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भारत का राष्ट्रीय चरित्र संसदीय व्यवस्था के अनुकूल नहीं: शशि थरूर

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 January 2016, 14:35 IST

शशि थरूर का मानना है कि भारत का राष्ट्रीय चरित्र संसदीय व्यवस्था के लिए मुनासिब नहीं है. उन्होंंने यह विचार जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के अंतिम दिन यानी सोमवार को ‘ऑन अंपायर’ के नाम से आयोजित एक सेशन में दिये. वह ब्रिटिश लेबर पार्टी के सांसद ट्रिस्टम हंट और पत्रकार स्वप्न दासगुप्ता से भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के विषय में बात कर रहे थे.

समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबित कांग्रेस नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय चरित्र के हिसाब से हमारे यहां के लिए संसदीय व्यवस्था सही नहीं है लेकिन देश इसमें फंस गया है क्योंकि हम हर बात को परिभाषित करने के लिए अंग्रेजों की ओर देखते हैं.

थरूर ने कहा कि भारत जैसे बड़ी आबादी और विविधतापूर्ण देश में संसदीय प्रणाली को सही ढंग से लागू कर पाना एक कठिन कार्य है.

उन्होंने कहा, ‘भारत के राष्ट्रीय सोच के अनुकूल नहीं रहने वाली संसदीय प्रणाली के साथ हमारे फंसने की एक प्रमुख वजह यह है कि इस व्यवस्था को अंग्रेजों द्वारा चलाया गया था और हमें हर चीज को मूर्त रूप देने के लिए हमेशा अंग्रेजों की ओर देखने की आदत रही है.’

थरूर ने इस बारे में एक डायरी के अंश का जिक्र करते हुए कहा कि किस तरह भारतीय राष्ट्रवादी नेता उस समय संभल कर प्रतिक्रिया दे रहे थे, जब साइमन आयोग के सदस्य क्लीमेंट एटली ने कहा था कि हिंदुस्तान के लिए राष्ट्रपति प्रणाली बेहतर होगी.

उन्होंने कहा, ‘तत्कालीन समय में संविधान के विचार को अधिक सैद्धांतिक तरीके से तलाशने के लिए 1930 में साइमन कमीशन बनाया गया था. उस कमीशन के सदस्य क्लीमेंट एटली(जो 1947 में भारत की आजादी के समय ब्रिटेन के प्रधानमंत्री थे) ने अपनी डायरी में लिखा था कि उन्होंने भारतीय राष्ट्रवादी नेताओं को सलाह दिया था कि हिंदुस्तान के लिए राष्ट्रपति प्रणाली बेहतर होगी. उन्होंने कहा कि एटली के इस विचार पर भारतीय नेताओं ने बड़ी संभल कर प्रतिक्रिया दी थी.’

उन्होंने कहा, ‘यह जरूरी नहीं है कि देश में धरोहर संस्थानों के लिए भारत अंग्रेजों का आभारी हो. हमारी सरकार की शासन व्यवस्था ऐसी है जिसे एक छोटे द्वीप में बनाया गया जिसकी आबादी आज छह करोड़ है और प्रत्येक सांसद करीब एक लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करता है.’

थरूर ने कहा, ‘हमने संसदीय लोकतंत्र को अनेक जाति, वर्ण, रंग, संस्कृति, खानपान, आस्था, पहनावा और रिवाज वाले इस विविधतापूर्ण देश में लागू किया और इस बात कि अपेक्षा रखी कि गठबंधन सरकार की अपनी चुनौतियों के बावजूद भी यह काम करेगा. आज संसद में बैठा प्रत्येक सांसद 20 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहा है. आप इतने ज्यादा लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं कि उन सभी से प्रत्यक्ष रूप से मिलना आपके लिए संभव ही नहीं है.’

इससे पूर्व शशि थरूर अपने ऑक्सफोर्ड यूनियन की ऐतिहासिक चर्चा में यह कह चुके हैं कि ब्रिटेन द्वारा भारत को पहुंचाए गए ऐतिहासिक नुकसान की भरपाई का आर्थिक मूल्य लगाना असंभव है क्योंकि 200 से अधिक सालों तक हुआ नुकसान बहुत ज्यादा है.

First published: 26 January 2016, 14:35 IST
 
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