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जीते वीएस अच्युतानंदन, भारी पड़े पिनराई विजयन

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 May 2016, 16:21 IST

सीपीआईएम की केरल स्टेट कमिटी ने शुक्रवार को 72 वर्षीय पिनराई विजयन को केरल का नया मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लिया है. गुरुवार को आए चुनाव परिणाम के अनुसार लेफ्ट गठबंधन (एलडीएफ) को राज्य की कुल 140 में से 91 सीटों पर जीत मिली है.

सीपीएम पोलित ब्यूरो के सदस्य विजयन लंबे समय से केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन के राजनीतिक प्रतिद्वंदी रहे हैं. मीडिया में आई खबरों के अनुसार सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी और प्रकाश करात की मौजूदगी में हुई बैठक में जब विजयन के नाम पर मुहर लगी, तो 92 वर्षीय अच्युतानंदन बैठक छोड़कर निकल गए.

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एलडीएफ ने अच्युतानंदन के नेतृत्व में साल 2006 के विधानसभा चुनाव में जबर्दस्त जीत हासिल की थी. पिछला चुनाव एलडीएफ हार गई थी, लेकिन इसके बावजूद अच्युतानंदन को विपक्ष का नेता बनाया गया था.

इस बार केरल में चुनावी रणनीति की कमान विजयन के हाथों में थी, लेकिन अच्युतानंदन राज्य में पार्टी का चेहरा बने हुए थे. कहा जा रहा है कि चुनाव से पहले अच्युतानंदन को मुख्यमंत्री बनाने का आश्वासन दिया गया था. सूत्रों के मुताबिक नई सरकार में उन्हें मंत्री पद देने का फैसला लिया गया है.

विजयन से जुड़ी दस खास बातें:

  • विजयन 52 साल पहले 1964 में कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े. वे सीपीएम की छात्र शाखा एसएफआई के नेता रह चुके हैं
  • विजयन महज 26 साल की उम्र में 1970 में पहली बार कूथुपरम्बा सीट से विधायक चुने गए थे.

  • वह इसी सीट से 1977 और 1991 में विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं. इसके अलावा 1996 में पय्यनूर सीट से विधायक बने थे.

  • 1998 से 2015 तक विजयन तीन बार सीपीएम की केरल राज्य समिति के सचिव रह चुके हैं.

  • विजयन 1996 से 1998 के बीच केरल के ऊर्जा मंत्री रह चुके हैं. इस दौरान उन पर एसएनसी लवलीन को ठेका देने के मामले में भ्रष्टाचार का आरोप लगा. सीबीआई ने विजयन के खिलाफ मुकदमा दायर किया था, लेकिन 2013 में तिरुवनंतपुरम के स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया.

  • विजयन ने इस विधानसभा चुनाव में कन्नूर जिले के धर्मडम सीट से करीब 37 हजार वोट से जीत हासिल की है.

  • विजयन 2002 से सीपीएम पोलित ब्यूरो के सदस्य बने हुए हैं.

  • विजयन से 2009 में राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री अच्युतानंदन का विवाद हुआ, जिसके बाद अच्युतानंदन को सीपीएम की सर्वोच्च ईकाई पोलित ब्यूरो से बाहर निकाल दिया गया था.
  • विजयन को हमेशा सीपीएम के पूर्व महासचिव प्रकाश करात का नजदीकी माना जाता रहा है. करात के रहते उन्हें कई बार पार्टी में अच्युतानंदन पर तरजीह मिलती रही है.

  • अच्युतानंदन के पहले कार्यकाल (2006-11) के दौरान विजयन के साथ अक्सर उनका मतभेद हो जाता था, जिससे पार्टी को अक्सर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता था.

  • अच्युतानंदन को सीपीएम के सहयोगी दल अधिक पसंद करते हैं लेकिन पार्टी और संगठन पर विजयन का दबदबा है.

First published: 20 May 2016, 16:21 IST
 
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