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कौन है 'बैंडिट क्वीन' का क़ातिल शेर सिंह राणा?

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 July 2017, 14:53 IST

16 साल पहले आज ही के दिन यानी 25 जुलाई 2001 को दिल्ली के अति सुरक्षित लुटियंस जोन में बैंडिट क्वीन के नाम से मशहूर फूलन देवी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

दस्यु सुंदरी फूलन देवी का नाम बेहमई कांड के बाद पूरे देश में चर्चा में आया था, जब 14 फरवरी 1981 की शाम को कानपुर देहात के बेहमई गांव में राजपूत जाति के 22 लोगों को लाइन में खड़ा करके फूलन और उनके गैंग ने गोली से उड़ा दिया गया था. हालांकि फूलन ने बार-बार ये दावा किया कि उन्होंने एक भी शख्स की हत्या नहीं की थी.

माना जाता है कि फूलन देवी ने खुद के साथ सामूहिक बलात्कार और गांव में निर्वस्त्र करके घुमाए जाने के बाद बदले के तहत बेहमई कांड को अंजाम दिया था. श्रीराम और लालाराम गैंग से फूलन अपने अपमान का बदला लेना चाहती थीं.

बेहमई कांड के 20 साल बाद मिर्जापुर से समाजवादी पार्टी की तत्कालीन सांसद फूलन देवी की शेर सिंह राणा ने कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी. इसके 13 साल बाद 14 अगस्त 2014 को ट्रायल कोर्ट ने शेर सिंह राणा को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई. आपको बताते हैं शेर सिंह राणा के अतीत और वर्तमान के बारे में:

फूलन देवी

हत्या के तीन साल बाद तिहाड़ से फ़रार

17 मई 1976 को शेर सिंह राणा का जन्म राजस्थान में हुआ था. हालांकि राजपूत जाति से ताल्लुक रखने वाले राणा के जीवन का ज्यादातर हिस्सा उत्तराखंड के रुड़की में बीता. 25 जुलाई 2001 को दिल्ली में सरकारी आवास के सामने फूलन देवी की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई.

वारदात के दो दिन बाद  शेर सिंह राणा ने देहरादून में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. दिल्ली पुलिस के मुताबिक शेर सिंह राणा ने बेहमई में मारे गए 22 ठाकुरों की हत्या का बदला लेने के लिए फूलन देवी की हत्या की. 

पुलिस के दावे के विपरीत राणा ने अपनी किताब 'जेल डायरी' में पुलिस पर जुर्म क़ुबूल करवाने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया. इस वारदात के तकरीबन तीन साल बाद 17 फरवरी 2004 को शेर सिंह राणा दिल्ली की अतिसुरक्षित तिहाड़ जेल से फ़रार हो गए. 

हालांकि दो साल बाद 17 मई 2006 को कोलकाता के गेस्ट हाउस से दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया. राणा दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच के फर्जी अफसर के रूप में वहां रुके थे.

पृथ्वीराज चौहान की अस्थियां लाने का दावा

राणा ने बताया था कि जेल से फ़रारी के बाद वे बांग्लादेश के रास्ते अफ़ग़ानिस्तान गए थे. राणा के मुताबिक अफगानिस्तान के गजनी इलाके में हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान की रखी अस्थियों के अपमान का पता चलने से उन्हें दुख था.

दावे के मुताबिक अस्थियां वापस लाने के लिए राणा ने फरारी के बाद सबसे पहले रांची से फ़र्जी पासपोर्ट बनवाया. इसके बाद नेपाल, बांग्लादेश और दुबई के रास्ते वे अफगानिस्तान पहुंचे. राणा का दावा है कि 2005 में वह अस्थियां लेकर भारत आ गए. राणा ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी बनाया था. हालांकि उनके दावे की पुष्टि नहीं हो सकी.

शेर सिंह राणा ने अपनी मां की मदद से गाजियाबाद के पिलखुआ में पृथ्वीराज चौहान का मंदिर बनवाया है, जहां कथित रूप से उनकी अस्थियां रखी हुई हैं. शेर सिंह राणा ने 2012 में यूपी की ठाकुर बाहुल्य जेवर विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव भी लड़ा, लेकिन वह पांचवें नंबर पर रहे थे.

जहां एक ओर फूलन देवी के जीवन पर शेखर कपूर की फिल्म बैंडिट क्वीन बनी थी, वहीं शेर सिंह राणा के जीवन पर 'एंड ऑफ़ बैंडिट क्वीन' नाम की फिल्म बनी है, जिसमे शेर सिंह राणा का किरदार अभिनेता नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने निभाया है.

First published: 25 July 2017, 14:46 IST
 
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