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हर साल 5 दिन जंगल में बिताते थे PM मोदी, RSS दफ्तर में धुलते थे बर्तन

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 January 2019, 14:26 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक लोकप्रिय फेसबुक पेज को दिए इंटरव्यू में युवाओं को मार्गदर्शित करने के लिए अपने जीवन के अनुभवों को साझा किया है. पहले भी पीएम मोदी युवाओं को बेहतर जीवन मूल्यों को अपनाने के लिए सलाह दे चुके हैं. लोकप्रिय फेसबुक पेज 'द ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे' को इसी बाबत पीएम मोदी ने एक इंटरव्यू दिया. इस इंटरव्यू में उन्होंने अपने बीते जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि वह हर साल दिवाली के मौके पर पांच दिनों के लिए जंगल में चले जाते थे. उन्होंने कहा कि वह ऐसी जगह पर जाते थे जहां केवल स्वच्छ जल होता था और कोई नहीं.

प्रधानमंत्री ने आगे बताया, ''यही कारण है कि मैं सभी लोगों से खासकर अपने युवा दोस्तों से अनुरोध करता हूं कि वे अपनी भागमभाग एवं अति व्यस्त वाली जिंदगी से कुछ समय अपने लिए निकालें...वे अपने बारे में सोचें और आत्मचिंतन करें. ऐसा करने से आपकी सोच बदल जाएगी. आप खुद को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे.''

जीवन को बेहतर मूल्यों के साथ जीने के गुर बताते हुए पीएम मोदी ने कहा, ''ऐसा करने पर आप सही अर्थों में जीना शुरू कर देंगे. इससे आप में ज्यादा भरोसा आएगा और आपके बारे में कोई क्या कहता है इसका आप पर असर नहीं होगा. आप यदि इस बात को अपने जीवन में उतारते हैं तो भविष्य में आपको इसका लाभ मिलेगा. मैं हर एक से सिर्फ यही कहना चाहता हूं कि आप खास हैं और आपको प्रकाश के लिए बाहर झांकने की जरूरत नहीं है...यह आपके भीतर पहले से मौजूद है.''

इस फेसबुक पेज को दिए इंटरव्यू में पीएम ने अपने बचपन के बारे में कई कहानियां शेयर कीं. पीएम मोदी ने बताया कि वह कैसे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रति आकर्षित हुए. इतना ही नहीं उन्होंने अपनी दो साल की हिमालय यात्रा के बारे में भी बताया जो उन्होंने 17 साल की उम्र में की थीं. 'द ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे' के फेसबुक पेज पर मंगलवार को पोस्ट किए गए इस इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने हिमालय से लौट कर आने के बाद के अपने जीवन में आए बदलावों का भी जिक्र किया.

 

पीएम मोदी ने कहा, ''हिमालय से लौटने के बाद यह एहसास हो गया कि मुझे लोगों की सेवा में लगना है. हिमालय से लौटने के थोड़े दिनों बाद मैं अहमदाबाद चला गया. यहां एक बड़े शहर का मुझे पहला अनुभव हुआ. भागमभाग वाली जिंदगी बिल्कुल अलग होती है. मैं यहां कभी-कभी अपने चाचा की कैंटीन में मदद किया करता था.''

जंगल में समय बिताने के अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा, ''इस बारे में बहुत कम लोग जानते हैं कि दिवाली के मौके पर मैं पांच दिनों के लिए जंगल में कहीं चला जाता था. इस स्थान पर केवल स्वच्छ जल होता था और कोई नहीं. मैं इन पांच दिनों के लिए अपने लिए पर्याप्त खाना लेकर जाता था. यहां कोई रेडियो अथवा समाचार पत्र नहीं होते थे. इस दौरान कोई टीवी अथवा इंटरनेट नहीं होता था.''

First published: 23 January 2019, 14:26 IST
 
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