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नरेंद्र मोदी: बाबा साहेब दलितों के नहीं, पूरे राष्ट्र के मसीहा हैैं

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 March 2016, 12:41 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को दिल्ली में अंबेडकर मेमोरियल का शिलान्यास किया. इसके बाद पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि मैं देश का पहला प्रधानमंत्री हूं, जो आपके बीच आया हूं. यह मेरे लिए बड़े ही सौभाग्य की बात है.

अंबेडकर मेमोरियल लेक्चर कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि मुझे यह अवसर मिला है कि मैं बाबा साहेब के सपनों को साकार करूं. बाबा साहेब साल 1956 में हमें छोड़कर चले गए. आज 60 साल बाद उनकी याद में मेमोरियल बनाया जा रहा है.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस समय अटल बिहारी वाजपेयी जी को याद करना चाहिए. जिन्होंने इस संबंध में पहल करते हुए सार्थक निर्णय लिया, लेकिन उनके बाद आई सरकारों ने यह नहीं होने दिया क्योंकि उनके दिलों में बाबा साहेब नहीं थे.

उन्होंने कहा कि देश में लेबर कानून पर सबसे ज्यादा किसी ने सोचा और काम किया वह बाबा साहेब अंबेडकर थे. पीएम मोदी ने कहा कि मैं आज इस बात की घोषणा करता हूं कि 14 अप्रैल 2018 को मैं इस मेमोरियल का उद्घाटन करूंगा.

मैं यह बताना चाहता हूं कि यह मेमोरियल काफी भव्य होगा. पूरी दुनिया के लिए यह प्रतीक होगा. प्रधानमंत्री  ने कहा कि कई बार हम बाबा साहेब के साथ अन्याय करते हैं. उन्हें केवल दलितों का मसीहा कहना ठीक नहीं है. उन्होंने हर प्रकार के अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई.

पीएम ने डॉ अंबेडकर को 'विश्व मानव' के रूप में देखे जाने का आग्रह किया जैसा कि आज की दुनिया मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मांडेला को देखती है.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं इतिहास में दो व्यक्तित्व को काफी महत्व की दृष्टि से देखता हूं. एक सरदाल पटेल और दूसरे बाबा साहेब अंबेडकर. आजादी के समय भारत रजवाड़ों में बंटा हुआ था.

यहां तक की अंग्रेज भी भारत को बंटा हुआ देखना चाहते थे, लेकिन सरदार पटेल ने इस देश को एक किया. समाज में समस्याओं के निदान के लिए बाबा साहेब ने सार्थक कदम उठाए. सरदार पटेल ने राजनीतिक रूप से भारत को एक किया और बाबा साहेब ने सामाजिक दृष्टि से भारत को एक किया.

पीएम मोदी ने नेहरू सरकार के कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाया कि आखिर बाबा साहेब अंबेडकर को मंत्री पद से इस्तीफा क्यों देना पड़ा. इस बारे में कुछ लोगों के हिसाब से इतिहास लिखा गया. बाबा साहेब ने हिंदू कोड बिल के समय महिलाओं के अधिकारों की बात की, लेकिन उस समय की सरकार उतनी प्रगतिशील नहीं थी कि उनकी बातों को समझती और यही कारण था कि बाबा साहेब ने नेहरू सरकार से इस्तीफा दे दिया.

लेकिन बाबा साहेब ने जो कहा उसे बाद की सरकारों को स्वीकारना पड़ा. इसलिए बाबा साहेब को केवल दलितों का मसीहा दिखाना सही नहीं होगा. वो हर समाज के नेता थे. वो हर पीड़ित की आवाज थे. बाबा साहेब पूरे राष्ट्र के मसीहा हैै.

भाषण के आखिर में पीएम मोदी ने कहा कि राजनीतिक गलियारों में कुछ लोग हमारी सरकार के द्वारा आरक्षण खत्म करने की अफवाह फैलाई जा रही है. उन्होंने कहा कि जिन्हें मिल रहा है, उनसे कोई आरक्षण छीन नहीं सकता.

First published: 21 March 2016, 12:41 IST
 
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