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बजट की कमी से जूझ रही है भारतीय सेना, अपने पैसों से खरीदनी पड़ सकती है वर्दी

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 June 2018, 14:09 IST

भारतीय सेना इन दिनों अतिरिक्त बजट की कमी से जूझ रही है. जिसके चलते सेना ने अपनी खरीदारी में भारी कटौती करने का फैसला किया है. सेना ने ये कटौती आपातकालीन स्थिति के लिए महत्वपूर्ण गोलाबारूद खरीदने के लिए किया है. ताकि इसके लिए सेना पैसा बचाया जा सके.

खबरों के अनुसार केंद्र सरकार ने सेना को आपातकालीन स्थिति के लिए अतिरिक्त फंड मुहैया नहीं कराया है, जिसके चलते सेना को अपनी खरीदारी में कटौती करनी पड़ रही है. सेना ने आर्डनंस फैक्ट्रीज से सप्लाई होने वाले प्रॉडक्ट्स को 94 फीसदी से कम करके 50 फीसदी करने का फैसला किया है.

नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक, सेना द्वारा अपनी खरीदारी में कटौती करने से सैनिकों को वर्दी की सप्लाई (युद्धक ड्रेस, बेरेट्स, बेल्ट्स, जूते) जैसी चीजों पर प्रभाव पड़ेगा. ऐसे में सैनिको को अपनी यूनिफॉर्म और दूसरे कपड़ों के लिए खुद ही पैसा खर्च करना पड़ेगा. सेना को अपनी यूनिफॉर्म और दूसरे कपड़े सिविलियन मार्केट से खरीदने पड़ेंगे.

इतना ही नहीं सेना की गाड़ियों के पुर्जों को लेकर मुश्किल खड़ी हो सकती है. बताया जा रहा है कि सेना आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए तीन परियोजनाओं पर काम कर रही है. ताकि इसके लिए गोलाबारूद के स्टॉक में किसी तरह की कमी नहीं आए.

खबर में कहा गया है कि सेना के अधिकारियों ने इकनॉमिक टाइम्स से बात करते हुए कहा कि सेना अपने न्यूनतम बजट में ही आपातकालीन स्थिति के लिए गोलाबारूद के स्टॉक को बनाए रखने का प्रयास कर रही है. इसके लिए सेना के पास अपने खर्च में कटौती के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं. अधिकारियों का कहना है कि सेना फंड की कमी से कई सालों से जूठ रही है. जिसके चलते आपातकालीन प्रॉजेक्ट्स प्रभावित हुए हैं. एक अधिकारी ने बताया कि इन कदमों से जून 2019 तक सेना के पास 10(1) के लेवल का 90 फीसदी गोलाबारूद मौजूद हो जाना चाहिए. जिसको एक सही स्थिति कहा जा सकता है.

सालाना 7000 से 8000 करोड़ रुपये की बचत की कोशिश

एक अधिकारी ने कहा है कि आपातकालीन स्थिति की खरीदारी के लिए 5000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं जबकि 6739.83 करोड़ रुपये का भुगतान होना अभी बाकी हैं. 10 (1) ऑर्डर के इस प्रॉजेक्ट पर अब कुल खर्च 31,739.83 करोड़ रुपये है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि सेना दो अन्य स्कीम पर भी काम कर रही है. जो केवल तीन साल के लिए हैं. ऐसे में सेना के सामने बजट को लेकर समस्या खड़ी हो गई है.

केंद्र सरकार ने भी सेना को अतिरिक्त फंड मुहैया कराने से मना कर दिया है. सरकार न कहा है कि सेना इसकी व्यवस्था अपने बजट से करो. अब सेना ने इस समस्या से निपटने के लिए अपनी खरीदारी में कटौती करने का फैसला किया है. इसके तहत ऑर्डनंस फैक्ट्रीज प्रॉडक्ट्स में कटौती करते हुए 94 फीसदी से 50 फीसदी करने का फैसला किया गया है.

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इसके तहत ऑर्डनंस फैक्ट्रीज को होने वाला भुगतान 11000 करोड़ रुपये से कम कर 8000 करोड़ रुपये के करीब लाया गया है. उन्होंने आगे कहा कि सेना के इस कदम से हर साल 3500 करोड़ रुपये की बचत होगी. इसमें 4000 करोड़ रुपये और जोड़कर इस राशि को सालाना 7000 से 8000 करोड़ रुपये तक किया जाएगा.

गौरतलब है कि 2016 में हुए उड़ी अटैक के बाद भी सेना के पास आपातकालीन स्थिति के लिए जरूरी गोलाबारूद की कमी की खबरें सामने आई थीं. सेना के पास केवल 10 दिन का जरूरी गोलाबारूद ही बचा था. तोपखाने और टैंकों के लिए 46 प्रकार के अहम गोलाबारूद, ऐंटी मटीरियल और 10 तरह के गाड़ियों के स्पेयर पार्ट्स 10 (1) के स्तर में कमी बताई गई थी.

खरीदारी में कटौती के फैसले का ऑर्डनंस फैक्ट्रीज ने किया था विरोध

सेना के इस फैसले का ऑर्डनंस फैक्ट्रीज ने विरोध किया था. इसके बाद सेना के एक अधिकारी ने ऑर्डनंस फैक्ट्रीज को अपने इस फैसले के पीछे के कारणों बारे में उनको बताया था. लेकिन आगे चलकर सरकार के लिए इससे समस्या खड़ी हो सकती है. ऑर्डनंस फैक्ट्रीज के पास सेना के कई पुराने ऑर्डर पड़े हुए हैं. वे इसको लेकर विवाद शुरू कर सकते हैं.

First published: 4 June 2018, 14:09 IST
 
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