश के तहत उन्हें फंसाया गया है. सच्चाई तो एकदिन सामने आएगी और इसमें कानून समय लेगा. लेकिन तथ्य यही है कि विधायक को एक सप्ताह में ही जमानत मिल जाती है और आसाराम बापू को जेल में रहते चार साल हो गए हैं. इस देश में क्या एक ही अपराध के लिए अलग-अलग कानून है?

जेल जाने के बाद भुजबल को भूलाया

कहा जाता है कि भुजबल को डेंगू हो गया है. पंकजा के उनसे मिलने जाने की फोटो तो मीडिया में प्रकाशित हो गईं हैं, लेकिन एनसीपी नेता, जो सालों से भुजबल का इस्तेमाल करते रहे, वे उनसे मिलने नहीं गए. सम्पादकीय में कहा गया है कि जब उनके अच्छे दिन थे, तब सभी लोग उनकी आज्ञा मानने को तत्पर रहते थे. उनके हर कामों की प्रशंसा की जाती थी और समर्थन किया जाता था. भुजबल द्वारा नासिक हाउस में दी जाने वाली कोई भी पार्टी वे छोड़ते नहीं होंगे. लेकिन जब से उन्हें आर्थर रोड जेल में रखा गया है, कोई भी उनसे मिलने नहीं गया. इसके विपरीत उन्होंने ओबीसी राजनीति पर पिच मारनी शुरू कर दी. हमें ऐसे लोगों से सहानुभूति है जिनकी ऐसी सोच है. 

सम्पादकीय में कहा गया है कि मुलाकात का और कोई मतलब नहीं लगाया जाना चाहिए, सिर्फ यह पारिवारिक सम्बंध और एक-दूसरे के प्रति चिन्ता है. पवार,पटेल और तटकरे को पंकजा से सीखना चाहिए.

First published: 24 September 2016, 7:24 IST
 
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