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मोदी ने रचा इतिहास, अरब सागर में आईएनएस विक्रमादित्य पर की कॉन्फ्रेंस

कैच ब्यूरो | Updated on: 15 December 2015, 19:51 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इतिहास रचते हुए तीनों सेनाओं के प्रमुखों और रक्षा मंत्री के साथ कोच्चि के पास अरब सागर में युद्धपोत आईएनएस विक्रमादित्य में संयुक्त कमांडर्स कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया. साथ ही प्रधानमंत्री ने आईएनएस विक्रमादित्य में होने वाली कॉन्फ्रेंस से पहले तीनों सेनाओं का गार्ड ऑफ ऑनर भी लिया.

सम्मेलन में मोदी के साथ रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार अजीत डोभाल, रक्षा सचिव जी मोहन कुमार, थल सेनाध्यक्ष जनरल दलबीर सिंह, वायु सेनाध्यक्ष चीफ एयर मार्शल अरूप राहा और नौसेना प्रमुख एडमिरल आरके धवन भी शामिल रहे. ऐसा पहली बार हुआ है जब यह सम्मेलन समुद्र के बीच में हुआ. 

इस दौरान जल, थल और वायु सेना के प्रमुखों ने सुरक्षा को लेकर हिंदुस्तान की आतंरिक और बाहरी समस्याओं और चुनौतियों के बारे में चर्चा की. साथ ही अपनी तैयारियों और भविष्य की योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी. 

प्राप्त जानकारी के मुताबिक मोदी सुबह 8:50 बजे आईएनएस गरुड़ पर सवार हुए और फिर समुद्र तट से 40 नॉटिकल मील दूरी पर स्थित अत्याधुनिक विमान वाहक जंगी जहाज विक्रमादित्य पर आयोजित होने वाली कमांडर कॉन्फ्रेंस के लिए 9:30 बजे पहुंचे. यहां सम्मेलन को संबोधित करने के बाद उन्होंने सुरक्षा और सामरिक नीति पर चर्चा की. यहां से दोपहर करीब 2:00 बजे मोदी कोल्लम के लिए रवाना हो गए. 

गौरतलब है कि पिछली कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी ने इस सम्मेलन को युद्धपोत, एयरबेस या सैन्य छावनी पर किए जाने की बात कही थी. जिसके बाद इसे आईएनएस विक्रमादित्य पर आयोजित किया गया.

आईएनएस विक्रमादित्य

हिंदुस्तान के आधुनिकतम जंगी जहाज या युद्धपोत आईएनएस विक्रमादित्य को 14 जून 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को समर्पित किया. विक्रमादित्य अपने नाम के अनुरूप यानी सूर्य की तरह प्रकाशवान नजर आ रहा था. इसमें इतनी ऊर्जा पैदा होती है कि यह अकेले ही किसी छोटे-मोटे शहर को अपनी रोशनी से प्रकाशित कर सकता है. 

ins vikramaditya

अब यह भारतीय नौसेना का प्रमुख जंगी जहाज है जो देश की 7000 किलोमीटर लंबी समुद्री सीमा की रक्षा के लिए तैनात है. 30 नॉट या 56 किलोमीटर प्रतिघंटे की अधिकतम रफ्तार वाला यह युद्धपोत एक-630 तोप और 8 ब्रह्मोस मिसाइल से लैस है. जबकि इसपर लगीं बराक मिसाइलें दुश्मन विमानों से रक्षा करती हैं. 

नौसेना का यह अब तक का सबसे बड़ा युद्धपोत है जिसे समंदर में तैरता एक छोटा शहर भी कहा जा सकता है. एक बार पूरा ईंधन भर जाने पर यह डेढ़ माह तक समुद्र में रह सकता है.

First published: 15 December 2015, 19:51 IST
 
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