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2021 तक गरीबों को नहीं मिल पाएगा उनके 'सपनों का घर', ये है वजह

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 April 2018, 10:55 IST

प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना जिसके अंतर्गत गरीबों के लिए 25 लाख मकान बनाने का वादा किया गया था, खतरे में पड़ गयी है. लैंड पूलिंग एक्ट में देरी और बार बार पॉलिसी बदलने से अब सस्ते मकान बनाने का सपना खटाई में पड़ता दिख रहा है. किसानों का आरोप है कि लैंडपूलिंग एक्ट में बदलाव करके बड़े बिल्डरों को फायदा पहुंचाने की कोशिश हो रही है.

65 हजार एकड़ जमीन पर बनने हैं सस्ते मकान

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, बाहरी दिल्ली में इस तरह की करीब 65 हजार एकड़ जमीन पर लैंड पूलिंग एक्ट के तहत सस्ते मकान बनने हैं. 2013 में नोटिफीकेशन भी हुआ. पिछले साल दिल्ली सरकार ने करीब 70 गांवों को शहरी गांव का दर्जा देकर लैंड पूलिंग एक्ट लागू करने के रास्ते भी खोल दिए, लेकिन लैंड पूलिंग एक्ट अभी कागजों में ही है.

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अभी हाल में लैंड पूलिंग एक्ट में बदलाव करने से पांच एकड़ से कम जमीन वाले किसानों को नुकसान झेलना पड़ सकता है. लैंड पूलिंग एक्ट में इन बदलावों से किसान नाराज है. मसलन 70 फीसदी जमीन एक साथ होनी चाहिए. पांच एकड़ से कम जमीन वाले किसान लैंड पूल नहीं कर सकते है. भूमि विकास शुल्क के नाम पर किसानों से करोड़ों रुपए वसूले जाएंगे और कंसोर्टियम बनाकर ही जमीन लैंड पूल की जा सकती है.

किसानों में नाराजगी
लैंड पूलिंग एक्ट में हो रही देरी से किसान नाराज हैं. इसी के चलते बीजेपी सांसद उदित राज भी मंत्रालय को चिट्टी लिखकर नाराजगी जता चुके हैं. लैंड पूलिंग एक्ट के तहत छोटे किसान मिलकर एक बड़ी जमीन का खाका डीडीए को देते और वो वहां आधारभूत ढांचा खड़ा करके मकान बनाने को मंजूरी देता.

लेकिन अब नियम ऐसे बना दिए गए जिससे छोटे किसानों को अपनी जमीन बड़े बिल्डरों को देना मजबूरी होगी और इसकी निगरानी के बंदोबस्त न होने से कई तरह के फ्रॉड होने की गुंजाइश भी बनी रहेगी. फिलहाल लैंड पूलिंग अभी ठन्डे बस्ते में हैं. देखना ये है कि मोदी जी की ये योजना कब तक पूरी हो पाती है, मकानों को कब तक बनाया जायेगा.

First published: 5 April 2018, 10:55 IST
 
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