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मन की बातः बोर्ड इम्तिहान से पहले मास्टर पीएम मोदी ने दी छात्रों को बड़ी सीख

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 January 2017, 13:21 IST
(pmonradio.nic.in)

हर माह की तरह इस साल के पहले महीने में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों के सामने अपने मन की बात कही. 2017 में मन की बात के पहले संस्करण में पीएम मोदी बोर्ड परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए बतौर मास्टर बड़ी सीख देते दिखाई दिए. 

पीएम मोदी ने इस दौरान जम्मू-कश्मीर में हिमस्खलन में जान गंवाने वाले जवानों को श्रद्धांजलि दी और वीरता पुरस्कार से सम्मानित होने वाले सैनिकों व उनके परिजनों को शुभकामनाएं दीं. 

30 जनवरी यानी सोमवार को होने वाली महात्मा गांधी की पुण्यतिथि के लिए उन्होंने सभी देशवासियों से सुबह 11 बजे दो मिनट का मौन रखने और बापू को श्रद्धांजलि देने की अपील की.

हालांकि इस बात पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पीएम मोदी के मन की बात के 28वें संस्करण पर संकट के बादल मंडराने लगे थे. लेकिन चुनाव आयोग द्वारा बाद में इसे प्रसारित करने की शर्त के साथ हरी झंडी दे दी गई. उन्होंने चुनाव आचार संहिता को देखते हुए गैर राजनीतिक मुद्दों पर ही बात भी की.

परीक्षा के माहौल को लेकर उन्होंने कहा कि इसे कुछ यूं बना दिया जाता है कि परिवार परेशान, विद्यार्थी परेशान, शिक्षक परेशान यानी एक बड़ा विचित्र सा मनोवैज्ञानिक वातावरण हर घर में नजर आता है.

मास्टर बनकर बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले छात्रों से पीएम मोदी ने कहा,"यह सही समय है कि मैं विद्यार्थी दोस्तों से बातें करूं, उनके अभिभावकों से बातें करूं, उनके शिक्षकों से बाते करूं. परीक्षा अपने आप में एक खुशी का अवसर होना चाहिए. साल भर मेहनत की है, अब बताने का अवसर आया है, ऐसा उमंग-उत्साह का पर्व होना चाहिए." 

इस संस्करण की प्रमुख बातें

  • कई वर्षों से, मैं जहां गया, जिसे मिला, परीक्षा एक बहुत बड़ा परेशानी का कारण नजर आया.
  • परीक्षा को ऐसे लीजिए, जैसे मानो त्योहार है और जब त्योहार होता है तो हमारे भीतर जो सबसे बेस्ट होता है, वही बाहर निकल कर आता है.
  • परीक्षा अपने-आप में एक खुशी का अवसर होना चाहिए, साल भर मेहनत की है, अब बताने का अवसर आया है, ऐसा उमंग-उत्साह का पर्व होना चाहिए.
  • कन्याकुमारी से कश्मीर तक और कच्छ से कामरूप तक, अमरेली से अरुणाचल प्रदेश तक, ये तीन-चार महीने परीक्षा ही परीक्षाएं होती हैं.
  • मैं आपसे कहूंगा 'smile more score more' यानी जितनी ज्यादा खुशी से इस समय को बिताओगे, उतने ही ज़्यादा नंबर पाओगे, करके देखिए.
  • जब टेंशन होती है, तब आपका नॉलेज, आपका ज्ञान, आपकी जानकारी नीचे दब जाती है और आपकी टेंशन उस पर सवार हो जाती है.
  • प्रतिस्पर्द्धा’ एक बहुत बड़ी मनोवैज्ञानिक लड़ाई है. सचमुच में, जीवन को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिस्पर्द्धा काम नहीं आती है.
  • मेरा आपसे आग्रह है- ख़ुद से स्पर्द्धा करने का. पहले क्या किया था, आगे कैसे करूंगा, अच्छा कैसे करूंगा. बस, इस पर ध्यान केंद्रित करें.
  • सर्वांगीण विकास करना है, तो किताबों के बाहर भी एक जिंदगी होती है. वो बहुत विशाल होती है. उसको जीने का सीखने का यही समय होता है.
  • परीक्षा में मेरी दृष्टि से तीन बातें बहुत जरूरी हैं पहला आराम, दूसरा पूरी नींद और दिमाग के सिवाय फिजिकल एक्टिविटी भी होनी चाहिए.
  • कभी-कभी हम परीक्षा को सही परिप्रेक्ष्य में देख नहीं पाते, ऐसा लगता है जैसे इसे जीवन-मरण का प्रश्न बना लिया जाता है.
  • परीक्षा को सफलता-विफलता से नहीं जोड़ना चाहिए.
  • पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइल मैन के नाम से मशहूर अब्दुल कलाम साहब वायुसेना में भर्ती होने गए मगर फेल हो गए. अगर वह उस नाकामी से हार मान जाते तो क्या भारत को इतना बड़ा वैज्ञानिक मिलता.
  • मार्क्स के पीछे भागने की जरूरत नहीं है. जीवन में स्किल और नॉलेज काम आएगा.
  • क्या डॉक्टर के पास जाते वक्त हम उसकी मार्कशीट देखते हैं? लोग डॉक्टर का अनुभव और ज्ञान देखते हैं. 
  • मैं यह भी नहीं कह रहा हूं कि पढ़ना जरूरी नहीं है. अगर अंक के पीछे पड़ गए तो शॉर्टकट अपनाएंगे. अंक के पीछे पड़ने से आप सिकुड़ जाते हैं जबकि ज्ञान पर फोकस करेंगे तो फायदा मिलेगा. 
  • शॉर्टकट वाले रास्ते नकल के कारण बन जाते हैं.
  • प्रतिस्पर्धा नहीं अनुस्पर्धा अपनाएं यानी स्वयं से स्पर्धा करना, बीते हुए कल से आज को बेहतर बनाना सीखें. सचिन तेंदुलकर को ही देख लें, 20 साल तक अनुस्पर्धा करते रहे, अपने ही रिकॉर्ड को तोड़कर नया रिकॉर्ड बनाते रहे.
  • खुद को ही कसौटी पर तौलिए. प्रतिस्पर्धा में पराजय निराशा को जन्म देता है जबकि अनुस्पर्धा में आत्मचिंतन को.
  • किताबों के बाहर भी जिंदगी होती है. पढ़ाई के साथ खेलकूद भी जरूरी है. जो खेलता है वही चमकता है, जो खेलता है वह खिलता है. परीक्षा के तनाव से मुक्त होने के लिए गहरी सांस लेने चाहिए.
  • मेमोरी रिकॉल करने की पॉवर रिलैक्सेशन से बढ़ती है. आप खुद को पांच मिनट का ही ब्रेक दीजिए, लेकिन ब्रेक जरूर दीजिए. ऐसे समय डीप ब्रीथिंग करते हैं, तो बहुत फ़ायदा होता है.
  • कुछ विद्यार्थियों को लगता है कि देर रात तक जागकर ज्यादा पढ़ेंगे, भरपूर नींद अवश्य लीजिए, इससे पढ़ने की ताकत में इजाफा होगा. मेरा व्यकिगत अनुभव है कि आप देर तक जागने के बजाए अच्छी नींद लें. इससे आपका ध्यान बढ़ेगा, आपको ताजगी का एहसास होगा.
  • भरपूर नींद लेने का मतलब ये नहीं कि बस सोते ही रहें, ये कहें कि प्रधानमंत्री जी ने कह दिया है, अब बस जागने की जरुरत नहीं है, सोते रहना है. ऐसा मत करना, वर्ना आपके परिवार जन मुझसे नाराज़ हो जाएंगे और जिस दिन आपकी मार्क्स शीट आएगी, तो उनको आप नहीं मैं ही दिखाई दूंगा.
  • 1 फरवरी 2017 को भारतीय कोस्ट गार्ड के 40 वर्ष पूरे हो रहे हैं. मैं कोस्ट गार्ड के सभी जवानों और अधिकारियों को राष्ट्र के प्रति उनकी सेवा के लिए धन्यवाद देता हूं.
पीएम मोदी के मन की बात के 28वें संस्करण का पूरा टेक्स्ट देखने के लिए यहां क्लिक करें.

First published: 29 January 2017, 13:21 IST
 
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