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दलित और राष्ट्रवाद के दोपहिए पर दौड़ेंगे यूपी में मोदी

पाणिनि आनंद | Updated on: 6 April 2016, 8:40 IST

मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली से सटे नोएडा में स्टैंड अप इंडिया योजना का शुभारंभ किया. इस मौके पर उन्होंने 5100 ई-रिक्शा भी वितरित किए और दलितों, पिछड़ों, गरीबों के हित में काम करने के अपने संकल्प को भी दोहराया. लेकिन सरकारी विज्ञप्तियों की इस भाषा से परे ऐसा बहुत कुछ है जो प्रधानमंत्री के नोएडा जाने के मूल में है.

प्रधानमंत्री की नज़र उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव पर है. अगले एक वर्ष से भी कम समयावधि में सूबे में चुनाव होने हैं और भाजपा से भी ज़्यादा मोदी के लिए ये चुनाव निर्णायक साबित होने वाले हैं. ऐसे समय में जब उत्तर प्रदेश में भाजपा अभी तक आंतरिक संकटों और अनिर्णय से गुज़र रही है, मोदी ने अपना बिगुल नोएडा में फूंक दिया है.

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मोदी का सारा ध्यान दलितों पर केंद्रित है. पिछले दिनों राज्य कार्यकारिणी की बैठक में संकेत दिया जा चुका है कि दलित भाजपा की रणनीति का प्रमुख हिस्सा हैं और दलितों को तोड़कर अपनी तरफ लाना उनके एजेंडे का प्रमुख बिंदु है. इसी की आभा मंगलवार को प्रधानमंत्री के भाषण में भी दिखाई दी.

प्रधानमंत्री के मंच पर अतिथियों की एक बड़ी भीड़ जमा थी. इसमें भाजपा के डेढ़ दर्जन सांसद भी थे जिनमें से अधिकतर दलित थे. ऐसे मंत्री भी कार्यक्रम में शामिल हुए जो दलित वर्ग से आते हैं. यही स्थिति विधायकों की भी रही. जिन लोगों को ई-रिक्शा वितरित किया गया, उनमें से एक बड़ी तादाद दलितों की ही थी. यहां तक कि दलित चेम्बर ऑफ़ कॉमर्स के संस्थापक मिलिंद कामले भी मंच पर मोदी के साथ मौजूद थे और मोदी उनका ज़िक्र बार-बार अपने भाषण में कर रहे थे.

प्रधानमंत्री मोदी की नज़र उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव पर है

मंच के एक तरफ बाबू जगजीवन राम का एक बड़ा सा चित्र लगाया गया था. मोदी ने स्टैंड अप इंडिया स्कीम को लॉन्च करने के लिए जगजीवन राम की जन्मतिथि को चुना. मंच पर पहुंचे तो उनके चित्र पर पुष्पांजलि दी और अपने भाषण की शुरुआत जगजीवन राम को याद करते हुए की.

प्रधानमंत्री ने कहा, “मुझे नहीं ध्यान आता कि कभी किसी सरकार ने बाबू जगजीवन राम की जन्मतिथि पर आज से पहले कोई योजना शुरू की हो. हम पार्टी और विचारधारा से ऊपर उठकर ऐसे लोगों को याद करते हैं जिन्होंने राष्ट्रनिर्माण में अपना योगदान दिया है. अफसोस है कि ऐसे नायकों के इतिहास को जानबूझकर भुलाया जाता रहा है.”

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हालांकि मोदी ने जगजीवन राम के बारे में जिस बात का उल्लेख किया वो यह थी कि उन्होंने हमेशा योग्यता और मेरिट को ही अवसरों के लिए चुना और कभी मेरिट से पीछे नहीं हटे. मोदी की निगाह जगजीवन राम के बहाने कांग्रेस से उनका दलित चेहरा छीनने पर थी.

दूसरी बात यह कि मोदी वर्तमान में देश की सबसे बड़ी दलित नेता और उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी मायावती के गृहजनपद में ये कार्यक्रम कर रहे थे. ऐसे में दलितों को केंद्र में रखकर उन्होंने दलित वोटबैंक की दावेदार दोनों पार्टियों, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस, को अपने निशाने पर लिया.

पीएम मोदी ने स्टैंड अप इंडिया स्कीम को लॉन्च करने के लिए जगजीवन राम की जन्मतिथि को चुना

प्रधानमंत्री का 30 मिनट का भाषण पूरी तरह से दलितों पर केंद्रित था. दरअसल, उन्हें पता है कि भाजपा के लिए सूबे में इस वक्त सबसे बड़ी चुनौती मायावती और उनकी बहुजन समाज पार्टी है. उसके अकाट्य वोट बैंक को तोड़े बिना भाजपा के लिए आगे बढ़ पाना बहुत मुश्किल है.

2014 की मोदी लहर का बुखार अब सूबे और देश से छंटता जा रहा है और एकतरफा वोटिंग की स्थिति दूर दूर तक नहीं है. ऐसे में दूसरों के वोटबैंक में सेंध मारे बिना मोदी 2014 के 73 सीटों के आंकड़े को दोहरा नहीं सकते.

मोदी ने नोएडा के अपने भाषण के माध्यम से सूबे के लिए अपने अभियान का बिगुल फूंक दिया है. ऐसे समय में, जब पार्टी किसी एक चेहरे पर सूबे में आमराय बनाकर चलती नज़र नहीं आ रही है, मोदी ने खुद को दलितों का मसीहा दिखाने की कोशिश तो की ही है, साथ ही यह स्पष्ट कर दिया है कि उनके लिए यह चुनाव बहुत अहम है और इसकी कमान कमोबेश उनके हाथों में रहनेवाली है.

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अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “हमने देश के अमीरों की गरीबी देख ली. वो बैंकों से रुपए लेकर भाग गए हैं. लेकिन गरीबों की अमीरी देखिए कि उन्होंने जन-धन योजना के तहत जीरो बैलेंस वाले खाते भी पैसे देकर खुलवाए.”

मोदी ने न तो सीधे तौर पर विजय माल्या का नाम लिया और न ही पनामागेट का ज़िक्र किया. लेकिन ग़रीबों को ईमानदार और महान बताते हुए उनके दिलों में पैठ भी बनाई और तालियां भी बटोरीं.

मोदी ने कहा कि जिन लोगों को ई-रिक्शा दिए गए हैं, वो उनसे उनके बच्चों की शिक्षा की भीख मांगने आए हैं. बच्चों को पढ़ाएं. खासकर बेटियों को ज़रूर पढ़ाएं. लेकिन बाकी के समय मोदी के भाषण में जो बातें सामने आती रहीं वो वर्ष 2014 के लाल किले के भाषण से लेकर अबतक के कई भाषणों में कही गई बातों की पुनरावृत्ति ही थीं.

पीएम मोदी ने न तो सीधे तौर पर विजय माल्या का नाम लिया और न ही पनामागेट का ज़िक्र किया

मोदी दलितों पर अपना सारा ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. लेकिन ऐसा नहीं है कि अपने चुनाव अभियान के सारे घोड़े उन्होंने एक दिशा में ही खोले हैं. नौ अप्रैल को मोदी बुंदेलखंड में सूखे की स्थिति और किसानों की दुर्दशा के संकट पर दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक करने वाले हैं. इस तरह मोदी के एजेंडे में अब उत्तर प्रदेश अक्सर दिखाई दे तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी.

हालांकि मोदी के इस कार्यक्रम को लेकर नोएडा में जनजीवन काफी प्रभावित रहा. मंच के सामने एक बड़े पंडाल में काफी खुले ढंग से कुर्सियां लगाई गईं थीं लेकिन सारी कुर्सियां नहीं भरी जा सकीं. भाषण खत्म करने के बाद मोदी ई-रिक्शाओं को झंडा दिखाकर रवाना कर रहे थे. लेकिन इस दौरान लोगों ने पंडाल छोड़ना शुरू कर दिया था. ऐसी कई बातें भाजपा की सूबे में ज़मीनी पकड़ के सच को सामने ला देती हैं.

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एक और बात जो मोदी की इस सभा में ग़ौर करने लायक थी, वो थी उनके भाषण की शुरुआत और आखिर में भारत माता की जय वाले नारे. मोदी राष्ट्रवाद और हिंदुत्व के दोपहिए पर बैठकर सूबे में अपना सूरज चमकाना चाहते हैं. भारत माता की जय और दलितों को जोड़ने का नारा भाजपा और मोदी की भावी रणनीति का मूल तत्व है. इसी पर चलकर वो दलित-मुस्लिम एकता को तोड़ेंगे भी और दलितों को अपने साथ जोड़ेंगे भी.

First published: 6 April 2016, 8:40 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

Senior Assistant Editor at Catch, Panini is a poet, singer, cook, painter, commentator, traveller and photographer who has worked as reporter, producer and editor for organizations including BBC, Outlook and Rajya Sabha TV. An IIMC-New Delhi alumni who comes from Rae Bareli of UP, Panini is fond of the Ghats of Varanasi, Hindustani classical music, Awadhi biryani, Bob Marley and Pink Floyd, political talks and heritage walks. He has closely observed the mainstream national political parties, the Hindi belt politics along with many mass movements and campaigns in last two decades. He has experimented with many mass mediums: theatre, street plays and slum-based tabloids, wallpapers to online, TV, radio, photography and print.

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