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राजद्रोह कानून के दुरुपयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 February 2017, 5:47 IST
(पीटीआई)

मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंडिया के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में राजद्रोह कानून के दुरुपयोग के खिलाफ याचिका दाखिल की गई. याचिका में दावा किया गया कि छात्रों, पत्रकारों और सामाजिक गतिविधियों में शामिल बुद्धिजीवियों के खिलाफ नियमित आधार पर राजद्रोह का मुकदमा चलाया जा रहा है.

एनजीओ कॉमन कॉज द्वारा दायर याचिका में कहा गया है ‘‘बुद्धिजीवियों, कार्यकर्ताओं, छात्रों के खिलाफ राजद्रोह के मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है. हाल में कश्मीर पर चर्चा का आयोजन करने के लिए एमनेस्टी इंडिया के खिलाफ राजद्रोह का आरोप लगाया गया है.’’

याचिका में कहा गया है, ‘‘इस संबंध में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा धारा 124 ए (राजद्रोह कानून) के दुरुपयोग का निवारण करने के लिए एक याचिका दायर की गई है. इसकी वजह से छात्रों, पत्रकारों और सामाजिक कार्य में शामिल बुद्धिजीवियों को नियमित रूप से सताया जा रहा है. यह कहा जाता है कि यह आरोप लोगों में डर पैदा करने और असहमति को दबाने के लिए लगाए जा रहे हैं.’’

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण के एनजीओ ‘कॉमन कॉज’ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि सरकारों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने भाषण एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंटने तथा गंभीर आवाजों को दबाने के लिए राजद्रोह कानूनों का गलत इस्तेमाल किया.

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया कि किसी भी सरकारी एजेंसी के लिए यह अनिवार्य किया जाए कि राजद्रोह के किसी भी मामले में किसी व्यक्ति या संगठन के खिलाफ शिकायत दर्ज करने से पहले पुलिस आयुक्त या पुलिस महानिदेशक से तर्कसंगत आदेश लिया जाए.

गौरतलब है कि 13 अगस्त को बेंगलुरू में एमनेस्टी इंडिया के एक सेमिनार में कश्मीर की आजादी और भारतीय सेना के खिलाफ नारे लगाए गए थे. भाजपा की छात्र इकाई एबीवीपी और अन्य संगठनों से मिली शिकायत और सेमिनार का वीडियो फुटेज सामने आने के बाद  बेंगलुरू पुलिस ने एमनेस्टी इंडिया के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया है.

First published: 18 August 2016, 11:21 IST
 
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