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विडंबना: कश्मीर जल रहा है, मोदी ड्रम बजा रहे हैं

चारू कार्तिकेय | Updated on: 10 February 2017, 1:48 IST

कश्मीर में पिछले चार दिनों से जारी हिंसा में सबसे चिंताजनक बात रही केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया. हिज्बुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी के सुरक्षाबलों से मुठभेड़ में मारे जाने की खबर आठ जुलाई को आई. उसी दिन शाम को अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक़ और यासीन मलिक ने अगले दिन कश्मीर बंद की अपील की. सरकार के जागने के लिए इतने संकेत काफी थे. लेकिन अफसोस ऐसा नहीं हुआ. 

उम्मीद के अनुरूप ही नौ जुलाई को बुरहान का अंतिम संस्कार किया गया. बहुत बड़ी संख्या में उसके जनाजे में लोग शामिल हुए. सरकार ने इस मौके पर हस्बे-मामूल मोबाइल सेवाओं पर रोक लगा दी, कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया और अलगाववादी नेताओं को नजरबंद कर दिया गया.

कश्मीर हिंसा: अब तक 23 लोगों की मौत, गृह मंत्रालय में राजनाथ की अहम बैठक

मीडिया खबरों के अनुसार बुरहान के गृहनगर त्राल में लाखों लोग उसकी मय्यत में शामिल हुए. अगर ये सूचना भी काफी नहीं थी तो विरोध प्रदर्शनों के बीच हुई पहली मौत के बाद भी दिल्ली में बैठे सत्तानशीनों की नींद खुल जानी चाहिए थी.

दिन बीतते बीतते तक 10 लोगों की जान जा चुकी थी. इसके बाद भी दिल्ली से शायद ही किसी प्रतिनिधि को घाटी भेजा गया. भारत के गृह मंत्रालय ने अपनी पहली प्रतिक्रिया देने में एक पूरा दिन लगा दिया. नौ जुलाई को देर शाम 8.12 बजे गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कररके लोगों को मारे जाने पर 'गहरा क्षोभ' जताते हुए घायलों के 'शीघ्र स्वास्थ्य लाभ' की कामना की.

गृह मंत्री का क्षोभ

राजनाथ सिंह ने जम्मू-कश्मीर के  लोगों से शांत रहने की भी अपील की. उन्होंने कहा, "केंद्र राज्य सरकार के साथ मिलकर कश्मीर घाटी में स्थिति सामान्य बनाने के लिए प्रयास कर रहा है." करीब दो घंटे बाद (रात के 9.51) उनके मंत्रालय ने लगभग इसी भाषा में एक प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की.

'गहरे क्षोभ' के बाद राजनाथ सिंह ने श्रीनगर जाना उचित नहीं समझा. उन्होंने जनता को ये भी नहीं बताया कि उनकी जम्मू-कश्मीर के सीएम महबूबा मुफ्ती से इस मामले पर कोई सीधी बात हुई है या नहीं. उन्होंने जम्मू-कश्मीर के उप मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता निर्मल सिंह से भी बात की या नहीं, ये बात किसी को नहीं पता.

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उसके बाद राजनाथ सिंह ने जम्मू-कश्मीर पर कोई ट्वीट नहीं किया. 10 जुलाई को उनके ट्वीटर की चुप्पी भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दी गई जन्मदिन की शुभकामनाओं से टूटी. राजनाथ ने भी फौरन पीएम को शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद दिया. हालांकि गृहमंत्री का जन्मदिन बीतते-बीतते कश्मीर में मरने वालों की संख्या 21 हो चुकी थी.

पीएम विदेश में

आखिर ऐसे मौके पर सबका ध्यान देश के नंबर दो मंत्री पर क्यों हैं? क्योंकि नंबर एक, पीएम नरेंद्र मोदी इस दौरान विदेश दौरे पर हैं. अपने विदेश दौरे के दौरान उन्हें घर की याद बस अपने मंत्रियों के जन्मदिन की बधाई देने के लिए आई. उन्होंने गृहमंत्री के अलावा रेल मंत्री सुरेश प्रभु को भी विदेश प्रवास के दौरान ही ट्विटर पर हैप्पी बर्डे बोला.

ट्विटर पर अतिसक्रिय पीएम ने अब तक कश्मीर मसले पर एक भी ट्वीट नहीं किया है. काश कि इस बीच महबूबा मुफ्ती या निर्मल सिंह का जन्मदिन होता तो हमारे पीएम को कश्मीर की शायद याद आ जाती.

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बुरहान की मौत के चार दिनों के अंदर 23 अन्य लोगों की मौत के बावजूद पीएम ने कश्मीर के हालिया घटनाक्रम पर कोई ट्वीट करना जरूरी नहीं समझा, कोई बयान जारी करना तो दूर की बात है.

प्रमुख भारतीय अखबारों के मुख्य पृष्ठ पर सोमवार को दो तस्वीरें प्रमुखता से छपीं. एक, कश्मीर से जुड़ी और दूसरी विदेश दौरे पर गए प्रसन्नचित्त पीएम मोदी की. दोनों तस्वीरों को एक साथ देखें तो भारत की हालिया विडंबना उजागर होती है.

श्यामा प्रसाद मुखर्जी की परंपरा

दूसरी तरफ पीएम मोदी के 'दोस्त' अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा डलास में पांच पुलिस अफसरों के मारे जाने के बाद अपने यूरोप दौरे को बीच में छोड़कर देश वापस हो गए.

ऐसे में ये यकीन करना मुश्किल लगता है कि देश में उस पार्टी की सरकार है जो खुद को श्यामा प्रसाद मुखर्जी की वारिस मानती है. मुखर्जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे, जिसे बीजेपी का प्रारंभिक रूप माना जाता है.

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बीजेपी अक्सर ये नारा लगाती है, "जहां हुए बलिदान मुखर्जी, वो कश्मीर हमारा है." श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मृत्यु जम्मू-कश्मीर की जेल में हुई थी.  

अब उनके वैचारिक अनुयायी इस गाढ़े वक्त में कश्मीर जाना तो दूर उसपर खुलकर बोलना तक जरूरी नहीं समझ रहे. ऐसे में भारत की 'कश्मीर समस्या' सुलझेगी या और उलझेगी ये कहना मुश्किल है.

First published: 11 July 2016, 2:37 IST
 
चारू कार्तिकेय @charukeya

असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़, राजनीतिक पत्रकारिता में एक दशक लंबा अनुभव. इस दौरान छह साल तक लोकसभा टीवी के लिए संसद और सांसदों को कवर किया. दूरदर्शन में तीन साल तक बतौर एंकर काम किया.

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