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सिर्फ मोदी तय नहीं करेंगे पाकिस्तान से संबंधों की दिशा, आरएसएस भी है

पाणिनि आनंद | Updated on: 10 February 2017, 1:48 IST
QUICK PILL
  • पठानकोट हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रणनीति पर सवाल उठ सकता है. हमले ने सरकार और आरएसएस के बीच रिश्तों में कड़वाहट पैदा की है.
  • आठ जनवरी को नागपुर में आरएसएस की उच्चस्तरीय बैठक होने वाली है. यहां से मोदी सरकार को कड़ा संदेश देने की उम्मीद की जा रही है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया लाहौर यात्रा और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को घर जाकर जन्मदिन की बधाई देने का मामला बीजेपी के लिए पचाना मुश्किल रहा. बीजेपी लंबे समय से दोनों देशों के संबंधों पर आक्रामक रुख अपनाती रही है.

अब पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले ने आरएसएस, पार्टी और सरकार के बीच रिश्तों को खराब किया है. हालांकि आधिकारिक रूप से सरकार और पार्टी की लाइन एक समान है. लेकिन संगठन के कई लोगों का मानना है कि मोदी ने पाक के साथ रिश्तों को सुलझाने के लिए 'गलत मार्ग' अपनाया.

निश्चित तौर पर फिलहाल मोदी को इस मुद्दे पर किसी चुनौती का सामना नहीं करना पड़ रहा है. कुछ आवाजें उठी हैं लेकिन वो 'निजी बातचीत' रह गई. संघ परिवार से जुड़े कई लोगों का मानना है कि प्रधानमंत्री की रणनीति संघ परिवार के सिद्धांतों के विपरीत है.

आठ जनवरी को नागपुर में संघ की हाईलेवल मीटिंग होने वाली है. मोदी सरकार को कड़ा संदेश देने की उम्मीद है

पार्टी से जुड़े एक सूत्र ने कैच को बताया, ' इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने अपने कदम खुद उठाए हैं. मोदी के खिलाफ बोलने से इसे उनके साथ टकराव माना जाएगा. कोई भी उनके निशाने पर नहीं आना चाहेगा. इसलिए इस मुद्दे पर सामने आकर बोलने के लिए कोई तैयार नहीं हैं.'

एक वरिष्ठ नेता ने कहा है कि आरएसएस की ओर से संदेश साफ है, 'मोदी उसी आदमी (शरीफ) से संबंध बना रहे हैं जिसने वाजपेयी को धोखा दिया है.'

Narendra Modi, Nawaz Sharif

शीतकालीन सत्र के दौरान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज वार्ता के लिए पाकिस्तान गई थीं. उनके वापसी के बाद उन्हें विपक्ष और विशेषज्ञों की कड़ी आलोचना झेलनी पड़ी. विपक्ष ने सवाल उठाया कि अगर भारत पाकिस्तान के प्रति अपनी नीति में बदलाव रहा है तो इसकी जानकारी सदन में क्यों नहीं दी गई.

बाद में सुषमा ने सदन में दिए अपने बयान में कहा कि सरकार भारत-पाक को नजदीक लाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है. उन्होंने खुशी से संसद में बताया कि पाकिस्तान में शरीफ परिवार की चार पीढ़ियों से मिलीं और उन्हें अच्छा लगा.

यह मजबूत और सकारात्मक तेवर था लेकिन आरएसएस ने इसका स्वागत नहीं किया. आरएसएस और उसकी सहयोगी संस्था के नेताओं के लिए यह निराशाजनक रहा.

आरएसएस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'अगर पाकिस्तान के प्रति नरम रवैया अपनाया जाएगा तो पठानकोट जैसे विश्वासघात के मामलों में कैसे मजबूत फैसले लिए जाएंगे? इसके अलावा नीति को पलटने में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन यह लोगों के सामने हार स्वीकार करने जैसा होगा. सरकार को जनता की धारणाओं और छवियों को लेकर अधिक सजग होनी की आवश्यकता है.'

बीजेपी नेताओं और समर्थकों की सोशल मीडिया पर आ रही प्रतिक्रिया उनकी दुविधा की ओर इशारा कर रहे हैं. अधिकतर लोगों ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी लेकिन पाक के बारे में कम शब्दों का उपयोग किया. यही लोग सुरक्षा प्रतिष्ठान की विफलताओं के लिए पिछली सरकार को जिम्मेदार मानते थे और आज जब उनकी पार्टी सत्ता में हैं तो चुप हैं.

पाकिस्तान के खिलाफ कठोर रवैया अपनाने की बात कहने वाले बीजेपी नेता अब चुप हैं

मोदी ने खुद 2014 में कहा था, 'जब तक आप पाकिस्तान को उस भाषा में जवाब नहीं देंगे, जिसे वह समझता है, तब तक इस देश से आतंकवाद को मिटाया नहीं जा सकता.' मोदी के इन भाषणों के वीडियो इन दिनों तेजी से शेयर हो रहे हैं.

विडंबना यह है कि पार्टी के अन्य नेता जो पहले मुखर रहा करते थे अब उन्हें बहुत कमजोर शर्तों पर सरकार का बचाव करना पड़ा रहा है. उनसे यह पूछा जा रहा है कि वे ऐसा कुछ क्यों नहीं कर रहे हैं जिसका वादा मोदी ने किया था.

यही वजह है कि जनता के बीच बन रही छवि को लेकर आरएसएस चिंतित नजर आ रहा है. 'पाकिस्तान को सबक सिखाने वाली नीति' की जगह दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच बन रहे मधुर संबंध बीजेपी के कैडरों को निराश कर रहा है. पार्टी के परंपरागत समर्थक हमेशा से पाकिस्तान के प्रति कठोर रुख अपनाना चाहते हैं.

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आठ जनवरी को नागपुर में आरएसएस की उच्चस्तरीय बैठक होने वाली है. यहां से सरकार को कड़ा संदेश देने की उम्मीद की जा रही है. सूत्रों के अनुसार कई कैबिनेट मिनिस्टर और बीजेपी नेता बंद कमरे में होने वाली वार्ता का हिस्सा होंगे. बैठक में राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, अमित शाह, रामलाल और राम माधव जैसे बडे़ नेताओं की आने की उम्मीद है.

स्वाभाविक तौर पर बीजेपी चिंतित है. वर्तमान समय में मोदी-शाह के धुरी वाले व्यक्तिवादी मॉडल के कारण पार्टी के कई लोग पहले से ही नाराज हैं. पठानकोट की घटना ने आग में घी डाला है जो प्रधानमंत्री के लिए अच्छा संकेत नहीं है.

First published: 6 January 2016, 8:52 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बीबीसी हिन्दी, आउटलुक, राज्य सभा टीवी, सहारा समय इत्यादि संस्थानों में एक दशक से अधिक समय तक काम कर चुके हैं.

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