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Facebook, Twitter छोड़ने की घोषणा के बाद पीएम मोदी के इस प्लान की है चर्चा

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 March 2020, 9:07 IST

सोशल मीडिया मंचों पर बेहद एक्टिव रहने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक ट्वीट ने फेसबुक, ट्विटर पर खलबली मचा दी है. पीएम मोदी ने सोमवार को एक ट्वीट कर कहा कि “इस रविवार को फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स देने की सोच रहा हूं. आप सभी को जानकारी दी जाएगी." पीएम मोदी के ट्विटर पर 53.3 मिलियन (5.3 करोड़), इंस्टाग्राम पर 35.2 मिलियन (3.5 करोड़), YouTube पर 4.51 मिलियन (45 लाख) और फेसबुक पर 44.73 मिलियन (4.4 करोड़) फॉलोवर हैं. सोशल मीडिया पर वह सबसे लोकप्रिय विश्व नेताओं में से एक हैं. पीएम मोदी इन मंचों का राजनीतिक प्रचार के लिए इसका उपयोग करने में अग्रणी रहे हैं.

पीएम यदि के इस ट्वीट का कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने जवाब दिया. राहुल गांधी ने ट्वीट किया "नफरत छोड़िये, सोशल मीडिया अकाउंट नहीं." राहुल गांधी के ट्वीट पर त्रिपुरा के मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बिप्लब कुमार देब की तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त दी, उन्होंने जवाब दिया बिप्लब देब ने कहा वह इसलिए कह रहे हैं क्योंकि सोनिया गांधी का कोई सोशल मीडिया अकॉउंट नहीं है. मोदी की इस घोषणा ने सबको चौंका दिया है.

2014 में फेसबुक के सीईओ मार्क जुकरबर्ग भारत आए और देश में डिजिटल विस्तार पर चर्चा की. 2015 में पीएम एक टाउन हॉल के लिए फेसबुक मुख्यालय गए, जहां उन्होंने अपने दिवंगत पिता और बुजुर्ग मां की चर्चा की थी. इस दौरान पीएम मोदी की आंखो में आंसू आ गए थे. इससे पहले पीएम मोदी देशभर के रेलवे स्टेशनों में वाईफाई हॉटस्पॉट फैलाने वाली परियोजना का उद्घाटन करने के लिए Google के सीईओ सुंदर पिचाई से भी मुलाकात कर चुके हैं. 2018 में पीएम ने दिल्ली में ट्विटर के सीईओ जैक डोर्सी से भी मुलाकात की.

क्या है चर्चा 

कई दिनों से ऐसी चर्चा है कि भारत अपना सोशल मीडिया प्लेटफार्म शुरू करने जा रहा है. क्योंकि फेसबुक, ट्विटर सहित बड़ी कंपनियों के लिए भारत सबसे बड़ा बाजार है. ये कंपनियां भारत में करोड़ों की कमाई करती हैं लेकिन बीते दिनों फेक न्यूज़ के कारण इनकी साख को नुकसान पहुंचा है. जानकारों का मानना है सोशल मीडिया कंपनियों को डर है भारत भी अगर ऐसा कोई प्लेटफार्म शुरू करता है तो उनकी लोकप्रियता को गहरा नुकसान पहुंचेगा.  

माना जाता है कि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी की जीत का सबसे बड़ा श्रेय सोशल मीडिया को जाता है. मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा पहली पार्टी थी जिसने अपना संदेश फैलाने के लिए राष्ट्रीय स्तर तक आईटी सेल बनाया. भाजपा सांसदों और मुख्यमंत्रियों के साथ अपनी बैठकों में मोदी ने जोर देकर कहा कि वे जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़ने और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में दक्षता में सुधार के लिए ट्विटर और फेसबुक अकाउंट का इस्तेमाल करें.

साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के सभी नेताओं ने ट्विटर पर अपने नामों के आगे 'चौकीदार लगा दिया था. जानकारों का कहना है कि पीएम मोदी अगर सोशल मीडिया से अलविदा कहते हैं तो यह फेसबुक और ट्विटर जैसे प्लेटफार्म के लिए बड़ा झटका होगा. ऐसी भी चर्चा है कि पीएम मोदी अब सिर्फ नमो ऐप से जनता से जुड़ सकते हैं.

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First published: 3 March 2020, 9:07 IST
 
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