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कठुआ-उन्नाव रेप केस: बहुत हुआ नारी पर वार, अबकी बार मोदी सरकार निकला जुमला !

आकांक्षा अवस्थी | Updated on: 19 April 2018, 15:08 IST

'बहुत हुआ नारी पर वार अबकी बार मोदी सरकार' साल 2013 में जब नरेंद्र मोदी भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद के दावेदार बनाए गए थे तो उन्होंने देशभर में इस नारे के साथ खूब प्रचार किया था. तब बीजेपी ने महिलाओं पर हो रहे अत्याचार के मुद्दे को खूब उछाला था. बीजेपी ने एक पोस्टर जारी किया था जिसमें लिखा था बहुत हुआ नारी पर वार अबकी बार मोदी सरकार. इस पोस्टर और इसके ऐड के जरिए बीजेपी ने महिलाओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया था.

उसी समय देश में निर्भया बलात्कर की वजह से लोगों का गुस्सा चरम पर था जिसकी वजह से इस प्रचार का प्रभाव भी खूब पड़ा था. लेकिन आज मोदी सरकार के चार साल बीतने के बाद देश में जिस तरह का माहौल है उसे लेकर सरकार पर सवाल उठ रहे है. ऐसे में पीएम मोदी ने लंदन में कहा की बलात्कार बलात्कार होता है उस पर सियासत नहीं होनी चाहिए.

लेकिन उनके इस व्यक्तव्य में खुद ही सिसायत रिसती नजर आ रही है. जब देश कठुआ और उन्नाव गैंगरेप की हैवानियत पर आक्रोशित था उस वक़्त भारत के प्रधानमंत्री होने के नाते मोदी जी की तरफ से कोई बयान नहीं आया. बड़े बड़े सेलिब्रिटीज के जन्मदिन तक पर ट्वीट करने वाले देश के प्रधानमंत्री इन मुद्दों पर खामोश रहे और विदेश में जाकर देश की खस्ता हालत पर खुद ही सियासत कर बैठे. निर्भया बलात्कार कांड के बाद, चुनावों में बड़े-बड़े होर्डिंग्स के साथ, बहुत हुआ नारी पर वार का नारा सिसायत ही तो था?

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नारी सम्मान को नारी अस्मिता को बीजेपी ने बहुत बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया. मौजूदा सरकार को घेरने में कोई कमी नहीं छोड़ी गयी. देश को ये आश्वासन दिलाया गया कि सत्ता में आते ही देश में महिलाओं पर हो रहे अत्याचारों से सख्ती से निपटा जायेगा. मगर यहां अगर आंकड़ों की बात करे तो तो ये सारे दावे महज चुनावी वादे ही नजर आते है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2012 में 24,923 रेप के मामले दर्ज हुए. 2013 में ये संख्या बढ़कर 33,707 हो गयी. 2014 में यानी बीजेपी की सत्ता में रेप केस की संख्या और भी बढ़कर 36,735 हो गयी. 2015 में इसमें कुछ कमी आयी फिर भी मामले 34,651 दर्ज हुए और 2016 में एक बार फिर रेप के मामले 38,947 दर्ज हुए जो कि 2012 से अब तक का सबसे ज्यादा आंकड़ा है.

ये आंकड़े ही दिखाते हैं नारी सम्मान और नारी सुरक्षा चुनावी होर्डिंग्स के पीछे ही रह गयी. सिर्फ इतना ही नहीं सत्ता में आने के बाद भी सरकार की इस मुद्दे पर असंवेदनशीलता या यूं कहा जाये कि निष्क्रियता इस बात से देखी जा सकती है कि निर्भया बलात्कार काण्ड को चुनावी जुमलों के रूप में इस्तेमाल करने के बाद निर्भया फण्ड में ही कटौती की गयी. आंकड़ों के अनुसार 2013 में निर्भया फण्ड 1 हजार करोड़ था. 2014-2015 में भी ये फंड 1 हजार करोड़ रहा. जबकि यही फण्ड 2015-16 में निल था, यानी शून्य था.

 

2017 में ये फण्ड घट कर 550 करोड़ रह गया.और अब 2018 में ये फंड मात्र 500 करोड़ तक पहुंच गया है. हाल ही के मुद्दों की बात करें तो जम्मू कश्मीर सरकार में शामिल बीजेपी के दो मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा क्योंकि वे बलात्कार के आरोपियों के समर्थन में हुए प्रदर्शन में शामिल हुए. इस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और उनके खिलाफ मुकदमा शुरू हो गया है.

दूसरी तरफ, उत्तर प्रदेश के उन्नाव में एक किशोरी का बलात्कार करने के आरोप खुद एक बीजेपी विधायक पर लगे हैं. जब मोदी 2014 में केंद्र की सत्ता में आए तो उन्होंने नारा दिया था, "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ." लेकिन अब एक के बाद एक बलात्कार की घटनाओं के मद्देनजर यह नारा खोखला नजर आता है. कठुआ और उन्नाव रेप को लेकर जारी बहस के बीच रविवार को प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य गुजरात में भी पुलिस को एक बच्ची का शव मिला है. उसकी हत्या करने से पहले उसका बलात्कार किया गया था.

भारत में बलात्कार पीड़ितों में 40 फीसदी बच्चे होते हैं. 2016 में देश भर में बलात्कार के 40 हजार मामले दर्ज किए गए जो 2012 के मुकाबले 60 प्रतिशत ज्यादा हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले दिनों कहा कि जो भी दोषी होंगे उन्हें बख्शा नहीं जाएगा. कई दिनों की चुप्पी के बाद उन्होंने उन्नाव और कठुआ के मामलों पर अपना यह बयान दिया था.

भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे पर क्या विशेष कदम उठाएगी, यह तो साफ नहीं है लेकिन महिला और बाल अधिकार मंत्री मेनका गांधी ने 12 साल की कम उम्र की बच्चियों के साथ बलात्कार करने वालों को मौत की सजा देने की वकालत की है. अभी ऐसे जघन्य अपराधों में फांसी की सजा देने का अधिकार सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के पास है.

 

First published: 19 April 2018, 14:45 IST
 
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