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तस्वीरें: कोसी और कहर, एक दूसरे के पूरक हैं

अजय कुमार | Updated on: 20 July 2016, 18:48 IST
(अजय कुमार)

जैसे दिन के बाद रात का आना तय है, जैसे गर्मी के बाद बरसात का आना तय है ठीक उसी तरह बिहार के मिथलांचल और सीमांचल के कई इलाकों में बरसात के वक्त बाढ़ का आना तय है.

अजय कुमार

इस साल भी कोसी में पानी का स्तर बढ़ रहा है. स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक नदी में पानी का बहाव इस साल अभी तक के अधिकतम 233 लाख क्यूसिक के स्तर तक पहुंच गया है. सुपौल के कई गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है और इन गावों के लगभग 200 से अधिक घर बह चुके हैं.

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सरकार और प्रशासन के स्तर पर अभी कोई सक्रियता नहीं दिख रही है. ना तो बिहार सरकार ने कोई एडवाइजरी जारी की है, न ही गांवों को खाली करके जा रहे लोगों के लिए किसी वैकल्पिक सुविधा का इंतजाम किया गया है.

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यहां यह भी याद रखना चाहिए कि बिहार के इसी इलाके में 2008 कुसहा बांध के टूट जाने की वजह से बड़ी त्रासदी हुई थी. 2008 की इस त्रासदी में 7 जिलों के 30 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हुए थे और उत्तर बिहार की 3 लाख 40 हजार हेक्टेयर जमीन जल प्रलय में डूब गई थी. सरकार ने 250 लोगों की मृत्यु की पुष्टि की थी.

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एक बार फिर बिहार के इस इलाके में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. इलाके के लोग अपना घर-बार छोड़कर पलायन कर रहे हैं. हर दिन नए इलाकों में कटाव हो रहा है. किसी बड़ी त्रासदी के आ जाने के बाद हरकत में आने से बेहतर है कि पहले से तैयारी रखी जाय.

अजय कुमार

इन तस्वीरों में आप देखेंगे कि इलाके के लोग कोसी नदी के रास्ते से अपना घर-संसार हटाने की कोशिश कर रहे हैं. वो इस नदी के हवाले अपना गांव, अपने घर-आंगन करके किसी सुरक्षित जगह की तरफ जा रहे हैं.

अजय कुमार
First published: 20 July 2016, 18:48 IST
 
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