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Pitru Paksha 2020: पितृपक्ष में इन बातों का रखें खास ध्यान, भूलकर भी नहीं करने चाहिए ये काम

कैच ब्यूरो | Updated on: 31 August 2020, 14:56 IST

शास्त्रों के मुताबिक श्राद्ध पक्ष भाद्रमास की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलता है. ऐसी मान्यता है कि मृत्यु के देवता यमराज श्राद्ध पक्ष में पितरों को मुक्त कर देते हैं, ताकि वो स्वजनों के यहां जाकर तर्पण ग्रहण कर सकें. कहते हैं कि श्राद्ध के इन दिनों में पितृ अपने घर आते हैं. इसलिए उनकी परिजनों को उनका तर्पण करना चाहिए.

पितृों के समर्पित इन दिनों में हर दिन उनके लिए खाना निकाला जाता है. इसके साथ ही उनती तिथि पर ब्रह्माणों को भोज कराया जाता है. इन 15 दिनों में कोई भी शुभ कार्य जैसे गृह प्रवेश, शादी विवाह नहीं कराए जाते हैं. इसके साथ ही इन दिनों में न कोई नया कपड़ा खरीदा जाता है और नही पहना जाता है. पितृ पक्ष में लोग अपने पितरों के तर्पण के लिए पिंडदान, हवन भी कराते हैं.


श्राद्ध के दिन तर्पण करना बहुत जरूरी है. तर्पण 11 बजे से 12 बजे के बीच दोपहर में करना चाहिए. काला तिल, गंगा जल, तुलसी और ताम्रपत्र से तर्पण करना चाहिए. इस जिन पितरों की पसंद का भोजन बनवाया चाहिए.

गाय और कोए के लिए ग्रास निकालना चाहिए. इसके अलावा ब्रह्ममण को दान दक्षिणा देनी चाहिए. इस दिन तिल, स्वर्ण, घी, वस्त्र, गुड़, चांदी. पैसा, नमक और फल का दान करना चाहिए.वहीं अगर जिन पितरों के देहावसान की तारीख नहीं पता उनता तर्पण आश्विन अमावस्या को किसी पितृ की

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नहीं करने चाहिए ये काम-

मान्यता है कि जो लोग अपने पूर्वजों का श्राद्ध या तर्पण करते हों उन्हें पितृ पक्ष में 15 दिन तक अपने बाल नहीं कटवाने चाहिए. माना जाता है कि ऐसा करने से पूर्वज नाराज हो सकते हैं.इसी के साथ ये भी कहा जाता है कि पितृ पक्ष में पूर्वज किसी भी वेष में अपना भाग लेने आ सकते हैं. इसलिए दरवाजे पर कोई भिखारी आए तो इसे खाली हाथ नहीं लौटाना चाहिए. इन दिनों किया गया दान पूर्वजों को तृप्ति देता है.

पिृत पक्ष में पीतल या तांबे बर्तन में ही पूजा, तर्पण आदि लिए इस्तेमाल करना चाहिए. लोहे के बर्तनों की मनाही है. लोहे के बर्तनों को अशुभ माना जाता है. कहा जाता है कि पितृ पक्ष के दिन भारी होते हैं ऐसे में कोई नया काम या नया समान नहीं खरीदना चाहिए. जैसे कपड़े, वाहन, मकान आदि.

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First published: 31 August 2020, 14:56 IST
 
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