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पाक से सिंधु जल समझौते की समीक्षा के लिए पीएम मोदी ने बुलाई अहम बैठक

कैच ब्यूरो | Updated on: 26 September 2016, 9:12 IST

उरी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सिंधु जल समझौते पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते पर आज एक अहम बैठक बुलाई है.

56 साल पहले भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों के जल बंटवारे से जुड़ा ये समझौता हुआ था. केंद्र सरकार पर उरी आतंकी हमले के बाद से कार्रवाई का दबाव बढ़ा . हालांकि जानकार मानते हैं कि सिंधु समझौता तोड़ना इतना आसान नहीं है.

सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री सिंधु जल समझौते को लेकर अधिकारियों के साथ हर पहलू पर मंथन करने वाले हैं. बैठक के दौरान वॉटर ट्रीटी के फायदे और नुकसान पर भी विचार-विमर्श होगा.

चूंकि यह एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है, लिहाजा इस बारे में कोई भी कदम जल्दबाजी में नहीं उठाया जा सकता है. बैठक में प्रधानमंत्री को समझौते की हर बारीकी के बारे में जानकारी दी जाएगी.

दरअसल विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप के एक बयान के बाद सिंधु जल समझौते को रद्द करने की सुगबुगाहट तेज हो गई थी. गुरुवार को स्वरूप ने कहा था कि कोई भी समझौता आपसी भरोसे और विश्वास से चलता है.

हाल ही में वरिष्ठ भाजपा नेता यशवंत सिन्हा ने भी सरकार से इस समझौते को रद्द करने का कदम उठाने की बात कही थी. कराची में सिंधु समझौता वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ था.

इस समझौते के तहत पाकिस्तान को झेलम, चेनाब और सिंधु नदी का 80 फीसदी पानी मिलता है. यह समझौता एक तरह से पाकिस्तान के लिए जीवन रेखा है. वहां की खेती इस समझौते पर निर्भर है. सिंधु जल समझौते को दुनिया के इतिहास में सबसे उदार समझौतों में से एक माना जाता है.

First published: 26 September 2016, 9:12 IST
 
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