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पीएम मोदी के गुजरात में 'स्वच्छ भारत अभियान' को लगा पलीता

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 May 2016, 15:19 IST

गुजरात हाईकोर्ट ने सूरत जिले में शौचालयों के निर्माण में घोटाले के आरोप को लेकर दायर जनहित याचिका पर राज्‍य सरकार को नोटिस जारी किया है.

जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि ‘स्‍वच्‍छ भारत अभियान’ के तहत हर घर में शौचालय बनाने के नाम पर पुराने शौचालयों को नया बताया गया.

वहीं कुछ जगहों पर पहले से बने टॉयलेट्स की जगह इनका निर्माण किया गया है.इस जनहित याचिका को सूरत के कनकपुर के रहने वाले दीपक बागुल ने दायर की है. 

2010 के बाद नहीं बना नया शौचालय


याचिका में दीपक ने आरोप है कि 2010 के बाद से कोई नया टॉयलेट नहीं बना. इसके साथ ही 2006 और 2010 के बीच जो भी टॉयलेट बने उन्‍हें नया निर्माण बताया गया है. याचिका के समर्थन में आरटीआई से मिले फोटोग्राफ भी दिए गए हैं.

बागुल के वकील उत्‍पल पांचाल ने इस मामले में बताया कि कई फोटो में तो दिखता है कि टॉयलेट्स को स्‍टोर रूम की तरह इस्‍तेमाल किया जा रहा है.

सूरत में शौचालय घोटाला !


आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक आदिवासी इलाकों में कुल 423 शौचालय बनाए गए, लेकिन वहां घरों की संख्या उतनी नहीं है. बागुल ने कहा कि 2006 से 2010 के बीच कुल 355 शौचालय बनाए गए हैं.

2013 से 2015 के बीच कुल 482 टॉयलेट का नवनिर्माण हुआ है. हालांकि मांगने पर केवल 185 टॉयलेट के भुगतान की रसीद ही उपलब्ध कराई गई और केवल 272 शौचालयों की तस्‍वीरें दी गई हैं.

स्वच्छ भारत अभियान के तहत बनने वाले शौचालयों का निर्माण पूरा होने के बाद उसकी तस्‍वीर लेना जरूरी होता है.

First published: 5 May 2016, 15:19 IST
 
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