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नीतीश सरकार को बड़ा झटका, पटना हाईकोर्ट ने पूर्ण शराबबंदी एक्ट को बताया गैरकानूनी

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 September 2016, 12:53 IST

बिहार की नीतीश कुमार सरकार को पटना हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी एक्ट को गैरकानूनी करार दिया है.

बिहार में 5 अप्रैल 2016 को पूर्ण शराबबंदी के फैसले पर नीतीश कैबिनेट ने मुहर लगाई थी.इस फैसले के साथ ही राज्य में तत्काल प्रभाव से विदेशी और देसी शराब की खरीद और बिक्री पर पाबंदी लग गई थी.

देसी शराब की खरीद और बिक्री पर पहले ही पाबंदी लगा दी गई थी. पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के इस नए कानून को कठघरे में खड़ा किया है. हाईकोर्ट ने बिहार में शराबबंदी के कानून को अवैधानिक बताते हुए इस पर सवाल खड़े किए हैं.

अगस्त में पारित हुआ था विधेयक

पिछले महीने विपक्ष की गंभीर आपत्तियों के बीच बिहार सरकार ने मद्यनिषेध और उत्पादन विधेयक-2016 को ध्वनिमत से पारित कर दिया. नया कानून बिहार उत्पाद (संशोधन) विधेयक 2015 की जगह लेगा. विपक्ष ने दो संशोधन प्रस्ताव पर मत विभाजन की मांग की थी जो खारिज हो गया था.

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बिहार सरकार ने मौजूदा कानून में कई ऐसे बदलाव किए थे, जो न केवल अलोकतांत्रिक बताए जा रहे थे बल्कि संविधान में दिए गए बुनियादी अधिकारों के खिलाफ भी थे. नए प्रावधानों में इसके बेजा इस्तेमाल की संभावना कई गुना बढ़ गई थी.

कठघरे में कानून के कई प्रावधान

कानून में बदलाव के बाद हालांकि सरकार ने बचपन बचाओ आंदोलन की तरफ से शराबबंदी के प्रभाव का अध्ययन कराए जाने की घोषणा की.  लेकिन कानून उसने पहले ही पास कर दिया.

1. नए कानून में जिन दमनकारी प्रावधानों को शामिल किया गया है, उनमें सबसे खतरनाक प्रावधान घर में शराब की बोतल मिलने या उसकी खपत के मामले में परिवार के सभी बालिग सदस्यों को गिरफ्तार किया जाना है. परिवार में पति, पत्नी और उनके बच्चों को रखा गया है.

2. शराब को बनाने में अगर कोई व्यक्ति वाहन, बर्तन या अन्य समान मुहैया कराता है तो उसे भी दोषी माना जाएगा.

3. कानून के तहत आरोपी पर खुद को निर्दोष साबित करने की जिम्मेदारी होगी.

4. अगर शराब कारखाने के भीतर कोई व्यक्ति शराब का इस्तेमाल करता हुआ पाया जाता है तो न केवल उसके खिलाफ बल्कि कंपनी के मालिक या फिर यूनिट हेड को भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा.

5. अगर कोई व्यक्ति अपने घर पर किसी को पीने की अनुमति देता है तो उसे कम से 8 साल जेल की सजा (इसे बढ़ाकर 10 साल भी किया जा सकता है) और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है.

6. अगर किसी के घर या परिसर में शराब की बोतल पाई जाती है तो न केवल उसे सील कर दिया जाएगा बल्कि उसे जब्त भी कर लिया जाएगा.

7. जिला कलेक्टर को पूरे गांव या लोगों के समूह पर सामूहिक जुर्माना और जेल भेजने का भी अधिकार दिया गया है.

First published: 30 September 2016, 12:53 IST
 
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