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पीएम मोदी ने रेल मंत्री पीयूष गोयल की बड़ी योजना को ठुकराया, 78,000 करोड़ होेने थे खर्च

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 April 2018, 13:29 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रेलवे की महत्वाकांक्षी योजना को ना कह दिया. ये योजना यूरोप की ट्रैन कंट्रोल स्कीम लेवल-2 पर आधारित है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना के लिए सहमति नहीं दी, जिसकी लागत 78 हजार करोड़ थी. रेलवे बोर्ड की एक मीटिंग के दौरान ये फैसला लिया गया.

मोदी ने लागत के पहलुओं को उठाया है और साथ ही तकनीकी को विकसित करने को कहा है. उनका मानना है कि भारतीय परिस्तिथियों के हिसाब से मौजूदा तकनीकी अभी कमजोर है.

उन्होंने रेलवे को कहा है कि इसके लिए एक व्यापक परीक्षण किया जाना चाहिए. ये परीक्षण रेलवे के हैवी ट्रैफिक एरिया में किया जाना चाहिए और उसकी सफलता के नतीजों के आधार पर ही इस योजना को आगे बढ़ाया जाये.

रेलवे मंत्री पीयूष गोयल जो इस योजना के पक्षधर हैं उनका मानना था कि पूरा कॉन्ट्रैक्ट एक ही कंपनी को दिया जाये, जिससे की आर्थिक तौर पर भी फायदा हो. वित्त विभाग ने इसमें शामिल विशाल लागत का आंकड़ा तैयार किया था जिसके हिसाब से इस योजना को पूरा करने के लिए निर्धारित रकम से डेढ़ गुना ज्यादा खर्च होगा.

सूत्रों के अनुसार मीटिंग में पीएम ने कहा कि भविष्य में इस तरह के संकेत अपग्रेड के लिए स्वदेशी विकसित तकनीकी तैयार की जाए. रेलवे बोर्ड एआरटीएस-लेवल 2 के लाभों का विवरण देते हुए अर्नस्ट एंड यंग द्वारा तैयार की गई एक परियोजना रिपोर्ट का मूल्यांकन कर रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार, 78,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत है और इसके लिए 8 कंपनियों से संपर्क किया जा सकता है. येकंपनियां सीमेंस, थेल्स, अलस्टॉम, बॉम्पाइडर, एस्साल्दो, एसटीएस, सीएएफ, और मेमैक ग्रुप हैं.

ईटीसीएस-लेवल 2, लोकोमोटिव ट्रेन सिग्नल को ट्रैक करने के लिए ट्रैक के साथ स्थापित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की एक जटिल प्रणाली है, इसकी मुख्य विशेषता यह है कि पटरियों में लगाए गए उपकरणों को नियमित रूप से सिंक्रोनाइज़ किया जाता है ताकि मौजूदा संकेतों को मार्ग पर दिखाया जा सके और वायरलेस के माध्यम से चल रहे लोकोमोटिव में उस सूचना को अपडेट किया जा सके.  यह एक्सीडेंट की संभावना को कम कर देता है क्योंकि ट्रेनों को इलेक्ट्रॉनिक सिग्नलों से रोक दिया जाता है, और लोकोमोटिव स्वचालित रूप से बंद हो जाता है.

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विश्व स्तर पर ये वायरलेस तकनीक मोबाइल संचार (जीएसएम) के लिए 3 जी-ग्लोबल सिस्टम पर आधारित है, लेकिन ई एंड वाई रिपोर्ट ने फ्यूचरिस्टिक 4-जी लॉन्ग-टर्म इवोल्यूशन (एलटीई) के आधार पर एक प्रणाली का दावा किया है, जिसका अभी परिक्षण होना है.

मंत्रालय के वित्त विभाग के अलावा, परियोजना पर रेलवे बोर्ड को सलाह देने के लिए एक आंतरिक समिति का गठन किया था, जिसने परियोजना के लाभों से जुड़े परिचालन क्षमता बढ़ाने और निवेश पर रिटर्न पर सवाल उठाए थे.

नई प्रणाली का समर्थन करते हुए, गोयल ने बजट के दिन कहा था, "अभी तक, पूरी दुनिया में, कुल 60,000 किमी की इस प्रणाली को स्थापित किया गया है. हम अकेले भारत में ऐसा कर रहे है. भारत खेल के नियमों को बदल देगा. लागत इतनी कम होगी कि कोई भी कीमत के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकेगा.''

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित उद्योग के खिलाड़ियों के साथ अपने बातचीत में, गोयल यह कह रहे थे कि रेलवे लागत लाभ को अधिकतम करने के लिए 60,000 किमी से एक खिलाड़ी को पूरे अनुबंध को देना चाहेंगे.

First published: 9 April 2018, 13:22 IST
 
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